11 मार्च को होगी सीएम योगी की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा

गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट के लिए 11 मार्च को होंगे उपचुनाव, 14 मार्च को आयेंगे नतीजे
योगी आदित्यनाथ 1998 से बीजेपी के बैनर से लगातार चुने जाते रहे हैं सांसद
करीब तीन दशक बाद पहली बार होगा जब गोरखपुर संसदीय सीट पर गोरक्षपीठ के
बजाए किसी अन्य नेता का होगा कब्जा

संजय शर्मा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद से योगी आदित्यनाथ लगातार परीक्षाओं से गुजर रहे हैं। इस बार उनकी सबसे बड़ी परीक्षा 11 मार्च को होगी। दरअसल सीएम योगी और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे से खाली हुई गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों के लिए उपचुनाव की तारीख का ऐलान हो गया है। गोरखपुर और फूलपुर में मतदान 11 मार्च को होंगे और मतों की गिनती 14 मार्च को होगी। गोरखपुर सीएम योगी का गढ़ है और इस सीट से योगी की प्रतिष्ठïा जुड़ी है। इस सीट पर जीत मिलती है तो यह जीत बीजेपी की नहीं बल्कि योगी की होगी और हार मिलती है तो भी योगी की ही होगी।
बीजेपी के दुर्ग कहे जाने वाले गोरखपुर और डिप्टी सीएम केशव मौर्य के क्षेत्र फूलपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव सीएम योगी की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा है। बीजेपी के लिए इन दोनों सीटों को अपने पास रखने की चुनौती है, जबकि विपक्ष ने घेराबंदी करने की पूरी तैयारी कर रखी है। ऐसे में अब देखना होगा कि योगी और केशव किस तरह से विपक्ष की रणनीति को भेदकर अपने-अपने गढ़ को बरकरार रखते हैं? दरअसल गोरखपुर और फूलपुर के गणित को अगर देखा-परखा जाए तो दोनों संसदीय क्षेत्रों में बड़ी दिलचस्प लड़ाई रही है। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को इन सीटों पर सभी विपक्षी दलों को मिले कुल वोटों से भी ज्यादा वोट मिले थे। यही वजह है कि बीजेपी को दोनों सीटों पर अपना वर्चस्व कायम रखना एक बड़ी चुनौती है। यदि गोरखपुर की बात की जाए तो खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 1998 से भारतीय जनता पार्टी के बैनर से लगातार सांसद चुने जाते रहे हैं। गोरखपुर की इस सीट पर महंत अवैद्यनाथ के गुरु महंत दिग्विजय नाथ (1967-70) भी सांसद रह चुके हैं। वर्ष 1989 से गोरखपुर संसदीय सीट पर गोरक्षपीठ का कब्जा रहा है। योगी के गुरू ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ इस सीट से 1989, 91 व 96 में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। करीब तीन दशक बाद ऐसा पहली बार होगा जब गोरखपुर संसदीय सीट पर किसी ऐसे नेता का कब्जा होगा जो गोरक्षपीठ से संबंधित नहीं होगा। इस सीट को जीतने के लिए विपक्षी दलों ने तमाम रणनीति अपनाई, लेकिन कभी उनकी चाल सफल नहीं हो पाई है। इस बार भी विपक्षी दलों ने कमर कस ली है।

बीजेपी के लिए नाक का सवाल है उपचुनाव

गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री और केशव प्रसाद मौर्य के डिप्टी सीएम बनने के बाद उनके इस्तीफे से ये सीटें खाली हुई थी। दोनों ही रिक्त सीटों पर 22 मार्च तक चुनाव कराए जाने थे। चुनाव आयोग ने आज उपचुनाव के लिए तारीखों की घोषणा कर दी है। हालांकि दोनों ही सीटों के लिए बीजेपी ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। भारतीय जनता पार्टी प्रदेश संगठन ने पांच फरवरी को दो लोकसभा क्षेत्रों गोरखपुर और फूलपुर के उपचुनावों के लिए दायित्व सौंप दिया है। प्रदेश मीडिया प्रभारी हरिश्चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि गोरखपुर लोकसभा के लिए प्रदेश मंत्री कौशलेन्द्र सिंह, अनूप गुप्ता और विधायक राम चौहान को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं फूलपुर लोकसभा क्षेत्र के लिए प्रदेश मंत्री गोविन्द शुक्ल और अमर पाल मौर्य व विधायक भूपेश चौबे को दायित्व सौंपा गया है। ये दोनों ही सीटें बीजेपी के लिए उपचुनाव में नाक के सवाल से कम नहीं हैं। इस सीट पर जीत के कई मायने निकलेंगे, लिहाजा विपक्ष भी इन सीटों पर बीजेपी को घेरने की कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है।

विधानसभा में विपक्षी दलों ने राशन कार्ड मामले पर सरकार को घेरा

विपक्ष ने लगाया आरोप, हो रहा है अपात्रों का चयन
संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कहा
6 महीने के भीतर होगी कार्यवाही

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। विधानसभा में आज राशन कार्ड का मामला गंूजा। विपक्षी दलों ने राशन कार्ड मामले पर सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि अपात्रों का चयन हो रहा है। सरकार इस पर कोई कार्यवाही नहीं कर रही है। विपक्षी दलों के सवालों का जवाब देते हुए संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि 6 महीने के भीतर मामलों पर कार्यवाही होगी।
विधानसभा सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान कई मुद्दों पर विपक्षी दल सपा, बसपा और कांग्रेस ने सरकार को घेरा। सबसे पहले विपक्ष ने राशन कार्ड का मुद्दा उठाया। विपक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा कि राशन कार्ड में अपात्रों का चयन हो रहा है, इस पर जवाब देते हुए संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि इस दिशा में कार्यवाही की जा रही है। 30 लाख से ज्यादा अपात्रों के कार्ड निरस्त हो चुके हैं। राशन प्रणाली में सरकार सुधार चाहती है। प्रश्नकाल में डीबीटी योजना को लेकर विपक्ष ने सवाल किया जिस पर सुरेश खन्ना ने जवाब देते हुए कहा कि बागपत, फैजाबाद के दो तहसीलों में पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है। चंडीगढ़, झारखंड की तर्ज पर खाद्य सुरक्षा में डीबीटी का पायलट प्रोजेक्ट शुरु किया गया है। 4 बिंदुओं पर राशनकार्ड धारकों का सत्यापन हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार राशन प्रणाली में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। राशन के पात्र लाभार्थियों के हितों का ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि 6 महीने के भीतर ऐसे मामलों पर कार्यवाही की जायेगी।

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