…तो ऐसे चल रही हैं इंवेस्टर समिट की तैयारियां राजधानी की सडक़ों पर आवारा जानवरों का आतंक

गोमती नगर के मुख्य मार्गों पर लगातार बढ़ रहे आवारा जानवर, हादसों के बाद भी नहीं हो रही कार्रवाई
भैंसों के झुंड, सडक़ पर पैदा कर रहे जाम की स्थिति, सडक़ पर निकलना मुश्किल

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। अगले माह होने वाली इंवेस्टर समिट से पहले शहर संवारने का काम जोरों पर चल रहा है। इस कार्य में विभिन्न विभाग को शासन की ओर से सख्त निर्देश जारी कर किये गये हैं। लेकिन शहर की सडक़ों से आवारा जानवरों की संख्या में कमी नहीं दिख रही है। बीते कुछ सालों में शहर में अवैध डेयरियों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है। शहर की सडक़ों पर घूम रहे आवारा जानवरों को पकडऩे में नगर निगम नाकाम साबित हो रहा है। शहर के मुख्य मार्गों पर घूम रहे आवारा जानवर लोगों के लिए खतरनाक बन चुके हैं, तमाम बार शहर में आवारा जानवरों के कारण लोगों की मौत हो चुकी है। हादसों के बाद भी पशुपालक अपने मवेशियों को खुला छोड़ दे रहे हैं। वहीं, नगर निगम का भारी भरकम कैटिल कैचिंग दस्ता भी इन पर लगाम नहीं लगा पा रहा है।
गोमती नगर स्थित एलडीए कार्यालय से लेकर गोमती नगर विस्तार को जाने वाले ग्वारी चौराहा पर रोजाना सैकड़ों की संख्या में भैंसे आती-जाती दिख जाएंगी। स्थानीय लोगों का कहना है, पशुपालक सुबह इन भैसों को चराने के लिए ले जाते हैं और शाम को वापस लाते हैं। इस दौरान ग्वारी चौराहा, दयाल पैराडाइज से लेकर एलडीए आफिस की सडक़ का यातायात प्रभावित होता है। गाडिय़ों से निकलने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बीते दिनों नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने जोन-सात के निरीक्षण के दौरान अवैध डेयरियों को हटाने के निर्देश दिये थे लेकिन दो-चार दिन सख्ती से अभियान चला फिर ठप हो गया। इंवेस्टर समिट के लिए भले ही नगर निगम शहर के चौराहों, फुटपाथों व डिवाइडरों को चमकाने में जुटा हो, लेकिन शहर की सडक़ें सुरक्षित नहीं हैं। आवारा पशु यहां दिन रात आतंक मचाते दिख जायेंगे। सडक़ों की सफाई के नाम पर लाखों खर्च हो रहे हैं फिर भी सडक़ों पर गोबर नजर आता है। लेकिन निगम के अफसर चेत नहीं रहे हैं। नगर निगम की ओर से रोजाना पकड़ी जा रही भैंसों की संख्या इतनी कम है कि सडक़ पर इनकी संख्या घट नहीं रही है। आलम यह है कि एक बार कैटिल कैचिंग दस्ता पशुओं को पकड़ता है तो दूसरी ओर पशुपालक जुर्माना भर कर छुड़ा लेते हैं। हांलाकि जुर्माना बहुत ज्यादा है फिर भी पशु पालकों पर असर नहीं दिख रहा है। वे पशुओं को फिर खुला छोड़ देते हैं। कई बार अपने मालिकों की अनदेखी और भूख से परेशान पशु सडक़ पर निकल आते हैं। ये शहर की पूरी यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं। कई बार पशु सडक़ पर जा रहे लोगों पर हमला कर देते हैं। अभी तक ऐसी तमाम घटनाएं हो चुकी हैं। राजधानी में अवैध डेयरियों की संख्या बढऩे से समस्या और बढ़ गई है। नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना के निर्देश के बाद भी शहर में अवैध डेयरियों के खिलाफ कोई खास कदम नहीं उठाया गया है।

नगर निगम केवल अपने क्षेत्र से ही आवारा जानवरो को पकड़ता है। गोमतीनगर का कुछ हिस्सा नगर निगम में है। जो हिस्सा नहीं है उसकी जिम्मेदारी एलडीए की है।
-डॉ. अरविन्द कुमार राव,
पशु चिकित्साधिकारी, नगर निगम

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