कहीं पर निगाहें कहीं पर निशाना

अपने बाबा भी बहुत चतुर सुजान है। विरोधियों को चित करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। बाबा मौका मिलने ही अपने कार्यों का बखान दिल खोलकर करते हैं। भले ही लोग उनके बखान को गंभीरता से ले रहे हो या नहीं। हां, यदि किसी ने सवाल कर दिया कि बाबा जी यहां गलत हो रहा है, तो फिर पूछिए नहीं। तपाक से कहते हैं, भाई अपने वाक्य को सुधार लो जरा। गलत हो नहीं रहा है, हो रहा था। यह सारा काम हमारे पूर्ववर्तियों ने किया है। हम तो उनका फैलाया रायता बटोर रहे हैं। लेकिन आप विश्वास रखिए, यूपी को सुधार कर दम लूंगा। बाबा हूं। एक बार कमिटमेंट कर दिया तो फिर अपने आप की भी नहीं सुनता जी।

 

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