वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट नीति के निहितार्थ

क्या जिले के विशेष उत्पादों को प्रोत्साहित और इनका विस्तार करने लिए उद्यमियों को विभिन्न सरकारी सहायता योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा? क्या इन उद्यमियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने कोई कारगर कार्ययोजना तैयार की है?

प्रदेश सरकार वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट को जमीन पर उतारने की कवायद में जुट गई है। इसके तहत हर जिले के विशेष उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाई जाएगी। प्रदेश सरकार की इस पहल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रशंसा की है और केंद्र से भरपूर सहयोग का आश्वासन भी दिया है। इन्वेस्टर्स समिट में भी यह योजना छाई रही। योगी सरकार को उम्मीद है कि इस महत्वाकांक्षी योजना से न केवल जिलों के विशेष उत्पादों व इससे जुड़े उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा बल्कि रोजगार से नए साधन भी सृजित होंगे। बावजूद इसके कई सवाल भी हैं। क्या जिले के विशेष उत्पादों को प्रोत्साहित और इनका विस्तार करने लिए उद्यमियों को विभिन्न सरकारी सहायता योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा? क्या इन उद्यमियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने कोई कारगर कार्ययोजना तैयार की है? प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत मिलने वाले ऋण में क्या पारदर्शिता बरती जाएगी? उद्योगों के लिए जरूरी सुविधाएं और उत्पादों के लिए बाजार की उपलब्धता सुनिश्चित किए बिना योजना को कैसे परवान चढ़ाया जा सकेगा?
दरअसल, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के तहत जिलों के उत्पाद को नया कलेवर दिया जाएगा। उत्पादों की पैकेजिंग की जाएगी। साथ ही इनकी गुणवत्ता को वैश्विक स्तर का बनाया जाएगा। इससे इन उत्पादों की मांग विदेशी बाजारों में बढ़ जाएगी। इस योजना को केंद्र सरकार के स्किल इंडिया मिशन व स्टैंड अप इंडिया-स्टार्ट अप इंडिया मिशन से जोड़ा जाएगा ताकि उद्यमियों को इसका लाभ मिल सके। उद्यमियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के जरिए भी धनराशि दिए जाने का प्रावधान है। इस योजना से जिलों मसलन आगरा-कानपुर में बनने वाली चमड़े की वस्तुए, मेरठ का खेल सामान, एटा का घुंघरू, इलाहाबाद के अमरूद और प्रतापगढ़ का आंवला वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकेगा। यही नहीं योजना के तहत सरकार चयनित उत्पाद की उत्पादकता और उसकी गुणवत्ता का भी विश्लेषण करेगी। इसके अलावा संसाधनों की उपलब्धता पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके बाद उत्पादों को वैश्विक बाजार में उतारा जाएगा। इसमें दो राय नहीं है कि प्रदेश सरकार की यह पहल सराहनीय है। इससे न केवल दम तोड़ रहे विशेष उत्पादों के उद्योगों को संजीवनी मिलेगी बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार का सृजन भी होगा। इसका सीधा असर लोगों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा। साथ ही प्रदेश के विकास में भी यह योजना अपनी अहम भूमिका निभाएगी। लेकिन सरकार की यह मंशा तभी फलीभूत होगी जब वह इन उत्पादों की राह में आने वाली तमाम समस्याओं को व्यवहारिक समाधान करेगी। अन्यथा यह योजना भी केवल योजना बनकर रह जाएगी।

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