राजधानी के अस्पतालों में आग से बचाव के नहीं हैं पर्याप्त इंतजाम, प्रशासन बेखबर

लोकबंधु, सिविल समेत चार अस्पतालों में नहीं है फायर फाइटिंग सिस्टम
कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा, मरीजों की जान के साथ हो रहा खिलवाड़

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए राजधानी के अस्पतालों में पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। राजधानी के जिला अस्पताल हों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हो या निजी अस्पताल महज कुछ ही अस्पताल ऐसे हैं जहां आग से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम हैं। यह स्थिति तब है जब बीते एक साल में राजधानी के कई अस्पतालों में आग लगने की बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं। वहीं अस्पताल प्रशासन इस सबसे बेखबर है। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
जिला अस्पतालों की बात करें तो राजधानी के छह जिला अस्पतालों में से महज दो ही अस्पतालों में फायर फाइटिंग सिस्टम लगा हुआ है। अन्य अस्पतालों में अब भी आग बुझाने के लिए महज अग्नि शमन यंत्र ही एकमात्र विकल्प है। राजधानी में गोमतीनगर स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल व बलरामपुर अस्पताल में फायर फाइटिंग सिस्टम की व्यवस्था है। इसके अलावा हजरतगंज स्थित सिविल अस्पताल, आलमबाग स्थित लोकबंधु अस्पताल, राजाजीपुरम स्थित रानी लक्ष्मीबाई अस्पताल व महानगर स्थित भाऊराव देवरस (सिविल) अस्पताल में फायर फाइटिंग सिस्टम की व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा महिला अस्पतालों में डफरिन अस्पताल में फायर फाइटिंग सिस्टम का काम अधूरा पड़ा हुआ है वहीं झलकारीबाई अस्पताल में इसकी व्यवस्था है ही नहीं।

छह अस्पतालों को मिला है बजट

आग से पर्याप्त इंतजाम के लिए शासन की ओर से पूरे प्रदेश में 120 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों व 30 जिला अस्पतालों का चयन किया गया है। इनमें से राजधानी के छह अस्पतालों को फायर फाइटिंग सिस्टम के लिए बजट दिया गया है। लेकिन इसमें एक भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल नहीं हैं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक सिविल अस्पताल को 1 करोड़ 21 लाख रुपए, वीरांगना झलकारीबाई को 58 हजार 84 हजार, ठाकुरगंज टीबी अस्पताल को 77 लाख 37 हजार, महानगर स्थित बीआरडी चिकित्सालय को 67 लाख 85 हजार, राजाजीपुरम के रानी लक्ष्मीबाई संयुक्त चिकित्सालय को 78 लाख 73 हजार तथा लोक बंधु राजनारायण संयुक्त चिकित्सालय को 96 लाख 97 हजार रुपए की वित्तीय स्वीकृति दी गई है।

अधिकांश निजी अस्पतालों में भी व्यवस्था नहीं

राजधानी के निजी अस्पतालों के भी यही हाल हैं। यहां कुछ नामचीन अस्पतालों को छोड़ दें तो अधिकतर अस्पतालों में आग पर काबू पाने की कोई व्यवस्था नहीं है। खासकर नर्सिंग होम तो इसके लिए आवेदन तक नहीं करते हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से बीते छह माह में जितने भी निजी अस्पतालों पर छापेमारी की गई है। इनमें कहीं भी फायर से एनओसी व फायर फाइटिंग सिस्टम तो दूर आग से बचाव के बुनियादी इंतजाम तक नहीं पाए हैं। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से कार्रवई भी की जा चुकी है। गत एकसाल में राजधानी के कई अस्पतालों में आग लगने की बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं बावजूद कोई व्यवस्था नहीं की गई।

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