प्रदेश में भय और अराजकता का माहौल: अखिलेश यादव

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने राज्य सरकार पर साधा निशाना
कहा, बदमाश हो चुके हैं बेखौफ, सरकार को देना होगा जवाब

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इलाहाबाद में दलित छात्र की हत्या को बेहद दु:खद बताया हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश इस समय अपराधियों के हवाले है, जहां एक ओर अपराधी बेखौफ हत्याएं कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर पुलिस एनकाउंटर की आड़ में निर्दोषों को ठिकाने लगाने में जुटी है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विधि स्नातक के छात्र दिलीप सरोज की कर्नलगंज थाना के कटरा स्थित कालका रेस्टोरेन्ट में दबंगों द्वारा बेरहमी से पिटाई से हुई मौत की घटना इसका प्रमाण है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। अखिलेश यादव ने राज्य सरकार से मांग की कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मृतक छात्र के परिवार को 50 लाख रूपये का मुआवजा दिया जाये।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार के दस महीने के कार्यकाल में पूरे प्रदेश में जंगलराज कायम हो गया है। मेरठ में महिला की हत्या के बाद उसके बेटे की हत्या, बुलंदशहर में दूध वाले को पीट-पीट कर घायल किया जाना, बरेली में तीन हत्याएं, नोएडा में पुलिस द्वारा हत्या, संगम नगरी में भूसा व्यापारी की हत्या जैसी घटनाओं से यह साबित हो रहा है कि बदमाश बेखौफ हो गये हैं। प्रदेश में भय और अराजकता व्याप्त हो गयी है। जनता का कानून व्यवस्था पर भरोसा ही नहीं रह गया है। व्यापारियों के जान-माल की सुरक्षा की कोई व्यवस्था ही नही है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में कौन निवेश करने आयेगा? उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार को इलाहाबाद की घटना पर कार्रवाई करते हुए दोषियों को तत्काल गिरफ्तार कर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। प्रदेश में कानून-व्यवस्था चुस्त-दुरूस्त करने का काम भाजपा सरकार का है। मुख्यमंत्री अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से बच नही सकते। उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार को जनता को जवाब देना पड़ेगा। अखिलेश यादव ने कहा है कि कोई घंटा ऐसा नहीं बीतता जब राज्य में किसी न किसी कोने में आपराधिक घटनाएं न घटती हों। उत्तर प्रदेश पूरी तरह जंगलराज की गिरफ्त में है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के मंत्रीगण कानून का पालन नही कर रहे हैं और अलोकतांत्रिक आचरण करते हुये स्तरहीन भाषा बोलते हैं। प्रदेश सरकार द्वारा विपक्ष पर आक्षेप किया जाना लोकतंत्र पर हमला है। शीर्ष नेतृत्व द्वारा समाजवाद पर हमला संविधान पर हमला है।

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