आखिर क्यों परीक्षा छोड़ रहे हैं छात्र

सवाल कई है, मसलन परीक्षा छोडऩे वाले छात्र कौन थे? किन स्कूलों में पढ़ते थे? क्या उन स्कूलों में पढ़ाई का स्तर इतना खराब था कि वह अपने छात्रों को परीक्षा के लिए तैयार नहीं कर सकते थे? और आखिर में सबसे बड़ा सवाल यह किसकी जिम्मेदारी है ?

उत्तर प्रदेश बोर्ड की परीक्षाओं में नकल पर नकेल कसने का नतीजा है कि अब दस लाख से अधिक छात्रों ने परीक्षा छोड़ दी है। इससे कई सवाल खड़े हो गए हैं। नकल पर रोक से लाखों की संख्या में छात्रों का परीक्षा छोडऩा गंभीर चिंता का विषय है। सवाल कई है, मसलन परीक्षा छोडऩे वाले छात्र कौन थे? किन स्कूलों में पढ़ते थे? क्या उन स्कूलों में पढ़ाई का स्तर इतना खराब था कि वह अपने छात्रों को परीक्षा के लिए तैयार नहीं कर सकते थे? और आखिर में सबसे बड़ा सवाल यह किसकी जिम्मेदारी है ?
पांच फरवरी से यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व बारहवीं की परीक्षाएं शुरु हुई है, तब से लेकर अब दस लाख से ज्यादा छात्र परीक्षा छोड़ चुके हैं। सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है कि वह नकल रोकने में कामयाब हुई है, जबकि सरकार के लिए छात्रों का परीक्षा छोडऩा चिंता का विषय है। सरकार को इस पर गंभीरता से इसका हल ढ़ूढऩा चाहिए कि आखिर क्यों ऐसी स्थिति आई कि 15 -16 साल के बच्चे फेल होने के डर से परीक्षा छोड़ रहे हैं। सरकार को इसके लिए जो जिम्मेदार हैं उनकी जवाबदेही तय करनी चाहिए। यदि जिम्मेदारी की बात की जाए तो इसके लिए पूरा तंत्र जिम्मेदार है। शिक्षक से लेकर स्कूलों को मान्यता देने वाले अफसर। प्रदेश में स्कूलों की बदहाली की तस्वीर कितनी भयावह है उसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नकल पर सख्ती से वह परीक्षा छोड़ रहे हैं। एक वक्त था कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों से पढक़र निकलने वाले छात्र आगे चलकर बड़े-बड़े पदों पर आसीन होते थे और आज ऐसे हालात हो गए है कि छात्र परीक्षा छोड़ रहे हैं। पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति स्पष्टï हो जायेगी कि नकल कराने वाली सरकार हो या नकल रोकने वाली, परीक्षा छोडऩे के आंकड़े एक जैसे ही कमोवेश रहे हैं। 2012 में 2.58 लाख, 2013 में 5.64 लाख, 2014 में 6.11 लाख, 2015 में 6.75 लाख, 2016 में 7.42 लाख और 2017 में 6 लाख छात्रों ने परीक्षा छोड़ी। इसके पीछे एक बड़ी वजह फर्जी परीक्षार्थियों का पंजीकरण है। इसके अलावा नकल माफिया का वर्चस्व। नकल माफियाओं ने पूरे सिस्टम को बर्बाद कर दिया है। पैसे लेकर नकल कराने से लेकर सेंटर बदलाने का जो खेल हो रहा है उससे छात्रों का भविष्य तो बर्बाद हो ही रहा है साथ ही शिक्षा व्यवस्था के लचीलेपन का भी पोल खोल रहा है।

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