दूर तक दिखेगा गोरखपुर उपचुनाव परिणाम का असर, तय होगी दो ब्राह्मïण घरानों की राजनीति

हरिशंकर तिवारी और अमरमणि की भी होगी परीक्षा, दोनों नेताओं का है गोरखपुर में खासा प्रभाव
14 मार्च को आने हंै लोकसभा उपचुनाव के परिणाम, नतीजों पर लगी है सबकी नजर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। गोरखपुर संसदीय सीट के लिए हुए उपचुनाव में जीत चाहे जिसकी हो इसका असर दूर तलक जाएगा। इस बार मंदिर से हटकर ब्राह्मïण चेहरे के भाजपा का उम्मीदवार होने से पूर्वांचल के ब्राह्मïणों में असर रखने वाले दो राजनीतिक घरानों की भी परीक्षा है। ये राजनीतिक घराने हैं अमरमणि और हरिशंकर तिवारी का। इसमें अमरमणि परिवार जहां योगी की शरण में है वहीं हरिशंकर तिवारी का परिवार बसपा से जुड़ा है। गोरखपुर के रहने वाले इन दोनों नामचीन ब्राह्मïणों का नाता महराजगंज जिले की राजनीति से है लेकिन गोरखपुर में रहने के नाते इनका असर वहां भी है। अमरमणि सजायाफ्ता होने तक जिले के नौतनवां विधानसभा की राजनीति से जुड़े रहे तो हरिशंकर तिवारी और बाद में उनके भांजे गणेश शंकर पांडेय का कार्यक्षेत्र महराजगंज ही रहा है। विधानपरिषद के पूर्व सभापति गणेश शंकर पांडेय विधानसभा का पिछला चुनाव जिले के पनियरा विधानसभा क्षेत्र से लडक़र हारे थे। अब उनकी निगाह बसपा के टिकट पर महराजगंज संसदीय सीट से लडऩे की है।
कभी दो जिस्म एक जान माने जाने वाले अमरमणि और हरिशंकर तिवारी की राह अब अलग-अलग है। पूर्व की सरकारों में अहम भूमिका निभाने वाले हरिशंकर तिवारी का भले ही अपना अलग राजनीतिक दल हो लेकिन उनके दोनों बेटे बसपा से जुड़े हैं। बड़े बेटे भीष्म शंकर तिवारी खलीलाबाद से बसपा से लोकसभा सदस्य रह चुके हैं तो छोटे बेटे विनय शंकर तिवारी बड़हलगंज से बसपा के विधायक हैं। दूसरी ओर अमरमणि तिवारी अखिलेश राज में सपा से रूखसत कर दिए जाने के बाद अब योगी की शरण में हैं। कहने को तो उनके बेटे अमनमणि नौतनवां सीट से निर्दल विधायक हैं लेकिन वे पूरी तरह योगी के सेवक बन चुके हैं। गोरक्षनाथ मंदिर और पूर्वांचल के ब्राह्मïणों में 36 का रिश्ता रहा है लेकिन गोरखपुर संसदीय चुनाव में पार्टी ने संगठन के क्षेत्रीय अध्यक्ष उपेंद्र दत्त शुक्ल को टिकट देकर इस मिथक को तोडऩे का प्रयास किया है कि योगी आदित्यनाथ ब्राह्मïण विरोधी हैं, जैसाकि हरिशंकर तिवारी खेमा इस बात को प्रचारित करता रहता है। हरिशंकर तिवारी खेमे के अमरमणि त्रिपाठी परिवार और गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष तथा सहजनवा से विधायक शीतल पांडेय की योगी से निकटता भी योगी के ब्राह्मïण विरोधी होने के मिथक को तोडऩे का ही प्रयास है।
महराजगंज की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे अमनमणि तथा गणेश शंकर पांडेय की गोरखपुर उपचुनाव में ब्राह्मïण मतों को अपने-अपने पक्ष के उम्मीदवारों को दिलाने की चुनौती है। अब अलग-अलग पार्टियों से जुड़े ये दोनों राजनीतिक घराने अपने-अपने समर्थक प्रत्याशियों के लिए क्या कुछ कर सकेंगे यह देखने की बात होगी। अब चुनाव परिणाम चाहे जो हो, दोनों ब्राह्मïण नेताओं के परिश्रम का मूल्यांकन तो होगा ही। मुमकिन है इसी बहाने यह भी तय हो कि इसके बाद अमनमणि का योगी की शरण में क्या स्थान होगा तथा बसपा
नेतृत्व की नजर में हरिशंकर तिवारी परिवार की क्या अहमियत रहेगी। बहरहाल इतना तय है कि गोरखुपर उपचुनाव में
पूर्वांचल की राजनीति में दखल
रखने वाले दो ब्राह्मïण परिवारों की भी परीक्षा तय है।

लोकसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है असर

गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और फूलपुर में उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य की प्रतिष्ठïा दांव पर है। कम वोटिंग प्रतिशत के बावजूद भाजपा नेताओं के चेहरे में चिंता की लकीरें खींच गई हैं। हालांकि यह मतगणना के बाद पता चलेगा कि परिणाम किसके पक्ष में आएगा। बावजूद इसके इन चुनाव के परिणाम आगामी लोकसभा चुनाव पर असर डाल सकते हैं। साथ ही यह चुनाव सीएम के एक साल के कामकाज पर जनता की मुहर की तरह भी होगा।

कभी दो जिस्म एक जान माने जाने वाले अमरमणि और हरिशंकर तिवारी की राह अब अलग-अलग है।

Pin It