भ्रूण के लिंग जांच पर शिकंजा, राजधानी के डायग्नोस्टिक केंद्रों की निगरानी करेगी कमेटी

अल्ट्रासाउंड के अलावा एमआरआई मशीन का भी कराना होगा पंजीकरण
पंजीकरण नहीं कराने वाले जांच केंद्रों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। भ्रूण के लिंग जांच पर स्वास्थ्य विभाग ने अपना शिकंजा और कस दिया है। विभाग ने अल्ट्रासाउंड मशीनों के साथ अब एमआरआई मशीन के पंजीकरण को भी अनिवार्य कर दिया है। राजधानी में चल रहे निजी अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों को इस बारे में निर्देश जारी कर दिए गए हैं। साथ विभाग ने भू्रण के लिंग जांच पर नजर रखने के लिए कमेटी का गठन भी कर दिया है। ये कमेटी इन केंद्रों की समय-समय पर जांच-पड़ताल करेगी।
स्वास्थ्य विभाग ने अल्ट्रासाउंड मशीन के साथ एमआरआई मशीन का भी पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है क्योंकि अल्ट्रासाउंड की तरह एमआरआई मशीन के जरिये भी भ्रूण के लिंग की जांच आसानी से हो सकती है। अब राजधानी के सभी सरकारी व निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों पर अल्ट्रासाउंड के साथ एमआरआई मशीन की भी जानकारी प्री.कॉन्सेप्शन एंड प्री नेटल डायग्नोस्टिक टेक्नीक्सन एक्ट (पीसीपीएनडीटी )के तहत सर्टिफिकेट पर अंकित करना अनिवार्य होगा। पंजीकरण कराने के लिए 31 जनवरी तक का समय दिया गया है। चिकित्सकों का कहना है कि भू्रण के लिंग की जांच अल्ट्रासाउंड और एमआरआई मशीन दोनों के जरिये आसानी से की जा सकती है। एमआरआई मशीन से रेडिएशन के कारण यह जांच डॉक्टर कम ही करते हैं। पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत डायग्नोस्टिक सेंटर पर मौजूद सभी मशीनों का पंजीकरण होता है लेकिन अब तक पीसीपीएनडीटी पंजीकरण प्रमाणपत्र पर प्रमुख तौर से अल्ट्रासाउंड मशीन की ही जानकारी अंकित की जाती थी। अब इस सर्टिफिकेट पर अल्ट्रासाउंड मशीन के साथ एमआरआई मशीन का भी अंकन अनिवार्य होगा। जिन सेंटरों की मशीनों की जानकारी पीसीपीएनडीटी पंजीकरण प्रमाणपत्र पर अंकित नहीं होगी उनके खिलाफ स्वास्थ्य विभाग एक्ट का उल्लंघन करने के आरोप में कार्रवाई करेगा। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की ओर से नोडल अधिकारी और नामित मजिस्ट्रेट अधिकारी समय-समय पर जांच केंद्रों का दौरा करेंगे। नेशनल इंस्पेक्शन मॉनीटरिंग कमेटी भी इन सेंटरों की औचक जांच कर सकती है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जांच के लिए एक जिला डिकॉय कमेटी का भी गठन किया गया है। यह कमेटी जिले भर के अल्ट्रासाउंड व एमआरआई जांच केंद्रों में हो रही सभी गतिविधियों की गोपनीय तरीके से नजर रखेगी। पुख्ता सूचना के आधार पर केंद्र पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अफसरों की टीम करेगी दौरा
जो सेंटर नए पंजीकरण के लिए अप्लाई करेंगे, उस केंद्र का दौरा करने मजिस्ट्रेट और नोडल अधिकारी की टीम जाएगी। इसके बाद डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेशन कमेटी की बैठक होगी। बैठक में अप्रूवल मिलने के बाद ही संबंधित केंद्र को लाइसेंस जारी किया जाएगा। इसके लिए दो माह में एक बार डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेशन कमेटी की बैठक की जाती है। इस कमेटी में जिलाधिकारी के अलावा डफरिन अस्पताल की एसआईसी डॉ. सविता भट्ट, बलरामपुर अस्पताल के पैथोलॉजिस्ट सुनील कुमार, केजीएमयू के रेडियोलॉजिस्ट, जिला शासकीय अधिवक्ता एडवोकेट प्रदीप व बलरामपुर अस्पताल के डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी शामिल हैं।

जांच का समय, डॉक्टर का नाम व मोबाइल नंबर दर्ज करना अनिवार्य

जिस तरह अल्ट्रासाउंड जांच के लिए पंजीकरण प्रमाण पत्र पर जांच का समय, जांच करने वाले डॉक्टर का नाम व समय के साथ मोबाइल नंबर अंकित करना अनिवार्य होता है, उसी तरह एमआरआई जांच के लिए भी पंजीकरण प्रमाण पत्र पर यह संपूर्ण जानकारी दर्ज करनी अनिवार्य होगी। इसी तरह नई मशीन लाने या डॉक्टर के बदलने की जानकारी भी सीएमओ कार्यालय के पीसीपीएनडीटी सेल में देनी होगी।

एक माह पहले करना होगा आवेदन
मशीन के पंजीकरण की तिथि समाप्त होने से पहले सरकारी व निजी दोनों जांच सेंटरों को तिथि समाप्त होने से एक माह पहले रिन्युअल के लिए अप्लाई करना होगा। अगर रिन्युअल में देरी होती है तो इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से कार्रवाई की जाएगी। नए पंजीकरण में जहां समुचित पदाधिकारी या जिलाधिकारी के नाम 36 हजार रुपये का डिमांड ड्राफ्ट लगेगा वहीं रिन्युअल में 17 हजार 500 रुपए का डीडी जमा करना होगा।

भ्रूण के लिंग जांच पर नजर रखने के लिए सभी डायग्नोस्टिक सेंटरों को एमआरआई मशीन के पंजीकरण के निर्देश जारी किए गए हैं। पंजीकरण के लिए 31 जनवरी तक का समय दिया है। इसके बाद पंजीकरण न कराने वाले सेंटरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. आरके चौधरी, एडिशनल सीएमओ व पीसीपीएनडीटी सेल के नोडल अधिकारी

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