जहरीली शराब से मौतें जांच और लचर तंत्र

अहम सवाल यह है कि आखिर कब तक प्रदेश में लोग जहरीली शराब पीकर जान देते रहेंगे? आबकारी विभाग और पुलिस तंत्र के बावजूद प्रदेश भर में कच्ची शराब का धंधा कैसे फल फूल रहा है? क्या आबकारी और पुलिस विभाग में गले तक फैला भ्रष्टïाचार इसके लिए जिम्मेदार है? क्या पुलिस की जानकारी के बिना इस प्रकार के गैरकानूनी धंधे संचालित हो सकते हैं? क्या हादसे के बाद मदद और जांच का आदेश खानापूर्ति भर हैं?

बाराबंकी में जहरीली शराब ने एक दर्जन लोगों की जान ले ली। जिला प्रशासन और आबकारी विभाग इस मामले पर लीपापोती करने में जुटे हैं। जिला प्रशासन तीन लोगों की मौत की पुष्टिï स्प्रिट पीने से कर रहा है जबकि अन्य की मौत का कारण ठंड या बीमारी बता रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आबकारी और गृह विभाग की संयुक्त टीम से घटना की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है। फिलहाल जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा कि कितने लोगों की मौत जहरीली शराब पीने से हुई है। इन सबके बीच कई सवाल अनुत्तरित हैं। अहम सवाल यह है कि आखिर कब तक प्रदेश में लोग जहरीली शराब पीकर जान देते रहेंगे? आबकारी विभाग और पुलिस तंत्र के बावजूद प्रदेश भर में कच्ची शराब का धंधा कैसे फलफूल रहा है? क्या आबकारी और पुलिस विभाग में गले तक फैला भ्रष्टïाचार इसके लिए जिम्मेदार है? क्या पुलिस की जानकारी के बिना इस प्रकार के गैरकानूनी धंधे संचालित हो सकते हैं? क्या हादसे के बाद मदद और जांच का आदेश खानापूर्ति भर हैं? क्या मौत के सौदागरों के खिलाफ शिकंजा कसने में सरकारी तंत्र नाकाम हो चुका है?
पूरे प्रदेश में कच्ची शराब की भट्ठियां धधक रही हैं। शहरों के सीमावर्ती क्षेत्र में यह धंधा खूब फलफूल रहा है। यहीं से अवैध और कच्ची शराब शहरों में भेजी जाती है। इसका पूरा नेटवर्क है, जिसके जरिए राजधानी के कई स्थानों पर शाम होते ही शराब की दुकानें सज जाती है। मौत के सौदागर कच्ची शराब में नशा बढ़ाने के लिए ऑक्सीटॉसिन इंजेक्शन, नींद की गोलियां और खतरनाक केमिकल मिलाते हैं। इसके कारण शराब मौत का कारण बन जाती है। मलिहाबाद में 2015 में ऐसी ही शराब पीने से 55 लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के बाद प्रशासन काफी सक्रिय हो गया था। कुछ पर कार्रवाई भी की गई थी। लेकिन बाद में मामला शांत हो गया। हकीकत यह है कि अवैध शराब का कारोबार पुलिस और आबकारी विभाग की मिलीभगत से धड़ल्ले से चल रहा है। पुलिस कभी-कभी कुछ लीटर अवैध शराब बरामद कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री करती है। यदि सरकार अवैध शराब से लोगों की जान बचाना चाहती है तो उसे आबकारी और पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टïाचार को समाप्त करना होगा। इसके अलावा आबकारी कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना होगा अन्यथा ऐसे हादसों को रोका नहीं जा सकेगा।

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