राज्यसभा चुनाव में बसपा के लिए खड़ी हुईं मुश्किलें, क्रास वोटिंग की आशंका

भाजपा के नौवें प्रत्याशी है बड़े व्यापारी, खरीद-फरोख्त की जताई जा रही आशंका
पहले भी भाजपा कर चुकी है खेल, कपिल सिब्बल के सामने उतारा था प्रीति महापात्रा को

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राज्यसभा चुनाव में अपने कैंडिडेट की जीत को लेकर आश्वस्त दिख रही बसपा की राह बीजेपी ने मुश्किल कर दी है। बसपा ने पूर्व विधायक भीमराव अंबेडकर को अपना राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया था। सपा और कांग्रेस ने भी बसपा कैंडिडेट को समर्थन का ऐलान किया है लेकिन भाजपा ने तीन अन्य प्रत्याशियों को मैदान में उतारकर बसपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सूत्रों के अनुसार सपा और कांग्रेस के कुछ विधायक क्रास वोटिंग कर सकते हैं इस बात की भी आशंका जतायी जा रही है।
सबसे बड़ी समस्या निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन पत्र लेने वाले व्यापारी अनिल अग्रवाल से बसपा प्रत्याशी को मुश्किल हो सकती है। नामांकन के आखिरी दिन नामांकन करने आए अनिल अग्रवाल का बीजेपी ने समर्थन करने की घोषणा की। अनिल अग्रवाल गाजियाबाद के रहने वाले हैं और वह बड़े व्यापारी हैं। भाजपा ने प्रीति महापात्रा को समर्थन देकर साल 2016 में कपिल सिब्बल को राज्यसभा पहुंचने की राह मुश्किल कर दी थी। माना जा रहा है इस बार राज्यसभा चुनाव में भी खरीद-फरोख्त तेजी से होगी। बीजेपी की ओर से वित्तमंत्री अरुण जेटली सहित बीजेपी के बाकी सभी उम्मीदवार ने नामांकन कर दिया है। 16 राज्यों की 58 राज्यसभा सीटों के लिए 23 मार्च को वोटिंग होगी। इसी दिन वोटों की गिनती होगी जबकि 12 मार्च को नॉमिनेशन की आखिरी तारीख थी। कयास लगाए जा रहे थे कि बीजेपी अपना 9वां उम्मीदवार नहीं उतारेगी लेकिन नामांकन प्रकिया खत्म होने से कुछ मिनट पहले बीजेपी ने तीन अन्य प्रत्याशियों को मैदान में उतार दिया। यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए वोटिंग होगी। इन 10 सीटों में से बीजेपी के खाते में 8 सीटें हैं। हालांकि बीजेपी ने यूपी से अरुण जेटली (वित्त मंत्री), डॉ. अशोक बाजपेयी, विजयपाल सिंह तोमर, सकलदीप राजभर, कांता कर्दम, डॉ. अनिल जैन, जीवीएल नरसिम्हा राव, हरनाथ सिंह यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है।

जानें राज्यसभा का गणित

यूपी में 403 विधानसभा सीटें हैं। राज्यसभा के चुनाव 10 सीटों के लिए होना है। यूपी राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए एक सदस्य को औसतन 38 विधायकों का समर्थन चाहिए। भाजपा के पास आठ उम्मीदवारों को जिताने के बाद भी 28 विधायक बच रहे हैं ऐसे में उसने तीन अन्य पदों पर नामांकन कर विरोधी दलों की बेचैनी को बढ़ा दिया है।

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