महिला अपराध और पुलिस तंत्र

अहम सवाल यह है कि महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों की वजहें क्या हैं? क्या पुलिस अपराधियों के भीतर खाकी का खौफ पैदा करने में असफल साबित हो रही है? क्या सरकार महिलाओं की सुरक्षा के खोखले दावे कर रही है? क्या महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए किसी नए तंत्र की जरूरत है?

प्रदेश में महिलाओं के प्रति अपराधों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। हत्या, बलात्कार और अपहरण की घटनाएं आम होती जा रही हैं। ये वारदातें महिलाओं की सुरक्षा के सरकारी दावों की पोल खोल रही हैं। महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस कर रही है। अहम सवाल यह है कि महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों की वजहें क्या हैं? क्या पुलिस अपराधियों के भीतर खाकी का खौफ पैदा करने में असफल साबित हो रही है? क्या सरकार महिलाओं की सुरक्षा के खोखले दावे कर रही है? क्या महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए किसी नए तंत्र की जरूरत है? क्या समाज की पुरुषवादी सामंती सोच महिला अपराधों को बढ़ावा दे रही है।
प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध की कई वजहें हैं। समाज में आज भी पुरुषवादी सामंती सोच व्याप्त है। यह महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने को तैयार नहीं है। यह सामंती सोच दहेज उत्पीडऩ और हत्या जैसे अपराधों को बढ़ावा देती है। बाजारवाद ने महिलाओं को वस्तु बना दिया है। इसके कारण भी महिला अपराध बढ़ रहे हैं। यही नहीं पुलिस की कार्यप्रणाली भी महिला अपराधों में इजाफे का कारण है। मसलन बलात्कार के मामले में कई बार पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करती है। ऐसे मामलों में कई बार तो कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही पुलिस रिपोर्ट दर्ज करती है। पुलिस पीडि़ता पर आरोपी से समझौते का दबाव बनाती है। इसके अलावा पुलिस अपराध के आंकड़ों को कम दिखाने के लिए अपराधों को दर्ज करने में आनाकानी करती है। हकीकत यह है कि पुलिस तंत्र आकंठ भ्रष्टïाचार में डूबा है। लिहाजा पैसे के बल पर अपराधी अपराध कर पुलिस के शिकंजे से बच जाते हैं। इसके कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। यही वजह है कि प्रदेश में महिला अपराधों पर लगाम नहीं लग पा रही है। आंकड़ों भी इसकी पोल खो रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक यूपी में महिलाओं और बालिकाओं से छेडख़ानी की घटनाएं एक साल के भीतर दोगुनी हो गई हैं। वर्ष 2016-17 में 495 छेडख़ानी की घटनाएं हुईं थी जबकि अप्रैल 2017 से जनवरी 2018 में 987 छेडख़ानी की घटनाएं हुईं। महिला अपहरण की वारदातें 9828 से बढक़र 13226 पहुंच गई हैं। बलात्कार की घटनाओं में तेजी से इजाफा हुआ है। बलात्कार की घटनाएं 2943 से बढक़र 3704 पर पहुंच गई हैं जबकि बलात्कार की कोशिश की वारदात 8159 से बढक़र 11404 के आंकड़े को पार कर चुकी हैं। दहेज उत्पीडऩ का ग्राफ भी बढ़ा है। ये आंकड़ा 2084 से बढक़र 2223 पर पहुंच गया है। इन आंकड़ों से साफ है कि प्रदेश में महिलाएं असुरिक्षत है। यदि सरकार महिला अपराधों को कम करना चाहती है तो वह पुलिस तंत्र में व्याप्त भ्रष्टïाचार को कम करे साथ ही अधिक से अधिक फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना करे। इन अदालतों के जरिए वह मुकदमों का निस्तारण कर अपराधियों को जल्द से जल्द सजा दिलाना सुनिश्चित करे।

Pin It