गठबंधन को दरकिनार कर संगठन को मजबूत करने में जुटी सपा और कांग्रेस

अखिलेश यादव के बयान से दोनों दलों में मतभेद के संकेत, पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को क्षेत्र में सक्रिय होने को कहा
बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग को लेकर बुलाई गई सपा अध्यक्ष की बैठक में शामिल नहीं हुए
कांग्रेस नेतासमाजवादी पार्टी की नई रणनीति का कांग्रेस नेताओं पर नहीं दिख रहा कोई असर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में करीब डेढ़ साल का समय बाकी है। बावजूद इसके उत्तर प्रदेश में सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है। इस मामले में सपा और कांग्रेस ने तेजी से अपनी रणनीति बदलने के संकेत दिए हैं। सपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के ताजा बयान से साफ हो गया है कि आने वाले चुनाव में सपा और कांग्रेस का गठबंधन शायद ही बरकरार रहे। कांग्रेस भी अखिलेश के रुख को भांप चुकी है। लिहाजा दोनों पार्टियों के नेता गठंबधन को दरकिनार कर संगठन को मजबूत करने में जुट गए हैं। दोनों दलों ने अपने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को जमीनी स्तर पर काम करने का निर्देश जारी कर दिया है। हालांकि दोनों दलों ने गठबंधन कायम रहेगा या नहीं इस पर खुलकर कोई टिप्पणी नहीं की है।
पिछले विधान सभा चुनाव में अखिलेश यादव और राहुल गांधी की जोड़ी ने उत्तर प्रदेश में एक साथ मिलकर काम किया था। यूपी को ये साथ पसंद है, का नारा देकर दोनों मैदान में उतरे थे। इन दोनों नेताओं ने भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। गुजरात चुनाव में भी अखिलेश यादव ने चार सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे और बाकी सीटों पर कांग्रेस के लिए वोट भी मांगा था। मगर हाल में राजनीति में काफी परिवर्तन दिखाई देने लगा है। हालात बदले-बदले नजर आ रहे हैं। ऐसे संकेत मिलने लगे हैं कि आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और सपा के बीच गठबंधन नहीं रहेगा। यही नहीं सपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने को लेकर बुलाई सर्वदलीय बैठक में सभी छोटे दलों के नेता तो शमिल हुए थे लेकिन कांग्रेस और बसपा का कोई भी प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ। कांग्रेस प्रतिनिधि के इस बैठक में शामिल नहीं होने से गठबंधन पर संशय के बादल मंडराने के कयास लगाए जाने लगे हैं। इस बीच लोकसभा चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी से मुकाबला करने के लिए गठबंधन बनाकर उतरने की तैयारी कर रही विपक्षी एकता को सपा मुखिया अखिलेश यादव ने बड़ा झटका दिया है। पिछले साल यूपी के विधान सभा चुनाव में अखिलेश-राहुल की बनी जोड़ी जुदाई की राह पर खड़ी दिख रही है। अखिलेश यादव को महागठबंधन समय की बर्बादी नजर आ रहा है। वहीं कांग्रेस नेता इस बात को हलके में ले रहे हैं। अखिलेश यादव ने एक साक्षात्कार के दौरान साफ तौर पर कहा था कि 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए अभी तक मैं किसी पार्टी के साथ गठबंधन की नहीं सोच रहा हूं। गठबंधन और सीट शेयरिंग पर बात कर मैं अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहता। अखिलेश ने ये भी कहा था कि मैं किसी भ्रम में नहीं रहना चाहता हूं्र। साथ ही उन्होंने पार्टी संगठन को मजबूत करने की बात कही थी। अखिलेश के इस बयान से कांग्रेस और समाजवादी पार्टी में कहीं न कहीं मतभेद के संकेत मिल रहे हैं। दूसरी ओर अखिलेश यादव के गठबंधन से इनकार की बात को कांग्रेस नेता काफी हल्के में ले रहे हैं। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने कहा कि हम जमीन पर अपने संगठन को मजबूत करने में लगे हैं। अभी हमारा पूरा फोकस पार्टी को मजबूत करने पर है, जहां तक महागठबंधन की बात है तो उस पर कांग्रेस की केंद्रीय लीडरशिप फैसला करेगी। दूसरी ओर कांग्रेस के राज्यसभा सासंद पी एल पुनिया ने भी कहा कि समाजवादी पार्टी अपने संगठन को अगर मजबूत कर रही है तो हम भी उसी काम में जुटे हुए हैं। हमारा पहला लक्ष्य पार्टी और संगठन को मजबूत करने का है।

गठबंधन के खिलाफ थे मुलायम
विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की बुरी तरह हुई हार के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि उनके मना करने के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कांग्रेस से गठबंधन किया। दरअसल, मुलायम सिंह यादव शुरू से ही इस गठबंधन के खिलाफ थे। उन्होंने यहां तक कहा था कि ‘हमारी जिंदगी बर्बाद करने में कांग्रेस ने कोई कसर नहीं छोड़ी। समाजवादी पार्टी जनता की गलती से नहीं खुद अपनी गलती से हारी है। लगता है पिता की बात पर मंथन करने के बाद अब सपा के राष्टï्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव गठबंधन को लेकर निर्णायक फैसला लेने की तैयारी में हैं।

बीजेपी ने कसा तंज

अखिलेश-राहुल की दोस्ती में पड़ती दरार को लेकर बीजेपी ने अभी से तंज कसना शुरू कर दिया है। बीजेपी ने कहा कि गठबंधन में दरारें आ गई हैं, इस बात पर कांग्रेस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि बीजेपी के दृष्टिकोण में ही दरारें हैं इसलिए उन्हें हर जगह टूट नजर आती है।

Pin It