सरकार की नीतियों से आहत होकर होनहार दे रहे नौकरियों से इस्तीफा, विभाग भी चिंतित

दो माह में दो दारोगाओं ने नौकरी से दिया इस्तीफा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। प्रदेश का युवा वर्ग नौकरी पाने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रहा है। इसके बाद भी अधिकांश युवाओं को नौकरी के अवसर प्राप्त नहीं हो रहे हैं। आलम यह है कि युवा वर्ग अब रिश्वतखोरी के माध्यम से नौकरी पाने की लालसा में पीछे नहीं हट रहा है। वहीं दूसरी ओर युवाओं का एक ऐसा वर्ग भी है जो बड़ी मुश्किल से नौकरी पाता है मगर शासन की नीतियों से खिन्न होकर नौकरी छोडऩे में भी नहीं हिचकिचाता है। पुलिस विभाग में अभी हाल ही में नौकरी छोडऩे के दो मामले प्रकाश में आ चुके हैं। इनमें से पहला मामला मेरठ जनपद का है जहां पर प्रदेश सरकार की नीतियों से खिन्न होकर एक युवक ने दारोगा की नौकरी से इस्तीफा दे दिया। वहीं दूसरा मथुरा जनपद का है, जहां एक अन्य दारोगा ने नौकरी छोड़ दी।
दरोगा की नौकरी छोडऩे का पहला मामला मेरठ जनपद में प्रकाश में आया था जहां वर्ष 2011 में दरोगा बने अजीत सिंह को वर्ष 2016 में प्रमोट कर उपनिरीक्षक बना दिया गया था। 1 सितंबर 2017 को उनकी पहली पोस्टिंग मेरठ के रोहटा थाने में कर दी गई थी। इसी बीच एक दिन अचानक अजीत सिंह मेरठ की एसएसपी मंजिल सैनी से मिले और उनको अपना इस्तीफा सौंप दिया। एसएसपी ने अजीत सिंह को नौकरी ना छोडऩे के लिए काफा समझाया लेकिन वह मानने को कतई तैयार नहीं हुये। इसलिए एसएसपी ने उनका इस्तीफा लेकर उसे शासन को भेज दिया। वहीं अजीत सिंह ने एसएसपी को बड़े ही चौंकाने वाली बात बताई। उसका कहना था कि वह मूल रूप से अलीगढ़ जिले के खैर का रहने वाला है और उसका एक भाई पीसीएस अधिकारी है। वह स्वयं दिल्ली पुलिस में 6 साल तक सिपाही की नौकरी कर चुके हैं, लेकिन यूपी में पुलिस की नौकरी और कार्यशैली से परेशान हो चुके हैं। लगातार काम करने से उनकी निजी जिंदगी एकदम खत्म होती जा रही है। यूपी पुलिस में न तो काम करने के घंटे चय हैं और न ही खाने का वक्त निर्धारित है। भागते-दौड़ते खाना खा कर वक्त गुजारना पड़ रहा है। इसके अलावा वक्त और जरूरत के मुताबिक छुट्टी भी नहीं मिल पाती है। काम के दबाव के चलते उनकी तबीयत भी खराब हो गई है। इसलिए वह दोबारा दिल्ली पुलिस की नौकरी ज्वाइन करना चाहते हैं। उन्होंने यूपी में दारोगा की नौकरी ज्वाइन करने से पहले ही लेटर पर लिखवा लिया था कि दो साल के अंदर वापस लौटे तो उन्हें दोबारा नौकरी दे दी जाएगी।
पुलिस विभाग से इस्तीफा देने का सिलसिला मथुरा में तैनात एक प्रशिक्षु दारोगा ने फिर से शुरू कर दिया है। बताया जाता है कि 2015 में बड़ी मेहनत और लगन के साथ दारोगा की नौकरी हासिल करने वाले अश्विनी कुमार को यूपी पुलिस की नौकरी रास नहीं आ रही है। अश्विनी कुमार को जब मथुरा जनपद के माट थाने में तैनाती मिली तो वह बहुत ही खुश थे मगर उनकी खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। अश्विनी के मुताबिक अपने ही विभाग के लोगों ने उनके साथ जो बर्ताव किया उससे वह आहत हो गए हैं। इसीलिए उन्होंने अपना इस्तीफा पहले सीओ को भेजा था लेकिन सीओ ने इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। इस पर वह अपना इस्तीफा लेकर एसएसपी मथुरा के पास पहुंच गए। एसएसपी मथुरा के पास पहुंचे। वहां उन्होंने जो कारण गिनाए हैं वह बहुत ही चौंकाने वाले हैं। अश्विनी ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि पुलिस विभाग में 30 छुट्टियां कैजुअल लीव के लिए हंै मगर यह कानून हकीकत से परे है। यहां पर 30 छुट्टियों की तो बहुत बड़ी बात है, पुलिस वालों को छुट्टी तो मिलती ही नहीं है। इतना ही नहीं अश्विनी ने आरोप लगाया है कि पुलिस विभाग में रहने वाले लोग अपने ही विभाग के लोगों से भी रिश्वत लेने से बाज नहीं आते हैं। यहां पर सरकारी कार्यों के लिए भी रिश्वत देनी होती है जैसे कि टीए-डीए के लिए 10 प्रतिशत एडवांस के रुप में देना होता है। इसके अलावा मेडिकल के लिए भी 10 प्रतिशत की रिश्वत देनी होती है।
अश्विनी की तरफ से आरोप तो यह भी लगाए गए हैं कि केस डायरी के लिए भी 100 रुपए देने पड़ते हैं और इतना ही रुपया चालान बुक के लिए भी देना होता है। एक दरोगा द्वारा लगाए गए इन आरोपों से पूरा विभाग सकते में है।

