अतिक्रमण, जाम और प्रदूषण की समस्या

सवाल यह है कि राजधानी की सडक़ें अतिक्रमणकारियों के चंगुल से मुक्त क्यों नहीं हो पा रही हैं? आए दिन लोगों को जाम की समस्या का सामना क्यों करना पड़ रहा है? यातायात, नगर निगम और पुलिस प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाने में क्यों नाकाम हो रहे हैं? क्या सडक़ों पर अतिक्रमण का कारण विभागों में व्याप्त भ्रष्टïाचार है?

राजधानी लखनऊ की सडक़ें अतिक्रमण से मुक्त नहीं हो पा रही हैं। अतिक्रमण ने जाम की समस्या पैदा कर दी है। अतिक्रमण और जाम के संयुक्त कारण ने यहां की हवा को प्रदूषित कर दिया है। बावजूद इसके न तो नगर निगम और न ही पुलिस प्रशासन मामले को गंभीरता से ले रहा है। सवाल यह है कि राजधानी की सडक़ें अतिक्रमणकारियों के चंगुल से मुक्त क्यों नहीं हो पा रही हैं? आए दिन लोगों को जाम की समस्या का सामना क्यों करना पड़ रहा है? यातायात, नगर निगम और पुलिस प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाने में क्यों नाकाम हो रहे हैं? क्या सडक़ों पर अतिक्रमण का कारण विभागों में व्याप्त भ्रष्टïाचार है? क्या नगर निगम और स्थानीय पुलिस की शह पर यह खेल खेला जा रहा है? क्या राजधानी में बढ़ते प्रदूषण के लिए घंटों जाम में फंसे वाहन जिम्मेदार नहीं है? दरअसल, देश के तमाम बड़े शहरों में जाम की समस्या जटिल होती जा रही है। अधिकांश शहरों में जाम के कारण कमोबेश समान हैं। जहां तक राजधानी का सवाल है, यहां अतिक्रमण और जाम एक सिक्के के दो पहलू हैं। सडक़ें सिकुड़ती जा रही है। लिहाजा वाहनों का आवागमन बाधित हो रहा है। यह सब तब है जब सरकार ने शहर को व्यवस्थित रखने के लिए नगर निगम बना रखा है। हर साल नगर निगम को कार्यों के संचालन के लिए करोड़ों का बजट दिया जाता है। सडक़ों से अतिक्रमण हटाने का काम नगर निगम को सौंपा गया है जबकि सडक़ों पर दोबारा अतिक्रमण न हो इसकी निगरानी पुलिस को दी गई है। बावजूद स्थितियों में कोई तब्दीली नहीं दिखाई देती है। शहर के तमाम स्थानों पर आज भी अतिक्रमण जारी है। अमीनाबाद, हजरतगंज, चारबाग, मेट्रो चौराहा समेत कई स्थानों पर अतिक्रमण ने लोगों की समस्या बढ़ा दी हैं। वहीं अतिक्रमण हटाने के नाम पर नगर निगम खानापूर्ति कर रहा है। कई सडक़ों पर तो पुलिस की शह पर अतिक्रमण हो रहा है। यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। चौराहों पर तैनात यातायात पुलिस ओवरलोड वाहनों से वसूली में व्यस्त रहती है। कई चौराहों पर सिग्नल सिस्टम खराब पड़े हैं। जाम में फंसे वाहन हानिकारक गैसों का उत्सर्जन करते हैं। ये गैसें वातावरण को जहरीला बना रही हैं। प्रदूषण का सीधा असर यहां के निवासियों की सेहत पर पड़ रहा है। जाहिर है यदि पूरी व्यवस्था को जल्द दुरूस्त नहीं किया गया तो राजधानी की सडक़ें अतिक्रमणकारियों के कब्जे में होंगी और यहां की हवा पूरी तरह जहरीली हो जाएगी।

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