झोलाछाप से इलाज, चिकित्सा सेवाएं और खतरे में मरीज

सवाल यह है कि आखिर दूर-दराज के इलाके के लोग झोलाछाप से इलाज को मजबूर क्यों हुए? क्या स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा चुकी हैं? क्या ग्रामीण इलाकों में बनाए गए स्वास्थ्य केंद्र शोपीस हैं? क्या जागरूकता का अभाव इसके लिए जिम्मेदार है? क्या चिकित्सा सेवाओं को दुरुस्त करने के तमाम सरकारी दावे खोखले हैं?

उन्नाव में एक झोलाछाप के इलाज से करीब बीस लोग खतरनाक एचआईवी की चपेट में आ गए। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। झोलाछाप ग्रामीण क्षेत्रों में साइकिल से घूमकर लोगों का इलाज करता था। लोगों के संक्रमित होने की मुख्य वजह एक इंजेक्शन का बार-बार इस्तेमाल करना बताया जा रहा है। सवाल यह है कि आखिर दूर-दराज के इलाके के लोग झोलाछाप से इलाज को मजबूर क्यों हुए? क्या स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा चुकी हैं? क्या ग्रामीण इलाकों में बनाए गए स्वास्थ्य केंद्र शोपीस हैं? क्या जागरूकता का अभाव इसके लिए जिम्मेदार है? क्या चिकित्सा सेवाओं को दुरुस्त करने के तमाम सरकारी दावे खोखले हैं? क्या नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है?
उन्नाव के गांवों में घटी यह घटना एक बानगी भर है। पूरे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की यही तस्वीर है। यहां के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शोपीस बनकर रह गए हैं। अधिकांश केंद्रों से चिकित्सक नदारद रहते हैं। दवाएं और जांच उपकरण नहीं है। कई केंद्र नर्स और वार्ड ब्वाय के भरोसे चल रहे हैं। इसका फायदा इन क्षेत्रों में सक्रिय झोलाछाप उठाते हैं। जानकारी के बावजूद चिकित्सा विभाग ऐसे झोलाछापों के खिलाफ अभियान नहीं चलाता है। ऐसा नहीं है कि झोलाछाप केवल ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मिलीभगत कर ये छोटे-बड़े सभी शहरों में अपनी दुकानें चला रहे हैं। शहरों में ये मरीजों से मोटी रकम ऐंठ रहे हैं। सच यह है कि पूरे प्रदेश में चिकित्सा सेवाएं चरमरा चुकी है। जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक में अव्यवस्था है। कई जिला अस्पतालों में डॉक्टर और कर्मचारी समय पर नहीं आते है। मरीज घंटों इंतजार करने के बाद बिना इलाज लौट जाते हैं। इस लचर चिकित्सा सेवाओं का सबसे अधिक असर गरीब मरीजों पर पड़ता है। वे निजी अस्पतालों में महंगा इलाज नहीं कर सकता है लिहाजा उनके सामने झोलाछाप ही एकमात्र विकल्प होते हैं। हालांकि कई बार जागरूकता के अभाव के कारण भी ये झोलाछाप के चंगुल में फंस जाते हैं। यदि सरकार सभी को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराना चाहती है तो सबसे पहले उसे सभी चिकित्सा केंद्रों में चिकित्सकों, दवाओं और जांच उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही झोलाछापों पर शिकंजा भी कसना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो झोलाछाप मरीजों की जान से खिलवाड़ करते रहेंगे।

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