पीपीएस अधिकारी भी छोड़ चुके हैं नौकरी

हाल ही में दो दारोगाओं द्वारा विभाग से इस्तीफा देने की बात छोड़ दें तो इससे पूर्व भी वर्ष 2004 में विभाग की नीतियों से खिन्न होकर पीपीएस अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने अपना त्यागपत्र दे दिया था। उनका चयन वर्ष 1991 में पीपीएस के लिए हुआ था। शैलेंद्र ने जब नौकरी ज्वाइन की तो उनको पुलिस विभाग की हकीकत समझ आई। शैलेंद्र के मुताबिक पुलिस विभाग की ट्रेनिंग के दौरान बड़े ही नियम कानून और सिद्धांतों की बात पढ़ाई और सिखाई जाती है मगर जब वह इन्हीं सिद्धांतों के साथ फील्ड में उतरते हैं और नियम कानून का पालन करवाते हैं तो उनके ही विभाग के लोग नियम-कानूनों के पालन में आड़े आते हैं। श्री सिंह ने बताया कि वर्ष 2004 में वह बनारस में तैनात थे तभी उन्होंने पूर्वांचल के माफिया से एक लाइट मशीन गन बरामद की थी और जब इस बात की भनक शासन में बैठे लोगों तक हुई तो उन्होंने उन पर पूरे मामले को रफादफा करने का दबाव बनाना शुरु कर दिया। इसके बाद भी जब उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया तो काफी परेशान किया जाने लगा। आखिरकार विभाग लोगों की तरफ से परेशान किए जाने की घटना से आहत होकर उन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया।

मथुरा में लगाये गये दारोगा के आरोप काफी गंभीर हैं। दारोगा ने विभाग से जुड़ी जो परेशानियां बताई हैं उनमें सुधार किए जाने की आवश्यकता है। इसके अलावा उन्होंने छुट्टी के बारे में जो कहा है वह हर किसी को मालूम है कि पुलिस विभाग में ज्यादा छुट्टियां नहीं मिलती हैं।
-आनन्द कुमार,
अपर पुलिस महानिदेशक,
कानून व्यवस्था

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