राज्यसभा चुनाव: नौवीं सीट पर भी कब्जा जमाने की फिराक में भाजपा, समीकरण साधने में जुटी

उम्मीदवार को जिताने में निर्दलीय विधायक राजा भैया कर सकते हैं मदद
जीत का कोरम पूरा करने के लिए सपा और कांग्रेस के विधायकों पर भी नजर
विपक्ष का गणित बिगाडऩे की पूरी तैयारी कर रही है भाजपा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राज्यसभा चुनाव में भाजपा बड़ा उलटफेर करने की तैयारी कर रही है। उसकी नजर नौवीं सीट पर लगी है। समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस को तगड़ा झटका देते हुए भाजपा राज्यसभा के लिए अपना नौवां कैंडीडेट उतारने जा रही है। नौवें उम्मीदवार को जीताने के लिए भाजपा के दिग्गजों ने अभी से समीकरण साधने शुरू कर दिए है। माना जा रहा है कि इस सीट पर कब्जा करने के लिए भाजपा निर्दलीय विधायक राजा भैया की मदद ले सकती है। ऐसा करके भाजपा राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस, बसपा और सपा के गठित को बिगाड़ देगी। राजनीतिक गलियारे में चल रही इन चर्चाओं से बसपा और सपा में हलचल तेज हो गई है।
राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने अपने सारे पत्ते अभी नहीं खोले हैं। यही नहीं पार्टी ने अभी तक अपने सारे प्रत्याशियों के नाम तक फाइनल नहीं किए हैं। फिलहाल वित्त मंत्री अरुण जेटली के रूप में भाजपा ने राज्यसभा के लिए एक प्रत्याशी की ही घोषणा की है। भाजपा के दिग्गजों की नजर विपक्ष की रणनीति पर है। उसी आधार पर वह उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की तैयारी में है। भाजपा शेष प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कभी भी कर सकती है। यही नहीं वह आठ सीटों के अलावा नौवां उम्मीदवार भी उतारने के मूड में है। ऐसा कर वह विपक्ष को जोर का झटका धीरे से देना चाहती है। इसके लिए भाजपा नेताओं ने समीकरण साधने की कवायद तेज कर दी है। भाजपा इस सीट पर अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए निर्दलीय विधायक राजा भैया की मदद लेने की तैयारी में हैं। गौरतलब है कि भाजपा और उसके सहयोगी दलों के पास विधानसभा में 324 विधायक हैं। राज्यसभा सदस्य के चुनाव के लिए एक उम्मीदवार को 37 विधायकों के वोट की जरूरत पड़ेगी।
10 सीटों पर हो रहे चुनाव में भाजपा के 8 उम्मीदवारों की जीत पक्की है। नौवें उम्मीदवार के लिए भाजपा के पास 28 विधायकों के वोट हैं। उम्मीदवार को जिताने के लिए उसे 9 वोटों की जरूरत पड़ेगी। निर्दलीय विधायक राजा भैया ने राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा का समर्थन किया था। राजा भैया के अलावा विधायक विनोद सरोज, अमनमणि त्रिपाठी और विजय मिश्रा ने भी राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के समर्थन में मतदान किया था। जाहिर है ऐसे वक्त में भाजपा राज्यसभा चुनाव में भी इन चारों निर्दलीय विधायकों के वोट हासिल करने की हर संभव कोशिश कर रही है। राज्यसभा की नौवीं सीट पर जीत के लिए बाकी बचे 5 वोट के लिए भाजपा के वरिष्ठï नेता सपा और कांग्रेस के विधायकों पर नजरें गड़ाए बैठे हैं।

इन्हें मिल सकता है इनाम

उत्तर प्रदेश की 9 सीटों में 5 पर केंद्रीय मंत्रिमंडल और राष्ट्रीय पदाधिकारियों में से प्रत्याशी चुने जाएंगे। बाकी बचे 4 उम्मीदवारों के लिए समाजवादी पार्टी से भारतीय जनता पार्टी में आए अशोक बाजपेई, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेई और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए विधान परिषद में सीट खाली कर भाजपा में आए पूर्व एमएलसी यशवंत सिंह के नामों पर चर्चा चल रही है। वहीं दलित चेहरे के रुप में प्रदेश महामंत्री विद्यासागर सोनकर और विजय सोनकर शास्त्री में से किसी एक को राज्यसभा जाने का मौका मिल सकता है। इनके अलावा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अरुण सिंह और राज्यसभा सदस्य विनय कटियार का नाम भी चर्चा में है। पिछड़ा और हिंदूवादी चेहरा होने की वजह से विनय कटिहार को फिर से राज्यसभा जाने का मौका दिया जा सकता है।

विपक्ष से सीट छीनने की तैयारी

कुल मिलाकर भाजपा यूपी में राज्यसभा की नौवीं सीट को हथियाने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोडऩा चाहती। भाजपा नौवां कैंडीडेट उतारकर बसपा और सपा के हाथ से यह बाजी भी छीनने की कोशिश में जुटी है। वहीं इस मुद्दे पर भाजपा के प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी सभी संभावनाओं पर विचार कर रही है।

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