संघ, सरकार और संगठन की बैठक ने बढ़ाया राजधानी का तापमान कई मंत्रियों की धडक़नें बढ़ीं

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बीच बढ़ती खाई पर हो सकती है चर्चा
सरकार की छीछालेदर कराने वाले और कार्यकर्ताओं व विधायकों की न सुनने वाले मंत्रियों पर गिर सकती है गाज

अरूण पाराशरी
लखनऊ। मंगलवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, योगी सरकार और भाजपा संगठन के चुनिंदा लोगों की बैठक होने जा रही है। सरकार और संगठन में होने वाले फेरबदल और भाजपा की कार्यसमिति से पहले होने जा रही इस समन्वय बैठक से राजधानी का राजनीतिक तापमान बढ़ा हुआ है क्योंकि बैठक में यूं तो कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी लेकिन सर्वाधिक महत्वपूर्ण विषय सरकार के मंत्रियों के बीच समन्वय और मंत्रियों की कार्यशैली को लेकर होगा। कुछेक मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाने तो कुछ के विभाग बदलने की आशंका से सरकार के ज्यादातर मंत्रियों की धडक़नें बढ़ी हुई हैं और वे इस बैठक पर नजर जमाए हुए हैं।
मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर होने वाली बैठक के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले और कृष्ण गोपाल शर्मा यहां आ चुके हैं। बैठक में इन दोनों पदाधिकारियों के अलावा स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय मौजूद रहेंगे। सरकार बनने के बाद यह तीसरी समन्वय बैठक होगी। इस बीच कई महत्वपूर्ण विषय उभर कर सामने आए हैं, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बीच तालमेल का मुद्दा भी है। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच खाई और बढ़ती जा रही है। इसी का नतीजा है कि सरकार में मंत्रियों के बीच खेमेबंदी भी हो रही है। पारदर्शी व्यवस्था और स्वच्छ प्रशासन की सरकार की नीति को सरकार के मंत्री ही पलीता लगा रहे हैं। पिछले दिनों एक विभाग में ई-टेंडरिंग होने के बावजूद लगभग 1800 करोड़ रुपये के टेंडर पूल हो गए। बताते हैं कि इसको लेकर बात जब पंचम तल पर पहुंची तो मुख्य सचिव ने विभाग के इंजीनियर इन चीफ को तलब कर लिया। इंजीनियर इन चीफ ने विभाग के स्तर पर किसी तरह की लापरवाही न होने की बात कहते हुए सारी हकीकत खोलकर शासन के सामने रख दी। इसके बाद मुख्य सचिव ने ई-टेंडरिंग को लेकर शासनादेश जारी कर दिया ताकि टेंडर में शासन में बैठा कोई व्यक्ति मनमानी न कर सके। समन्वय बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मुद्दे को उठा सकते हैं। इसके अलावा फतेहपुर जिले में अवैध खनन पर एडीएम समेत कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था। इस मामले में वहां के कुछ विधायकों ने सीएम से शिकायत की थी। यह भी बताया जा रहा है कि अवैध खनन को एक राज्य मंत्री का संरक्षण मिला हुआ था। स्कूली बच्चों को समय से स्वेटर न वितरण किए जाने पर सरकार की छीछालेदर का मामला भी समन्वय बैठक में उठेगा। निकाय चुनाव में मंत्रियों की उदासीनता से हारने वाली सीटों का ब्यौरा भी समन्वय बैठक के सामने आएगा। मंत्रियों का समय पर अपने दफ्तर में न बैठना और कार्यकर्ताओं से न मिलने जैसे मुद्दे तो रहेंगे ही, विधायकों के समूह बनाकर उनकी समस्याओं के समाधान के मुद्दे पर भी योगी सरकार के मंत्री घेरे जाएंगे। दो-तीन मंत्रियों को छोड़ बाकी ने तो विधायक समूह की बैठक भी नहीं ुबुलाई। पार्टी के कई पदाधिकारी और वरिष्ठ कार्यकर्ता इस बैठक से बड़ी उम्मीदें भी पाले हुए हैं। मंत्रिमंडल फेरबदल में कुछ नए चेहरे भी आएंगे। इसे लेकर संघ के पदाधिकारी अपना रुख मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष के सामने रख सकते हैं।

सीएम कार्यालय में आग लगने से हडक़म्प,पांच मिनट में काबू

सुरक्षा अधिकारी की सूझ-बूझ से टला बड़ा हादसा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। हजरतगंज थाना क्षेत्र स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में आग लगने से आज हडक़म्प मच गया। अचानक लगी इस आग से इस कड़ाके की ठण्ड में वहां मौजूद स्टाफ को पसीने छूट गये। सबसे ताज्जुब वाली बात तो यह रही कि सीएम कार्यालय में आग लगने के दो घंटे तक किसी भी पुलिस अधिकारी को इसकी जानकारी नहीं थी।
इस संबंध में सुरक्षा अधिकारी विजय सिंह ने कहा कि पंचम तल पर बने कंप्यूटर कक्ष में शार्ट सर्किट से आग लगी थी जिस पर स्प्रे के माध्यम से काबू पा लिया गया। आग लगने की बात जब सीओ हजरतगंज से पूछी गयी तो उन्होंने ऐसी किसी घटना से इंकार किया। यहीं जवाब एसपी सिटी पूर्वी का भी रहा।

डीजीपी के न आने से पुलिस महकमे में अटकलों का बाजार गर्म

सीआईएसएफ से नहीं हुई अभी तक रिलीविंग
अफसर एक दूसरे से पूछ रहे कहीं कुछ खेल तो नहीं हो रहा तैनाती में

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के पुलिस महकमे के चीफ की कुर्सी कई दिनों से खाली है। सीआईएसएफ के डीजी ओपी सिंह भले ही यूपी के डीजीपी बन गए हों, मगर अभी तक उनके लखनऊ में न आने से अटकलों का बाजार गर्म है। पहले कहा जा रहा था कि वह देश के सभी डीजीपी के सम्मेलन से तुरन्त वापस आकर लखनऊ पदभार ग्रहण करेंगे, मगर आज भी ओपी सिंह लखनऊ नहीं आ रहे क्योंकि अभी तक सीआईएसएफ से उनकी रिलीविंग नहीं हो सकी है।
इतने दिनों तक ओपी सिंह के न आने से पुलिस महकमे में बेचैनी का माहौल है। अफसर एक दूसरे से पूछ रहे हैं कि कहीं तैनाती में बदलाव तो नहीं हो रहा। यह मानने को कोई तैयार नहीं है कि यूपी के डीजीपी घोषित हो जाने के बाद सीआईएसएफ से रिलीविंग में इतना समय लग जाए। इससे पहले भी डीजीपी के पद को लेकर गहमागहमी होती रही है। पिछले डीजीपी सुलखान सिंह की विदाई की परेड और रात्रिभोज होने के बाद उनका सेवा विस्तार का आदेश आया था। ऐसे में लोगों का मानना है कि कहीं फिर कुछ नया आदेश न आ जाए।

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