अपने ही महकमे को दागदार कर रहे कुछ वर्दीधारी, चंद पैसों के लिए बेच रहे ईमान

कहीं जांच तो कहीं वर्दी का रौब दिखाकर वसूल रहे पैसे
एंटी करप्शन के हत्थे चढ़ चुके हैं कई पुलिस कर्मी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। तमाम कवायदों के बावजूद प्रदेश की पुलिस व्यवस्था भ्रष्टïाचार से मुक्त नहीं हो पा रही है। हालत यह है कि महकमे के लोग ही चंद पैसों लिए अपना ईमान बेच रहे हैं। ये लोग कहीं जांच तो कहीं वर्दी का खौफ दिखाकर लोगों से पैसे वसूल रहे हैं। खाकी पर दाग लगाने वाले ऐसे कुछ वर्दीधारियों को पिछले दिनों एंटी करप्शन टीम ने पकड़ा और उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया लेकिन चंद लोगों के पकडऩे से पुलिस महकमे में भ्रष्टïाचार कम होगा, इसकी गुंजाइश काफी कम दिख रही है।
एक ओर प्रदेश सरकार सूबे को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए जुटी है, वहीं दूसरी ओर चंद पैसों के लालच में पुलिस महकमे को कुछ लोग शर्मसार कर रहे हैं। ऐसे पुलिस कर्मियों की मौजूदगी से पूरा महकमा बदनाम हो रहा है। प्रदेश में ऐसे कई मामले प्रकाश में आ चुके है जहां कुछ वर्दी वालों ने अपने ईमान को बेचकर अपराधियों का साथ दिया। ये आरोपी पर से मामला हटाने या धाराओं में खेल करने के एवज में मोटा सौदा कर रहे हैं। हालांकि कुछ इस खतरनाक खेल में खुद फंस गए और सलाखों के पीछे पहुंचा दिए गए। कुछ ऐसे मामले भी प्रकाश में आये हैं जहां खाकी के मद में चूर कुछ वर्दी वालों ने पीडि़त को ही झूठे मामले में फंसाने का डर दिखाकर उससे पैसे वसूल लिये। इसकी पुष्टिï पिछले दिनों एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई से भी होती है। हाल ही में पीजीआई थाने में तैनात दारोगा संकटा प्रसाद ने एक प्रॉपर्टी डीलर से जांच के नाम पर पचास हजार की मांग की। दरअसल, पीजीआई थाना क्षेत्र के वृन्दावन कालोनी निवासी सुरेश चौरसिया प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते हैं। सुरेश के खिलाफ एक महिला ने मामला दर्ज कराया था। महिला ने आरोप लगाया कि प्रॉपटी डीलर ने पैसे लेने के बाद भी फ्लैट नहीं दिया। यही नहीं जब उससे पैसे वापस मांगे गए तो उसे धमकाया गया। इस पर महिला ने मामला पीजीआई थाने में दर्ज करवा दिया था। मामले की जांच दारोगा संकटा प्रसाद को दी गयी थी।
जांच के नाम पर दारोगा ने सुरेश से पचास हजार की मंाग की थी। जिस पर सुरेश ने उन्हें 20 हजार दे दिये थे। इसके बाद दारोगा ने डीलर से और पैसों की मांग की। डीलर ने इसकी शिकायत एंटी करप्शन विभाग से कर दी। इस पर टीम ने जाल फैलाकर दारोगा को दस हजार की घूस के साथ रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। ऐसी एक और घटना बनारस जिले में प्रकाश में आयी। शिवपुर थाना क्षेत्र निवासी अभिषेक कुमार के खिलाफ उनकी पत्नी पूजा ने दहेज प्रताडऩा का मामला दर्ज कराया था। इस मामले में अभिषेक की मां और बहन को भी नामजद किया गया था। महिला थाने में दर्ज इस शिकायत की जांच दारोगा गीता यादव को सौंपी गई। आरोप है कि जब अभिषेक ने दरोगा से बहन का नाम रिपोर्ट से निकालने की बात की तो अभिषेक से एक लाख की मांग की गई। दारोगा ने अभिषेक से 20 हजार ले लिया था और बाकी की रकम के लिए दबाव बना रही थी। इसकी सूचना एंटी करप्शन को दे दी गयी। टीम ने महिला दारोगा को रंगे हाथों पकड़ लिया।
ऐसी घटना मुरादाबाद में घटित हुई। पाक बाड़ा थाना क्षेत्र से एक दिव्यांग लडक़ी लापता हो गयी थी। परिजनों ने इसकी सूचना थाने में दी। इसकी जांच गोथ चौकी इन्चार्ज ललित भाटी को सौंपी गई। दरोगा ललित भाटी ने परिवार वालों पर ही लडक़ी की हत्या का आरोप लगा दिया और मामले को रफा-दफा करने के लिए एक लाख की डिमांड की। मांग पूरी न करने पर परिवार को जेल भेजने की धमकी दी। दरोगा की इस हरकत का वीडियो वायरल हो गया और मुरादाबाद पुलिस ने दरोगा को लाइन हाजिर कर पूरे मामले की जांच का आदेश दिया है। ये घटनाएं यह बताने के लिए काफी है कि पुलिस महकमे में भ्रष्टïाचार का बोलबाला है और इसको रोके बिना पुलिस महकमे को जनता फ्रेंडली नहीं बनाया जा सकता है।

कई घटनाओं का नहीं चलता पता

ये कुछ मामले ऐसे हैं, जिनका पता लग सका है। लेकिन अधिकांश मामले सामने ही नहीं आ पाते हैं। पुलिस मिलीभगत कर आरोपी को बचाने का खेल खेलती है। कई बार सबूतों से छेड़छाड़ तक की जाती। इससे केस कमजोर हो जाता है और आरोपी आराम से कानून के शिकंजे से बच जाता है। यही नहीं कई बार तो एफआईआर लिखने तक के लिए पैसों की मांग की जाती है।

ऐसे लोग जो भ्रष्टाचार में लिप्त हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के आदेश हैं। कोई भी पुलिसकर्मी यदि लोगों से पैसा लेता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-प्रवीण कुमार, डीआईजी कानून व्यवस्था

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