परवान नहीं चढ़ पा रही है केजीएमयू में किडनी ट्रांसप्लांट की योजना

एक नेफ्रोलॉजिस्ट के भरोसे चल रहा है मरीजों का इलाज
डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा विभाग, करोड़ों की बिल्ंिडग तैयार

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। केजीएमयू में किडनी ट्रांसप्लांट की योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। हालांकि किडनी ट्रांस प्लांट के लिए करोड़ों की बिल्ंिडग तैयार हो चुकी है। चिकित्सकों और अन्य कर्मियों की कमी के कारण योजना को पंख नहीं लग पा रहे हैं। यही नहीं किडनी रोग से पीडि़त मरीजों को भी इलाज मिलने में मुश्किल आ रही है क्योंकि पूरा विभाग केवल एक नेफ्रोलॉजिस्ट के भरोसे चल रहा है।
केजीएमयू में 2014 में किडनी ट्रांसप्लांट शुरू किया गया था। एसजीपीजीआई के बाद यह दूसरा मेडिकल कॉलेज था जहां किडनी ट्रांसप्लांट शुरू हुआ था। नेफ्रोलॉजिस्ट की कमी के कारण यहां किडनी ट्रांसप्लांट को ब्रेक लग गए। अब मेडिकल कॉलेज में एक ही नेफ्रोलॉजिस्ट संत कुमार पांडेय हैं। अस्पताल प्रशासन जल्द किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा को शुरू करना चाहता है लेकिन पर्याप्त संख्या में नेफ्रोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है। हालांकि केजीएमयू में फिर से किडनी ट्रांसप्लांट शुरू करने के लिए बिल्ंिडग बनकर तैयार हो चुकी है।
शताब्दी के थर्ड फ्लोर पर आईसीयू का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो गया है। 1.20 करोड़ रुपये खर्च कर आईसीयू और ओटी को अपडेट किया गया है। एक से डेढ़ महीने में निर्माण विभाग वाले इसे केजीएमयू प्रशासन को हैंडओवर कर देंगे। गौरतलब है कि लोहिया संस्थान में अब तक बीस किडनी ट्रांसप्लांट हो चुके हैं। दिसम्बर 2016 में यहां किडनी ट्रांसप्लांट शुरू किया गया था। संस्थान के नेफे्रोलॉजिस्ट डॉक्टर अभिलाश चन्द्रा ने बताया कि अभी तक 20 किडनी ट्रांसप्लांट हो चुके हैं। आगे और तेजी से किडनी ट्रांसप्लांट होने की उम्मीद है जबकि केजीएमयू में दो साल पहले किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होने के बावजूद ट्रांसप्लांट का काम ठप पड़ा है।

बिल्डिंग तैयार हो चुकी है लेकिन मैन पॉवर की कमी है। मैन पॉवर की कमी खत्म करने के लिए शासन से बातचीत चल रही है। जैसे ही विशेषज्ञ और अन्य स्वास्थ्य कर्मी मिल जाएंगे किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू कर दी जाएगी।
डॉ. एसएन शंखवार, सीएमएस, केजीएमयू

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