ट्रेन में आग, लापरवाही और सुरक्षा का सवाल

सवाल यह है कि स्टेशन में खड़ी ट्रेन में आग कैसे लगी? क्या यह रेलवे सुरक्षा बल और रेल प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है? आखिर आग जैसी घटना का संकेत देने वाले अलार्म सिस्टम से ट्रेनों को लैस क्यों नहीं किया गया है? क्या ट्रेनों और यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है? क्या रेलवे यात्रियों से किराया वसूलने का तंत्र बन चुका है?
मोकामा स्टेशन पर खड़ी पटना-मोकामा पैसेंजर ट्रेन अचानक आग की चपेट में आ गई। देखते-देखते ट्रेन की चार बोगियां जल गईं। यही नहीं दूसरी लाइन में खड़ेे दो इंजन भी आग की चपेट में आ गए। गनीमत यह थी कि जिस समय आग लगी कोई भी यात्री ट्रेन में सवार नहीं था। रेलवे ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। आग लगने के कारणों की स्पष्टï जानकारी नहीं हो सकी है। सवाल यह है कि स्टेशन में खड़ी ट्रेन में आग कैसे लगी? क्या यह रेलवे सुरक्षा बल और रेल प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है? आखिर आग जैसी घटना का संकेत देने वाले अलार्म सिस्टम से ट्रेनों को लैस क्यों नहीं किया गया है? क्या ट्रेनों और यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है? क्या रेलवे यात्रियों से किराया वसूलने का तंत्र बन चुका है? रेलवे की सुरक्षा को लेकर सरकार के सामने पेश की गई तमाम रिपोर्टों पर ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा है?
भारत विश्व की बड़ी रेल प्रणाली में से एक है। यहां ट्रेन के जरिए प्रतिदिन दस करोड़ से अधिक लोग एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं। देश की अर्थव्यवस्था और जीडीपी में रेलवे की विशेष भागीदारी है। बावजूद इसके यहां रेलवे संचालन की व्यवस्था लगातार खराब होती जा रही है। भारतीय ट्रेन हादसों की रेल के नाम से कुख्यात होती जा रही है। पिछले एक साल में कम से कम दो दर्जन से अधिक बड़े रेल हादसे हुए। इन हादसों में सैकड़ों लोगों की मौत हुई। हर हादसे के बाद सरकार रेल व्यवस्था में सुधार का ऐलान करती है, लेकिन नतीजा सिफर है। जांच कमेटी द्वारा रेलवे में सुधार के लिए दी गई तमाम दलीलों और नसीहतों को दरकिनार कर दिया जाता है। इसका खामियाजा अगले रेल हादसे के रूप में दिखाई पड़ता है। हकीकत यह है कि रेलवे की पूरी व्यवस्था भ्रष्टïाचार की भेंट चढ़ चुकी है। रेलवे सुरक्षा बल यात्रियों और स्टेशन पर लगी दुकानों से वसूली में व्यस्त रहते हैं। ट्रेन की रवानगी से लेकर उसके गंतव्य तक पहुंचने के दौरान रेलवे सुरक्षा कर्मी कभी-कभार ही दिखते हैं। कई बार इनकी शह पर ट्रेनों में लूटपाट और चोरी तक की घटनाएं होती हैं। पटना-मोकामा पैसेंजर ट्रेन की दुर्घटना इसी लापरवाही का नतीजा है। आशंका जताई जा रही है कि नशेडिय़ों के कारण ट्रेन आग की चपेट में आई। यदि स्टेशन पर ट्रेन सुरक्षित नहीं है तो मामला बेहद गंभीर हो जाता है। यदि ऐसी घटनाओं पर लगाम नहीं लगी तो लोग ट्रेन यात्रा करने से परहेज करने लगेंगे और इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। ऐसे में बुलेट ट्रेन चलाने का सरकार का सपना कभी साकार नहीं हो पाएगा।

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