जिद… सच की

भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी रुख के निहितार्थ

सवाल यह है कि अमेरिका जीएसपी नीति की समीक्षा क्यों करना चाहता है? संशोधन से भारतीय अर्थव्यवस्था पर कितना असर पड़ेगा? क्या दोनों देशों के रिश्तों पर नकारात्मक असर पड़ेगा? क्या इसके प्रतिक्रिया में की गई कार्रवाई एक नए टे्रड वार को जन्म देगी? क्या ट्रंप सरकार अमेरिकी कारोबारियों के दबाव में ऐसा करने जा रही है?

अमेरिका की नजर अब भारतीय उत्पादों पर है। ट्रंप सरकार भारत से अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले उत्पादों पर जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रिफरेंसेज (जीएसपी)नीति की समीक्षा करने जा रही है। अमेरिका अपनी अर्थव्यवस्था को देखते हुए भारतीय उत्पादों पर लगने वाले नाममात्र के आयात शुल्क में रद्दोबदल कर सकता है। यदि ऐसा हुआ तो चीन की तरह भारत से भी अमेरिका का ट्रेड वार शुरू हो सकता है। सवाल यह है कि अमेरिका जीएसपी नीति की समीक्षा क्यों करना चाहता है? संशोधन से भारतीय अर्थव्यवस्था पर कितना असर पड़ेगा? क्या दोनों देशों के रिश्तों पर नकारात्मक असर पड़ेगा? क्या इसके प्रतिक्रिया में की गई कार्रवाई एक नए टे्रड वार को जन्म देगी? क्या ट्रंप सरकार अमेरिकी कारोबारियों के दबाव में ऐसा करने जा रही है?

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप नाममात्र का टैक्स देकर अमेरिकी बाजार में पहुंचे वाले 3500 भारतीय उत्पादों की समीक्षा करने की तैयारी में हैं। विकासशील देशों में भारत, अमेरिका के जीएसपी का सबसे अधिक फायदा उठा रहा है। भारत के 5.6 अरब डॉलर के 3500 उत्पादों को अमेरिकी बाजारों में नाममात्र या शून्य टैक्स पर पहुंच मिली है। इनमें टैक्सटाइल, इंजीनियरिंग, जवाहरात, जेवर और रासायनिक उत्पाद शामिल हैं। अमेरिका के ऐसा करने के पीछे कई वजहें हैं। ट्रंप अमेरिका फस्र्ट की नीति पर चल रहे हैं। वे अमेरिकी उद्योगों को संरक्षण देने की नीति पर चल रहे हैं। अमेरिकी सरकार को आशंका है कि दूसरे देशों से आने वाले गुणवत्तापूर्ण उत्पाद अमेरिकी उत्पादों को चलन से बाहर कर सकते हैं। भारतीय उत्पादों की अमेरिका में काफी मांग है। जाहिर है इससे वहां के कारोबारी भी चिंतित है। इसके अलावा अमेरिकी कारोबारी मानते हैं कि भारत कई अमेरिकी उत्पादों के आयात पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाता है। अमेरिका के डेयरी और मेडिकल डिवाइस उद्योग ने भारत को जीएसपी के तहत मिल रही सुविधाओं पर पुनर्विचार की याचिका दी है। इन उद्योगों का आरोप है कि भारत में उनकी तरफ से किए जा रहे निर्यातों पर कई पाबंदियां हैं। ट्रंप सरकार अमेरिकी कारोबारियों को नाराज करने की स्थिति में नहीं है। बावजूद इसके यदि ट्रंप सरकार ने जीएसपी में रद्दोबदल किया तो भारत भी अमेरिकी उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। इससे नया ट्रेड वार शुरू हो सकता है। दोनों देशों के बीच खटास पैदा हो सकती है। हालांकि अमेरिका, भारत को अहम साझीदार मानता है। साथ ही चीन की विस्तारवादी नीतियों पर अंकुश लगाने के लिए वह भारत का इस्तेमाल करना चाहता है, लिहाजा बहुत कम उम्मीद है कि अमेरिका भारत की नाराजगी मोल ले। उम्मीद यही है कि दोनों देश इस मामले में कोई बीच का रास्ता निकाल लें।

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