पाताल में जा रहा पानी खतरे की घंटी

सवाल यह है कि भूमिगत जलस्तर के गिरने की असली वजह क्या है? क्या विकास की अंधाधुंध दौड़ और पेड़ों की कटाई इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं? क्या जागरूकता के अभाव के कारण भूमिगत जलस्तर नीचे जा रहा है? क्या वाटर हार्वेस्टिंग योजना फेल हो चुकी है?

प्रदेश में भूमिगत जलस्तर गिरता जा रहा है। इसका सीधा असर खेती और पेयजल पर पड़ रहा है। यही हाल रहा तो लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ेगा। राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के कई बड़े शहरों में पानी की किल्लत होने लगी है। कई इलाके डार्क जोन में तब्दील हो रहे हैं। भूमिगत स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। गर्मियों में स्थिति और भयानक हो जाएगी। सवाल यह है कि भूमिगत जलस्तर के गिरने की असली वजह क्या है? क्या विकास की अंधाधुंध दौड़ और पेड़ों की कटाई इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं? क्या जागरूकता के अभाव के कारण भूमिगत जलस्तर नीचे जा रहा है? क्या वाटर हार्वेस्टिंग योजना फेल हो चुकी है? क्या जल संकट को सरकार गंभीरता से नहीं ले रही है? क्या जल संकट विकास को बाधित नहीं करेगा?
भारत समेत पूरे विश्व में जल संकट मंडरा रहा है। स्थितियां भयावह होती जा रही है। कई शहरों का भूगर्भ जल समाप्त होने की कगार पर है। जहां तक उत्तर प्रदेश का सवाल है, यहां की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही है। जल संकट के पीछे कोई एक वजह नहीं है। बेतरतीब विकास के कारण न केेवल पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की गई बल्कि भूमिगत जल का भयानक दोहन भी जारी है। भूमिगत जलस्तर को बनाये रखने वाले कुएं और तालाब पाट दिए गए। इन तालाबों को पाट कर इमारतें खड़ी कर दी गई हैं। पेड़ों की कटाई के कारण जलचक्र टूट चुका है। पेड़ों की जड़ें वर्षा जल को संग्रहित कर जमीन के भीतर पहुंचाने का काम करती हैं। पेड़ों के काटे जाने से यह प्रक्रिया बाधित हो गई है। इसके अलावा वॉटर हार्वेस्टिंग योजना भी सही तरीके से लागू नहीं हो सकी है। लिहाजा कई शहर डार्क जोन में चले गए हैं। राजधानी समेत आगरा, फिरोजाबाद, वाराणसी व अन्य कई शहर पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। आगरा डार्क जोन में तब्दील हो रहा है। यहां के 15 ब्लॉक में 12 ब्लॉक डार्क जोन घोषित किए जा चुके हैं। भूगर्भ विज्ञानियों के मुताबिक फिरोजाबाद में 2020 के बाद पानी की खतरनाक स्थिति पैदा होगी। मथुरा के बल्देव, नौह झील, राया, फरह डार्क जोन में पहुंच चुके हैं। लखनऊ में भी भूमिगत जलस्तर तेजी से गिर रहा है। आलमबाग, त्रिवेणी नगर, जलालपुर, लालबाग, दीनदयाल नगर, लालकुर्ती समेत कई इलाकों में भूमिगत जलस्तर गिरता जा रहा है। इसका सीधा असर खेती पर पड़ रहा है। फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। फसलों के उत्पादन पर असर पड़ रहा है। यदि सरकार ने जल्द ही भूमिगत जलस्तर को बढ़ाने की कोशिश नहीं की तो कई शहर बंजर हो जाएंगे और इसका सीधा असर प्रदेश के विकास पर पड़ेगा।

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