भारत-फ्रांस रिश्तों के कूटनीतिक निहितार्थ

अहम सवाल यह है कि इन समझौतों के कूटनीतिक नीहितार्थ क्या हैं? क्या यह हिंद महासागर में चीनी ड्रैगन के मुकाबले की तैयारी है? क्या ये समझौते भारत के आर्थिक, ऊर्जा और सुरक्षा संबंधी हितों को साध सकेंगे? क्या फ्रांस यूरोप का नेतृत्व करने की तैयारी कर रहा है?

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों चार दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे हैं। दोनों देशों के बीच शिक्षा, सौर उर्जा और रक्षा समेत 14 समझौते किए गए हैं। दोनों देशों के बीच सैन्य दृष्टिï से एक और अहम करार हुआ है। इस समझौते के मुताबिक अब भारत और फ्रांस एक दूसरे के नौ सैनिक अड्डों का इस्तेमाल कर सकेंगे। इस समझौते के साथ फ्रांस के राष्टï्रपति मैक्रों का यह कथन भी सार्थक हो गया जिसमें उन्होंने कहा था कि फ्रांस चाहता है कि यूरोप में भारत उसका सबसे अच्छा साझेदार बने। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी फ्रांस की इस दोस्ती को परवान चढ़ाने में लगे हैं। यही वजह है कि मोदी ने न केवल प्रोटोकोल तोडक़र फ्रांस के राष्टï्रपति का स्वागत किया बल्कि अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में उनका भव्य स्वागत करने की तैयारी भी की है। अहम सवाल यह है कि इन समझौतों के कूटनीतिक नीहितार्थ क्या हैं? क्या यह हिंद महासागर में चीनी ड्रैगन के मुकाबले की तैयारी है? क्या ये समझौते भारत के आर्थिक, ऊर्जा और सुरक्षा संबंधी हितों को साध सकेंगे? क्या फ्रांस यूरोप का नेतृत्व करने की तैयारी कर रहा है?
भारत और फ्रांस के बीच हमेशा से दोस्ताना संबंध रहे हैं। 2016 में फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद जब भारत दौरे पर आए थे तो महाराष्ट्र में छह परमाणु रिएक्टर लगाने का ऐलान किया गया था। इसके अलावा लड़ाकू विमान राफेल खरीदने की डील भी हुई थी। हालांकि इस डील को लेकर विपक्ष मोदी सरकार को निशाने पर लिए हुए है। जहां तक दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों का सवाल है तो फ्रांस भारत में नौवां सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है। अप्रैल 2000 से अक्टूबर 2017 के बीच फ्रांस ने भारत में करीब छह बिलियन अमरीकी डॉलर का निवेश किया है। दोनों देशों के बीच रक्षा, अंतरिक्ष, सुरक्षा और ऊर्जा से जुड़े मुद्दों पर घनिष्ठïता बढ़ रही है। फ्रांस भी अब यूरोपीयन यूनियन का नेतृत्व करने को तैयार हो रहा है। फ्रांस हिंद महासागर की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। हिंद महासागर में स्थित रीयूनियन आइलैंड फ्रांस के लिए अहम क्षेत्र है। साथ ही पैसिफिक ओशन में भी चीन की बढ़ती गतिविधियां फ्रांस की परेशानी की वजह है। यही वजह है कि फ्रांस भारत के साथ खड़ा हो चुका है। अंडमान और निकोबार आईलैंड से लेकर म्यांमार के बॉर्डर तक चीन ने अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाई हैं। इसे देखते हुए भारत ने भी हिंद महासागर और सीमाओं की सुरक्षा बढ़ा दी है। लिहाजा भारत-फ्रांस के बीच एक-दूसरे के नौसैनिक अड्डों के इस्तेमाल पर सहमति चीन के प्रभाव को कम करने में निश्चित सफल होगी। कुल मिलाकर दोनों देशों के रिश्ते भविष्य में फायदेमंद साबित होंगे।

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