मालदीव संकट और भारत-चीन

सवाल यह है कि मालदीव को लेकर चीन भारत को नसीहत क्यों दे रहा है? क्या वह खुद मालदीव मामले में हस्तक्षेप कर हिंद महासागर में अपना वर्चस्व बढ़ाना चाहता है? क्या भारत एक बार फिर सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है? क्या मालदीव के जरिए चीन भारत को हिंदमहासागर में घेरने की कोशिश कर रहा है?

मालदीव में राजनीतिक संकट बढ़ता जा रहा है। पूर्व राष्ट्रपति मो. नशीद ने भारत से मौजूदा हालात में सैन्य हस्तक्षेप की मांग की है जबकि राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने चीन, पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे देशों में राजनयिक भेजे हैं। यामीन ने भारत में कोई दूत नहीं भेजा है। दूसरी ओर चीन ने भारत को मालदीव में किसी प्रकार के सैन्य हस्तक्षेप से परहेज करने को कहा है। सवाल यह है कि मालदीव को लेकर चीन भारत को नसीहत क्यों दे रहा है? क्या वह खुद मालदीव मामले में हस्तक्षेप कर हिंद महासागर में अपना वर्चस्व बढ़ाना चाहता है? क्या भारत एक बार फिर सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है? क्या मालदीव के जरिए चीन भारत को हिंदमहासागर में घेरने की कोशिश कर रहा है? क्या मालदीव और भारत के रिश्ते कमजोर हो चुके हैं?
मालदीव संकट उस समय उत्पन्न हुआ जब वहां के सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक कैदियों और विपक्षी नेताओं को जेल से रिहा करने के आदेश दिए। फैसले के तत्काल बाद मालदीव के राष्टï्रपति अब्दुल्ला यामीन ने आपातकाल घोषित कर दिया। सुरक्षा बलों ने चीफ जस्टिस समेत दो सीनियर जजों और पूर्व राष्टï्रपति गयूम को भी अरेस्ट कर लिया। सरकार के दबाव में कोर्ट ने अपना आदेश वापस ले लिया है। बावजूद राजनीति संघर्ष तेज हो गया है। शीर्ष अदालत के आदेश को लेकर भारत ने कहा था कि मालदीव सरकार को उसके आदेश को मानना चाहिए। कई सालों से मालदीव राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। 2013 के चुनावों के बाद यामीन राष्टï्रपति बने। यामीन की चीन से काफी नजदीकी है जबकि भारत से महज 400 किमी दूर हिंद महासागर में स्थित यह देश भारत का करीबी रहा है। यही वजह है कि जब 1988 में मालदीव के राष्ट्रपति मौमून अब्दुल गयूम को सत्ता से उखाडऩे की कोशिश की गई तो भारत ने सैन्य हस्तक्षेप किया था। मालदीव में चीन और भारत दोनों के हित है। हिंद महासागर में मालदीव की भौगोलिक स्थिति सामरिक दृष्टि से चीन के लिए बेहद उपयोगी है। लिहाजा वह इस मौके का फायदा उठाना चाहता है। इसी कड़ी में उसने मालदीव के साथ मैरीटाइम सिल्क रूट से जुड़े एमओयू पर हस्ताक्षर किए है। यही वजह है कि चीन भारत को मालदीव से दूर रखने की कूटनीतिक कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर भारत अमेरिका और जापान के सहयोग से हिंद महासागर में अपना वर्चस्व कायम करना चाहता है। यही वजह है कि दोनों देश आमने-सामने आ गए हैं। यदि भारत हिंद महासागर में अपना दबदबा बनाए रखना चाहता है तो उसे जल्द से जल्द मालदीव संकट का समाधान करना होगा। यदि ऐसा नहीं हो सका तो मालदीव चीन की गोद में बैठ सकता है। यह भारत के लिए सामरिक दृष्टिï से अच्छा नहीं होगा।

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