प्रदेश में संगठित अपराध यूपीकोका और सरकार

सवाल यह है कि क्या यूपीकोका लागू करने से प्रदेश में अपराधों पर लगाम लग जाएगी? क्या संगठित अपराध के असली जड़ों की पहचान सरकार कर चुकी है? क्या पुलिस में व्याप्त भ्रष्टïाचार को समाप्त किए बिना इसे प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा? क्या राजनीति में अपराधीकरण को खत्म किए बिना संगठित अपराध को खत्म करने का सपना देखा जा सकता है?

आखिरकार प्रदेश सरकार ने संगठित अपराधों पर नियंत्रण लगाने के लिए यूपीकोका विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी। मसौदे में माफिया, अवैध खनन और वनों की कटाई करने वालों आदि पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। इसके अलावा संगठित अपराध नियंत्रण प्राधिकरण और अपीलीय प्राधिकरण के गठन का भी प्रावधान किया गया है। मसौदे के मुताबिक दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति की संपत्ति जब्त की जाएगी। सवाल यह है कि क्या यूपीकोका लागू करने से प्रदेश में अपराधों पर लगाम लग जाएगी? क्या संगठित अपराध के असली जड़ों की पहचान सरकार कर चुकी है? क्या पुलिस में व्याप्त भ्रष्टïाचार को समाप्त किए बिना इसे प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा? क्या राजनीति में अपराधीकरण को खत्म किए बिना संगठित अपराध को खत्म करने का सपना देखा जा सकता है? दरअसल, प्रदेश में संगठित अपराधों की जड़ें गहरे तक जमी हैं। यहां माफिया गैंग बनाकर अपराधों को अंजाम दे रहे हैं। इनके हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वे अवैध खनन रोकने की कोशिश कर रहे अफसरों पर गाडिय़ां चढ़ा देते हैं। जेल से गैंग संचालित करते हैं। कड़े कानूनों के बावजूद वे जमानत पर छूट जाते हैं और फिर अपराधों को अंजाम देते हैं। ऐसा इसलिए संभव है क्योंकि पुलिस विभाग भ्रष्टïाचार में डूबा है। कई बार पुलिस संरक्षण में अपराधी वारदातों को अंजाम देते हैं। माफिया गैंग से जुड़े तमाम मामलों में पुलिस का रवैया बेहद लापरवाही भरा होता है। कई बार पुलिस केस को सुलझाने के बजाए उलझाने की कोशिश में ज्यादा दिखाई पड़ती है। वह अदालत में मजबूती से केस नहीं लड़ती है और इसका फायदा अपराधियों को मिल जाता है। यही नहीं संगठित अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण भी मिलता है। लिहाजा पुलिस ऐसे अपराधियों पर शिकंजा कसने से भी बचती है। यही वजह है कि कड़े कानूनों के बावजूद अपराधों पर नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। कुल मिलाकर एक और कड़ा कानून बना देने से अपराध नहीं रूकेंगे। इसके लिए सरकार को अदालत से लेकर पुलिस तंत्र तक की व्यवस्था में सुधार करना पड़ेगा। अधिक से अधिक अदालतों का गठन करना होगा ताकि मुकदमों का निस्तारण समय से हो सके। साथ ही पुलिस तंत्र में व्याप्त भ्रष्टïाचार पर भी लगाम लगानी होगी। वहीं राजनीति के अपराधीकरण से परहेज करना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ प्रदेश को अपराध मुक्त शायद ही किया जा सके। बावजूद इसके यूपीकोका अपराध के प्रति सरकार की मंशा को जाहिर कर रहा है। उम्मीद है, सरकार इसे प्रभावी बनाने में सफल होगी।

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