जानलेवा सडक़ हादसे सिस्टम और सवाल

अहम सवाल यह है कि इन सडक़ दुर्घटनाओं के लिए कौन जिम्मेदार है? क्या सडक़ों की खराब बनावट, टै्रफिक नियमों की अनदेखी और तेज रफ्तार हादसों के लिए जिम्मेदार हैं? क्या लचर और भ्रष्टाचार में डूबा सिस्टम सडक़ दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार है? क्या ऐसे जानलेवा हादसों को कम करने की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है?

प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पचास से अधिक लोगों से भरी एक टै्रक्टर ट्रॉली पुल के नीचे आ गिरी। हादसे में कई लोगों की मौत हो गई। बच्चों समेत चार दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। इनमें कई की हालत नाजुक है। सभी का शहर के ट्रामा सेंटर में इलाज चल रहा है। ये हादसा एक बानगी भर है। प्रदेश में आए दिन सडक़ दुर्घटनाओं में लोगों की जानें जा रही हैं। बावजूद इसके सडक़ हादसों पर लगाम लगाने के लिए आज तक कोई ठोस उपाय नहीं किए गए। अहम सवाल यह है कि इन सडक़ दुर्घटनाओं के लिए कौन जिम्मेदार है? क्या सडक़ों की खराब बनावट, टै्रफिक नियमों की अनदेखी और तेज रफ्तार हादसों के लिए जिम्मेदार हैं? क्या लचर और भ्रष्टाचार में डूबा सिस्टम सडक़ दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार है? क्या ऐसे जानलेवा हादसों को कम करने की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है? क्या चालक की लापरवाही जानलेवा साबित हो रही है?
प्रदेश में सडक़ हादसे साल दर साल बढ़ते जा रहे हैं। इन हादसों के लिए कोई एक कारण जिम्मेदार नहीं है। सडक़ की बनावट हादसों के लिए एक बड़ा कारण है। सडक़ों के गड्ढे और मानकों के विपरीत बने स्पीड ब्रेकर हादसों को न्यौता दे रहे हैं। ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन कई बार हादसों का कारण बनता है। तेज रफ्तार के कारण वाहन को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है, जिसके कारण हादसे होते हैं। राजधानी लखनऊ में कई चौराहों पर सिग्नल सिस्टम खराब पड़े हैं। कई चौराहों पर ट्रैफिक सिपाही नहीं दिखते हैं। इसके कारण यातायात व्यवस्था बिगड़ जाती है। कई बार लोग रेड लाइट जंप कर जाते हैं। वाहन चलाते समय मोबाइल को प्रयोग भी हादसों की बड़ी वजह बन रही है। नशे में वाहन चलाने के कारण भी हादसों की संख्या बढ़ रही है। भ्रष्टाचार  के कारण बिना परीक्षण ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं। ऐसे चालक भी सडक़ हादसों का कारण बनते हैं। ट्रांसपोर्ट और हाईवे मिनिस्टी की रिपोर्ट के मुताबिक रोड हादसे में सबसे ज्यादा 18-35 आयु वर्ग के लोगों की मौत हो रही है। हादसों के सबसे ज्यादा शिकार दो पहिया चालक हो रहे हैं। हादसों के मामले में तमिलनाडु पहले नंबर पर है, जबकि मध्य प्रदेश और कर्नाटक दूसरे नंबर पर हैं। वहीं हादसों में मरने वालों की सबसे अधिक संख्या उत्तर प्रदेश से हैं। जहां तक पूरे देश का सवाल है, सडक़ हादसों की स्थिति भयावह होती जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक 2020 तक देश में होने वाली अकाल मौतों में सडक़ दुर्घटना बड़ी वजह होगी। एक अनुमान के अनुसार उस समय प्रति वर्ष पांच लाख छियालीस हजार लोग सडक़ हादसों की वजह से मरेंगे। जाहिर है यदि सडक़ हादसों को रोकना है तो सरकार को इसके लिए ठोस पहल करनी होगी। ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन कराना सुनिश्चित करना होगा। साथ ही लोगों को जागरूक भी करना होगा।

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