बीजेपी नेताओं ने धड़ाधड़ डिलीट कर दिए अपने ट्वीट, ये नरेश अग्रवाल जो न कराएं

ट्विटर के टॉप पर ट्रेंड कर रहे हैं नरेश अग्रवाल। ट्रेंड समझते हैं न आप, मतलब ये कि उनके बारे में सबसे अधिक लोग लिख रहे हैं। उनके कारनामे बताए जा रहे हैं, उनके बयान और तुकबंदी दोहराए जा रहे हैं। नरेश अग्रवाल को पाक एजेन्ट तक कह चुके बीजेपी नेताओं और संघ समर्थकों के पुराने ट्वीट खंगालकर चिपकाए जा रहे हैं। नरेश अग्रवाल और बीजेपी के नए रिश्तों को लेकर जोक्स, चुटकुले, व्यंग्य और वन लाइनर गढ़े जा रहे हैं। तंज कसने वालों की क्रिएटिविटी आसमान पर है यानि कि सोशल मीडिया पर नरेश अग्रवाल कल दोपहर बाद से लगातार सबसे अधिक चर्चा में हैं। फेसबुक रंगा हुआ है। ट्विटर के टॉप पर भी उनका नाम टंगा हुआ है। नरेश अग्रवाल हैशटैग कल दोपहर बाद से ट्विटर पर हिट हैं।
हर फैसले को सिर-माथे लेकर बचाव करने वाले भक्तों को बचाव नहीं सूझ रहा है। कहें तो कहें क्या? बीजेपी के तेज तर्रार प्रवक्ता संबिद पात्रा अपने पुराने ट्वीट को डिलीट करने की वजह से घेरे जा रहे हैं। कुलभूषण जाधव के बारे में नरेश अग्रवाल के बयान के बाद 27 दिसंबर को पात्रा ने लिखा। हमें पाकिस्तान क्यों चाहिए, जब दुश्मन घर में बसे हैं। किस-किस से लड़ें। कल बीजेपी में नरेश अग्रवाल के शामिल होते ही पात्रा ने अपना पुराना ट्वीट डिलीट कर दिया लेकिन यहां तो नए-पुराने हर तरह के ट्वीट को अपने लॉकर में सुरक्षित रखने वालों की कमी नहीं। विरोधी खेमा ऐसे ट्वीट का स्क्रीन शॉट अपने स्टॉक में रखे रहता है कि पता नहीं कब जरूरत पड़ जाए तो संबिद पात्रा का ये ट्वीट डिलीट होने के बाद भी निकल आया।
साथ में नरेश अग्रवाल के खिलाफ उनके चार ट्वीट और खोज निकाले गए। चिढ़ाने के लिए लोग पूछ रहे हैं, इसे भी डिलीट करने की जरुरत है आपको। ऐसे ही बीजीपी नेता महेश गिरी, जीवीएल और संघ प्रचारक राकेश सिन्हा के ट्वीट के स्क्रीन शॉट बानगी के तौर पर घूम रहे हैं। राकेश सिन्हा ने तो नरेश अग्रवाल को संसद से बेदखल करके पाक से उनके रिश्तों की जांच का जिम्मा एनआईए और रॉ को सौंपने तक की मांग कर दी थी। संसद में नरेश अग्रवाल के बयान के बाद ऐसे ही कई संघ समर्थकों और बीजेपी नेताओं ने जमकर उनकी लानत-मलामत की थी। अब नरेश अग्रवाल जब स्वागत का गुलदस्ता लेकर पार्टी के तोरण द्वार से भीतर दाखिल हो चुके हैं तो बीजेपी के कुछ नेताओं ने अपने ट्वीट डिलीट कर दिए हैं।
बीजेपी में शामिल हुए नरेश अग्रवाल इससे पहले सोशल मीडिया पर इतनी चर्चा में कभी नहीं रहे, कभी रहे भी तो वो निशाने पर रहे। इस बार उनके बहाने बीजेपी निशाने पर है। उनके पुराने बयानों की वजह से तो बीजेपी की किरकिरी हो ही रही है। कल का उनका बयान भी बीजेपी के लिए सिरदर्द बना हुआ है। बीजेपी में दाखिल होते ही नरेश अग्रवाल ने कह दिया था कि राज्यसभा के लिए उनका टिकट काटकर फिल्मों में नाचने वाली को दे दिया गया। नाम लिए बगैर अग्रवाल ने निशाना जया बच्चन पर साधा था। मंच पर बैठे बीजेपी नेताओं को लग गया था कि अग्रवाल का ये बयान गले ही हड्डी बनेगा तो संबिद पात्रा ने उनके बयान से पल्ला झाड़ते हुआ कह दिया था कि चाहे चलचित्र में हो चाहे जीवन के किसी भी क्षेत्र में हो, हम सबका सम्मान करते हैं। लेकिन एक बार जो बात जुबान से निकल गई, सो निकल गई। पूरे दिन नरेश अग्रवाल के उस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर बीजेपी की खिंचाई होती रही।
