केजीएमयू के लिए डिब्बे बन्द वेंटिलेटर चलाना टेढ़ी खीर

मैन पॉवर की कमी आ रही है आड़ेे
50 वेंटीलेटर बंद पड़े हैं डिब्बों में

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में सालों से डिब्बों में बंद वेंटिलेटर जल्द ही मरीजों के लिए खोल दिए जाएंगे। केजीएमयू इन 50 वेंटिलेटर चलाने की योजना बना रहा है। शासन के सख्त रुख के बाद वेंटिलेटर को 15 दिन के भीतर चलानें का दावा किया गया है लेकिन इसको चलाना केजीएमयू के लिए आसान नहीं है। इसके संचालन के लिए केजीएमयू के पास स्टाफ ही नहीं है और लम्बे अर्से से रखे वेंटिलेटर अब काम करेंगे भी या नहीं इसकी भी कोई गारन्टी नहीं है।
केजीएमयू में क्रिटिकल केयर मेडिसिन, पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर विभाग में वेंटिलेटर संचालित हैं। इसके अलावा शताब्दी-फेज टू में भी अलग-अलग विभागों में वेंटिलेटर मौजूद हैं, जिसका संचालन नहीं हो पा रहा है। आलम यह है कि कई विभागों में वेंटिलेटर डिब्बों से बाहर तक नहीं निकाले गये हैं। इसके अलावा सीटीवीएस, कॉर्डियोलॉजी, पीडियाट्रिक सर्जरी, क्वीनमेरी समेत दूसरे विभागों में दिए गए वेंटिलेटर सही तरीके से नहीं चल पा रहे हैं। एक तरफ वेंटिलेटर की कमी और मरीजों की वेटिंग लगातार बढ़ती जा रही है और समय पर वेंटिलेटर न मिलने से मौत तक हो रही है तो वहीं करोड़ों रुपये की लागत से खरीदे गए 50 वेंटिलेटर संचालित नहीं हो पा रहे हैं। शासन ने केजीएमयू प्रशासन को डिब्बों में रखे वेंटिलेटर को चलाने के निर्देश दिए है। इसके बाद केजीएमयू प्रशासन ने कहां-कहां और कौन से विभागों में वेंटिलेटर है, इसकी तलाश शुरू कर दी है। केजीएमयू प्रशासन का दावा है कि मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए वेंटिलेटर संचालित किये जाने की कवायद शुरू कर दी गयी है। अब रखे हुए वेंटिलेटर संचालन के लिए शासन ने 450 पदों को भरने की सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर दी है। पहले इन पदों को भरने की तैयारी है।

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