आखिर कब तक लुटते रहेंगे बैंक

अहम सवाल यह है कि बैंक के सिस्टम में आखिर वे कौन से चोर दरवाजे हैं, जिसके जरिए नीरव, माल्या और कोठारी जैसे लोग हजारों करोड़ों की धोखाधड़ी कर लेते हैं? क्या इस सबकी जड़ बैंकिंग सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टïाचार है? क्या बिना अधिकारियों की मिलीभगत के हजारों करोड़ की हेराफेरी की जा सकती है?

हीरा व्यापारी नीरव मोदी के बाद अब रोटोमैक के मालिक विक्रम कोठारी ने बैंकों को कई सौ करोड़ों की चपत लगा दी है। बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत पर सीबीआई और ईडी ने कोठारी के ठिकानों पर छापेमारी की। कोठारी, उनकी पत्नी और बेटे के पासपोर्ट सीज कर दिए गए हैं ताकि वे देश छोडक़र भाग न सके। फिलहाल बैंक धोखाधड़ी मामले में जांच एजेंसियां पूछताछ कर रही है। इन सबके बीच अहम सवाल यह है कि बैंक के सिस्टम में आखिर वे कौन से चोर दरवाजे हैं, जिसके जरिए नीरव, माल्या और कोठारी जैसे लोग हजारों करोड़ों की धोखाधड़ी कर लेते हैं? क्या इस सबकी जड़ बैंकिंग सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टïाचार है? क्या बिना अधिकारियों की मिलीभगत के हजारों करोड़ की हेराफेरी की जा सकती है? बैंक एक किसान द्वारा लिया गया मामूली ऋण वसूलने में तो पूरी तत्परता दिखाता है लेकिन जब किसी बड़े पूंजीपति से वसूली की बात आती है तो वह बगलें क्यों झांकने लगता है? यह भी समझ के परे है कि तमाम घोटालों और धोखाधड़ी के बावजूद बैंक ने आज तक अपना सिस्टम फुल प्रूफ क्यों नहीं किया? आखिर बैंकों को अपने पैसे वसूलने के लिए जांच एजेंसियों की जरूरत क्यों पडऩे लगी है? क्या बैंकों का पूरा सिस्टम लचर हो चुका है और उसमें बुनियादी सुधार की जरूरत है? बैंक में रखे जनता के पैसों की लूट कब तक जारी रहेगी? क्या बैंक में हो रहे ये घोटाले देश की अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित नहीं होंगे?
दरअसल, यह मामला तब सामने आया जब बैंक ऑफ बड़ौदा कानपुर के रीजनल मैनेजर ने रोटोमैक के मालिक विक्रम कोठारी के खिलाफ सीबीआई में आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई। रोटोमैक कंपनी ने पांच सरकारी बैंकों, इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन ओवरसीज बैंक और यूनियन बैंक से 800 करोड़ रुपए से ज्यादा लोन लिया। इन बैंकों ने कंपनी को लोन देने में ढिलाई बरती और शर्तों से समझौता कर लोन मंजूर किया। बाद में कंपनी ने इन बैंकों को न लोन की रकम लौटाई और न ब्याज दिया। इसके बाद से बैंक अफसरों के हाथ पांव फूलने लगे और उन्होंने कोठारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इस नए घोटाले ने एक बार फिर बैंकों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जाहिर है बैंक भ्रष्टïाचार की चपेट में आ चुके हैं। कोई भी पैसे के बल पर बैंकों के नियमों को धता बताकर लोन ले सकता है और बाद में उसे हड़प भी सकता है। इस प्रवृत्ति पर अंकुश नहीं लगाया गया तो यह पूरे देश की अर्थव्यवस्था को चौपट कर देगा। यदि सरकार इस पर अंकुश लगाना चाहती है तो उसे सबसे पहले ऐसे घोटालेबाजों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी होगी। साथ ही बैंकिंग सिस्टम को भी दुरुस्त करना होगा।

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