एसएससी पेपर लीक मामला, कोर्ट व सरकार

अहम सवाल यह है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं के पीछे की क्या वजहें हैं? क्या पेपर लीक के लिए परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था जिम्मेदार नहीं है? क्या प्रतियोगी परीक्षाएं भ्रष्टïाचार की भेंट चढ़ चुकी हंै? क्या इन परीक्षाओं में पेपर लीक न हो इसके लिए फुल प्रूफ सिस्टम नहीं बनाया जा सकता है?

अभ्यथियों के प्रदर्शन के बाद आखिरकार केंद्र सरकार ने एसएससी (स्टॉफ सेलेक्शन कमीशन) की प्रतियोगी परीक्षा के पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई से कराने पर अपनी सहमति जता दी। वहीं इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सुनवाई की तारीख तय कर दी है। अहम सवाल यह है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं के पीछे की क्या वजहें हैं? क्या पेपर लीक के लिए परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था जिम्मेदार नहीं है? क्या प्रतियोगी परीक्षाएं भ्रष्टïाचार की भेंट चढ़ चुकी हैं? क्या इन परीक्षाओं में पेपर लीक न हो इसके लिए फुल प्रूफ सिस्टम नहीं बनाया जा सकता है? क्या सरकार को इसके लिए जरूरी कदम उठाने की जरूरत है?
दरअसल, एसएससी की ओर से सीजीएल 2017 के टियर-2 की प्रतियोगी परीक्षा का आयोजन करवाया गया था। इस दौरान छात्रों ने आरोप लगाया कि परीक्षा से पहले पेपर और आंसर दोनों लीक हो गए। इसके बाद छात्र सडक़ पर उतर आए और प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। यही नहीं प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली में धरना दिया और एसएससी की परीक्षा में बड़े स्तर पर हो रही धांधली की जांच सीबीआई से कराने की मांग की। प्रदर्शनकारियों की मांग को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने स्वीकार कर लिया है और मामले की जांच सीबीआई से कराने की बात कही है। ऐसा नहीं है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक होने का यह कोई पहला मामला है। इसके पहले भी कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक होने और दूसरे अभ्यथी द्वारा पेपर दिए जाने का मामला प्रकाश में आते रहे हैं। आईटी और मेडिकल की परीक्षाओं के दौरान ऐसे कई मामले उजागर हो चुके हैं। बावजूद आज तक इन प्रतियोगी परीक्षाओं को फुल प्रूफ बनाने की कोशिश नहीं की गई। हकीकत यह है कि प्रतियोगी परीक्षाओं को आयोजित करने वाली संस्थाओं में भ्रष्टïाचार का दीमक लग चुका है। यह संभव ही नहीं है कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था के किसी अधिकारी या कर्मचारी के मिलीभगत के बिना पेपर लीक हो सके। प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं निश्चित रूप से संस्थाओं की साख को बट्टा लगा रही हैं। यदि इस पर अंकुश नहीं लगाया गया तो छात्रों का इन परीक्षाओं पर से विश्वास हट जाएगा। सरकार को चाहिए कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं को आयोजित करने वाली संस्थाओं और उनकी कार्यप्रणाली की समीक्षा करे और उन उपायों को सुनिश्चित करे, जिसके आधार पर निष्पक्ष तरीके से परीक्षा कराई जा सके। यदि ऐसा नहीं हुआ तो प्रतियोगी परीक्षा माखौल बनकर रह जाएंगी और सरकार कोर्ट को जवाब देती रहेगी।

Pin It