बीजेपी वीजा और विदेश मामलों के अलावा किसी भी मुद्दे पर बयान देने से हमेशा बचने वाली विदेश मंत्री सुषमा स्वराज तक ने नरेश अग्रवाल के इस बयान की निंदा की। गलत ठहराया। हालांकि सुषमा ने बीजेपी ने नरेश अग्रवाल की इंट्री का स्वागत किया है तो सवाल लगातार सुषमा स्वराज से भी पूछे जा रहे हैं कि भगवान विष्णु, राम, सीता और हनुमान का मजाक उड़ाने वाले नरेश अग्रवाल को पार्टी में शामिल करने की ऐसी क्या मजबूरी हो गई। व्हिस्की में विष्णु बसे, रम में बसे हैं राम, जिन में माता जानकी, ठर्रे में हनुमान, बोलो सियाराम चन्द्र की जय कहने वाले नरेश अग्रवाल को राम भक्त पार्टी ने कैसे कबूल कर लिया। अब इसका जवाब भला कैसे दे सकती हैं सुषमा। उन्होंने जितनी प्रतिक्रिया दी, वही कम नहीं है। फिर भी लोग हैं कि उनका पीछा नहीं छोड़ रहे। नरेश अग्रवाल के पार्टी में शामिल होने के बाद फोटोशॉप के जरिए तरह-तरह की तस्वीरें बनाकर ट्विटर पर पोस्ट की जा रही है।
किसी तस्वीर में विपक्ष के सभी नेता एक साथ हाथ उठाकर बीजेपी में शामिल होते दिख रहे हैं तो किसी में हाफिज सईद तक रम, राम, हनुमान, जिन, सीता और विष्णु के बारे में उनके बयान को लेकर सैकड़ों किस्म के चुटकुले बनाए जा रहे हैं। लखनऊ के एक पत्रकार अंबरीश कुमार ने लिखा कि मैं फेसबुक पर राम लिख रहा हूं तो रम लिखा जा रहा है। किसी ने लिखा कि अब अयोध्या में बनेगा भव्य रम मंदिर खोजी रिपोर्टर के तौर पर मशहूर रोहिणी सिंह ने बार की तस्वीर लगाकर ट्विटर पर लिखा, नरेश अग्रवाल का मंदिर, नरेश अग्रवाल के दलबदलू चरित्र पर तंज कसते हुए चंचल ने उन्हें इब्ने बतूता कहा।
1980 में पहली बार कांग्रेस से विधायक बने नरेश अग्रवाल हर पार्टी को आजमा चुके हैं। कांग्रेस, सपा से लेकर बसपा तक। बीच में अपनी पार्टी बनाकर भी देख चुके हैं। यूपी में वामपंथ का कोई वजूद है नहीं। एक बीजेपी ही बची थी तो इस बार उसे आजमाने आ गए हैं। भरी प्रेस कान्फ्रेंस में उन्होंने दो टूक कह दिया कि उनका टिकट काटकर फिल्मों ने डांस करने वाली को दे दिया गया इसलिए वे बीजेपी में आए हैं। बाद में मोदी के नेतृत्व में देशव्यापी पार्टी के लिए देश सेवा करने की जो ख्वाहिश जताई वह तो सिर्फ कहने की बात है, जो नरेश अग्रवाल पीएम मोदी के लिए न जाने क्या-क्या बोलते रहे हैं। वही अब कह रहे हैं कि मोदी के नेतृत्व में देश सेवा करना चाहते हैं। देश सेवा का ये भाव उनके भीतर तभी जागृत हुआ, जब राज्यसभा के लिए उनका टिकट गया। घूम-घूमकर हर घाट का पानी पीना तो नरेश अग्रवाल की फितरत रही है लेकिन सवाल तो बीजेपी से है इंतजार कीजिए जवाब का।
(लेखक ब्रॉडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी हैं)

Pin It