किसानों का दर्द नीतियां और बाजार

सवाल यह है कि किसानों के विरोध प्रदर्शन की असली वजह क्या है? किसानों का ऋण माफ कर चुकी योगी सरकार से नाराजगी क्यूं? क्या फसलों को लेकर बनाई गई नीतियां किसानों के हितों की रक्षा करने में नाकाम साबित हो रही हंै?क्या किसानों की मुफलिसी की बड़ी वजहें बाजारवादी ताकतें और बिचौलिए हैं? क्या फसल पर लाभ पाने का हक किसान को नहीं है?

आलू का लागत दाम नहीं मिलने से नाराज किसानों ने सरकार के सामने अपनी नाराजगी जाहिर कर दी। विधानसभा, सीएम आवास और राजभवन की सडक़ों पर बिखरे आलू किसानों की बेबसी और आक्रोश की कहानी कहते नजर आ रहे थे। राजधानी के वीवीआईपी इलाके में कई टन बिखरे आलू देखकर अफसरों के होश उड़ गए। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि किसानों ने ये आलू कब और कैसे बिखेरे। हैरानी की बात तो यह है कि किसान इन क्षेत्रों में आलू बिखरते रहे और सुरक्षाकर्मियों को भनक नहीं लगी। सवाल यह है कि किसानों के विरोध प्रदर्शन की असली वजह क्या है? किसानों का ऋण माफ कर चुकी योगी सरकार से नाराजगी क्यूं? क्या फसलों को लेकर बनाई गई नीतियां किसानों के हितों की रक्षा करने में नाकाम साबित हो रही हंै?क्या किसानों की मुफलिसी की बड़ी वजहें बाजारवादी ताकतें और बिचौलिए हैं? क्या फसल पर लाभ पाने का हक किसान को नहीं है? क्या अन्नदाता के दर्द को कम किए बिना सरकार विकास पथ पर आगे बढ़ पाएगी?
पूरे देश में किसानों की हालत बदतर है। वे कर्ज और मुफलिसी में जीने को मजबूर हैं। कर्ज न चुका पाने के कारण किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। जहां तक प्रदेश के आलू किसानों का सवाल है तो उनकी स्थिति खराब है। नगदी फसल के बावजूद आलू किसानों को फसल का वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा है। बाजार में नई आलू की ऑवक ने स्थितियों को और बिगाड़ दिया है। पुराने आलू की मांग बाजार में नहीं है। लिहाजा कोल्ड स्टोरेज में रखे आलू का किराया आलू के कुल बाजार मूल्य से अधिक हो चुका है। लिहाजा किसान अब सरकार की ओर देख रहे हैं। वे चाहते हैं कि प्रदेश सरकार दस रुपये किलो में आलू की खरीद करें ताकि उनकी समस्या का निदान हो सके। सरकार की अपनी सीमाएं हो सकती हैं बावजूद इसके आलू किसानों को बर्बादी से बचाने की पहल उसे करनी चाहिए। दोबारा ऐसा न हो इसके लिए सरकार को बाजारवादी ताकतों और बिचौलियों पर कड़ी कार्रवाई करनी होगी। बिचौलिए बाजार में वस्तुओं का कृत्रिम अभाव या अधिक उपलब्धता दिखाकर किसानों को लूट रहे हैं। साथ ही सरकार को बाजार के उतार-चढ़ाव का ध्यान रखते हुए फसलों का समर्थन मूल्य निर्धारित करने की योजना पर अमल करना चाहिए। जिन फसलों का अधिक उत्पादन हुआ है, उसके लिए भी सटीक नीतियां बनानी होगी। यदि ऐसा नहीं किया गया तो किसानों को समृद्ध करने का सरकार का सपना कभी पूरा नहीं हो सकेगा।

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