कानून व्यवस्था पर कोर्ट की टिप्पणी के मायने

अहम सवाल यह है कि आखिर इलाहाबाद हाईकोर्ट को यह टिप्पणी क्यों करनी पड़ी? क्या वाकई प्रदेश में कानून का राज खत्म हो गया है? क्या रसूखदारों और आम आदमी के साथ पुलिस का रवैया अलग-अलग है? क्या कानून की नजर में सब बराबर वाली अवधारणा केवल संविधान में दर्ज है?

कानून व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार के खिलाफ बेहद सख्त टिप्पणी की है। गैंगरेप के आरोपी भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद भी पुलिस द्वारा उनकी गिरफ्तारी नहीं करने पर कोर्ट ने कहा कि प्रदेश की कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। अदालत की यह टिप्पणी बेहद गंभीर और चिंतित करने वाली है। अहम सवाल यह है कि आखिर इलाहाबाद हाईकोर्ट को यह टिप्पणी क्यों करनी पड़ी? क्या वाकई प्रदेश में कानून का राज खत्म हो गया है? क्या रसूखदारों और आम आदमी के साथ पुलिस का रवैया अलग-अलग है? क्या कानून की नजर में सब बराबर वाली अवधारणा केवल संविधान में दर्ज है? क्या पुलिस के लचर कार्यप्रणाली ने सरकार को कठघरे में नहीं खड़ा कर दिया है? क्या इस तरह के क्रियाकलापों से पुलिस के प्रति लोगों का अविश्वास नहीं बढ़ेगा?
हाईकोर्ट की टिप्पणी ने एक बार फिर सरकार और पुलिस दोनों की मंशा पर सवाल उठाए हैं। इसमें दो राय नहीं है कि रसूखदारों के मामले में पुलिस का रवैया अक्सर ढीला रहता है। पुलिस रसूखदारों के खिलाफ मामला दर्ज करने से कतराती है या फिर मिलीभगत कर मामले को रफा-दफा कर देती है। यही नहीं कई बार वह पीडि़त को अपराधी बना देती है या हवालात में बंद कर देती है। ऐसे में यदि मामला सत्ता धारी पार्टी के विधायक से जुड़ा हो तो फिर पुलिस खुद को असहाय ही पाती है। अभी तक की छानबीन में पुलिस का कुछ ऐसा ही रवैया सामने आया है। फिलहाल इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है और उम्मीद है कि आरोपियों के खिलाफ शिकंजा कसा जाएगा। प्रदेश में कानून व्यवस्था की यह स्थिति तब है जब राज्य सरकार ने यूपी को अपराध मुक्त करने का अभियान चला रखा है। कई ईनामी अपराधी मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं। ताजा मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि रसूखदारों के लिए कानून का कोई महत्व नहीं है। यह सारी व्यवस्था केवल आम आदमी के लिए है। कोर्ट की ताजा टिप्पणी इसी ओर इंगित कर रही है। पूरे प्रकरण में कोर्ट ने जिस तरह प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं उसने पुलिस, नेता और रसूखदारों के गठजोड़ की पोल खोल दी है। इसने सरकार की प्रतिष्ठïा को धक्का पहुंचाया है। सरकार को यह बात समझनी होगी कि यदि प्रदेश में कानून का राज वाकई कायम करना है तो सभी के साथ समान व्यवहार करना होगा। यदि वक्त रहते सरकार ने इस मामले पर कोई ठोस पहल नहीं की तो इसके परिणाम बेहद खराब होंगे।

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