गंगा हरीतिमा अभियान के निहितार्थ

क्या गंगा हरीतिमा अभियान धरातल पर उतर पाएगा? क्या इसका हश्र भी वृक्षारोपण अभियान की तरह हो जाएगा? क्या पौधरोपण के बाद इनकी देखरेख की जिम्मेदारी संबंधित विभाग गंभीरता से संभालेंगे? क्या गंगा को अविरल और निर्मल करने की यह मुहिम भ्रष्टचार की भेंट नहीं चढ़ेगी?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंगा हरीतिमा अभियान का शुभारंभ कर दिया है। इसके तहत बिजनौर से बलिया तक बहने वाली गंगा नदी के दोनों तटों पर पौधे लगाए जाएंगे। यह काम वन विभाग और मनरेगा की मदद से किया जाएगा। अभियान से न केवल गंगा को अविरल और निर्मल बनाने में मदद मिलेगी बल्कि इससे प्रदेश के वन क्षेत्र में भी भारी इजाफा होगा। इस मौके पर सीएम ने एक व्यक्ति एक वृक्ष का नारा भी दिया। सरकार की यह पहल सराहनीय है। बावजूद कुछ सवाल अभी भी हैं। क्या गंगा हरीतिमा अभियान धरातल पर उतर पाएगा? क्या इसका हश्र भी वृक्षारोपण अभियान की तरह हो जाएगा? क्या पौधरोपण के बाद इनकी देखरेख की जिम्मेदारी संबंधित विभाग गंभीरता से संभालेंगे? क्या गंगा को अविरल और निर्मल करने की यह मुहिम भ्रष्टचार  की भेंट नहीं चढ़ेगी? क्या सरकार ने इसके सफल क्रियान्वयन के लिए कोई ठोस कार्ययोजना बनायी है?
असंतुलित विकास ने सबसे ज्यादा नुकसान पर्यावरण का किया है। बाजारवादी नीतियों के चलते पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की गई। शहरों और इनके आसपास के क्षेत्रों से हरियाली गायब हो गई। पेड़ों की कटाई ने वातावरण में प्रदूषण का जहर घोल दिया। ये पौधे न केवल प्रदूषित गैसों को वातावरण से सोख लेते हैं बल्कि वर्षा भी कराते हैं। साथ ही यह वर्षा जल को अपनी जड़ों के जरिए जमीन के भीतर भेजकर भूमिगत जलस्तर को भी बढ़ाते हैं। प्रदूषण का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। अधिकांश शहरों में प्रदूषण के कारण बच्चों से लेकर बूढ़े तक गंभीर रोगों के शिकार हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश में कमोबेश यही हाल है। पर्यावरण की रक्षा के लिए वृक्षारोपण अभियान शुरू किया गया। हर साल कई करोड़ वृक्षों को लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया जाता है। लेकिन हकीकत में ये पौधे कहीं भी वृक्ष बनते नहीं दिख रहे हैं। कई स्थानों पर तो विभागीय अफसरों ने कागजों पर ही जंगल उगा दिए और जब पोल खुली तो बगलें झांकते मिले। जहां पेड़ लगाए भी गए थे, उसमें एक दो ही किसी तरह बचे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि पौधों का रोपण तो किया गया लेकिन इनकी देखभाल नहीं की गई। उत्तर प्रदेश में हर साल कई करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया जाता है। ये पौधे सरकारी फाइलों में आंकड़ों में तब्दील होकर रह जाते हैं। जाहिर है, यदि सरकार गंगा हरीतिमा अभियान को धरालत पर उतारना चाहती है तो उसे इसकी उचित निगरानी और पौधों के रख-रखाव की व्यवस्था भी करनी होगी। साथ ही पौधों के नाम पर हो रहे भ्रष्टचार के खेल को भी बंद करना होगा।

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