सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर भाजपा अशोक बाजपेयी को मिला रिटर्न गिफ्ट

ब्राह्मïण समीकरण साधने की कोशिश, नरेश अग्रवाल के धुर विरोधी हंै बाजपेयी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। भाजपा ने राज्यसभा के लिये उत्तर प्रदेश कोटे से सात उम्मीदवारों की घोषणा कर 2019 के लोकसभा चुनाव को साधने की पहल की है। इसमें सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर जोर दिया गया है। जातीय और क्षेत्रीय समीकरण के साथ-साथ विरोधियों को दांव देने की भी रणनीति अपनाई गई है। भाजपा ने 40 वर्ष तक समाजवादी रहे पूर्व मंत्री अशोक बाजपेयी को उम्मीदवार बनाया है।
पिछले वर्ष अशोक बाजपेयी विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हुए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य समेत मंत्रिमंडल के पांच सदस्य विधान मंडल के किसी सदन के सदस्य नहीं थे। इस इस्तीफे से उनकी राह आसान हुई थी। अशोक बाजपेयी के त्याग का भाजपा ने रिटर्न गिफ्ट दिया है। इसके साथ ही एक तीर से कई निशाने साधे हैं। बाजपेयी के जरिये ब्राह्मïण समीकरण साधा गया है तो सपा में प्रभावी नरेश अग्रवाल के धुर विरोधी अशोक को तरजीह भी दी गई है। हरदोई निवासी बाजपेयी की कान्यकुब्ज ब्राह्मïणों में अच्छी पकड़ है। भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव में पिछड़ों को लुभाने पर जोर दिया और नतीजा बेहतर रहा। पर, 2014 और 2017 के चुनावों में यादव बिरादरी पर भाजपा की मजबूत पकड़ नहीं बन सकी। उत्तर प्रदेश में मुख्य प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी को दांव देने के लिये पूर्व एमएलसी हरनाथ सिंह यादव को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया है। कल्याण सिंह के समय भाजपा के प्रदेश महामंत्री रहे हरनाथ सिंह कुछ समय तक समाजवादी पार्टी में रह चुके हैं। 2019 के चुनाव के पहले भाजपा ने युवा मोर्चे की कमान भी यादव बिरादरी के सुभाष यदुवंश को दी है। माना जा रहा है कि आगे भी कुछ और यादवों को महत्व मिलेगा।

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