शहर की सफाई व्यवस्था चौपट कर रही पॉलिथीन प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से जारी है प्रयोग

पॉलिथीन के कारण नाली-नाले हो रहे चोक, हर साल करोड़ों के बजट से होती है सफाई
पॉलिथीन खाने से हो रही जानवरों की मौत, कार्रवाई के नाम पर नगर निगम कर रहा खानापूर्ति

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। शहर में पॉलीथिन पर प्रतिबंध कागजी साबित हो रहा है। पॉलिथीन के धड़ल्ले से हो रहे प्रयोग के कारण शहर की सफाई व्यवस्था चौपट होती जा रही है। यही नहीं इसके चलते शहर के नाली और नाले चोक हो रहे हैं। वहीं, जिला प्रशासन, नगर निगम व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पॉलीथिन के क्रय-विक्रय और उसके उपयोग पर रोक नहीं लगा पा रहा है।
नगर निगम कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर रहा है।
प्रदेश सरकार की ओर से शहर में पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाया गया है, लेकिन प्रतिबंध का असर केवल विधानसभा व मुख्यमंत्री आवास के आस-पास ही दिखाई पड़ रहा है। पूरे शहर में इसका धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है। होटल से लेकर किराना, कपड़ा, फल और सब्जी मंडी तक में पॉलीथिन में सामान दिए जा रहे हैं। पॉलीथिन को कहीं भी फेंक दिया जाता है। इसके चलते शहर के नाले और नालियां चोक हो रही हैं। सडक़ों पर भी पॉलिथीन का कचरा सफाई व्यवस्था को पूरी तरह चौपट कर रहा है। यही नहीं इस पॉलिथीन को जानवर खा रहे हैं। इसके कारण उनकी मौत हो रही है। नगर निगम इन दिनों स्वच्छ सर्वेक्षण की तैयारी में जुटा है। जगह-जगह सफाई के दावे किए जा रहे हैं लेकिन गंदगी के मूल कारण पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।
शहर में फैली गंदगी में 70 प्रतिशत गंदगी व नाला चोक की समस्या पॉलिथीन के कारण हो रही है। इस बात की जानकारी नगर निगम के अफसरों को है फिर भी पॉलिथीन के खिलाफ कोई बड़ा कदम नहीं उठाया जा रहा है। इसी पॉलिथीन से शहर के नाले चोक हो रहे हैं और नगर निगम हर साल करोड़ों के बजट से शहर की सफाई कराता है। बरसात के मौसम में यह परेशानी बढ़ जाती है।
शासन की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार शहर में 40 माइक्रोन से कम की पॉलीथिन का उपयोग प्रतिबंधित है लेकिन नगर निगम के अधिकारियों के पास माइक्रोन मापने के लिए उपकरण तक नहीं है। पॉलिथीन के खिलाफ अभियान चलाने में भी नगर निगम पूरी तरह से विफल साबित हो रहा है। फैक्ट्रियों में धड़ल्ले से पॉलीथिन का उत्पादन हो रहा है। विभाग के अफसर लगातार दिखावे की कार्रवाई कर रहे हैं। छोटे दुकानदारों और ठेलेवालों से जबरन एक-दो किलो पॉलीथिन बरामद कर अफसर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं।

फैक्ट्रियों के खिलाफ नहीं हो रही कार्रवाई

पॉलीथिन प्रतिबंध के नाम पर लगातार छोटे दुकानदारों और ठेलेवालों पर तो कार्रवाई की जा रही है लेकिन थोक विक्रेता और पॉलीथिन निर्माताओं पर शिकंजा नहीं कसा जा रहा है। यह स्थिति तब है जब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नगर निगम को 13 पॉलीथिन फैक्ट्रियों की लिस्ट सौंप रखी है। नगर निगम ने आज तक इन फैक्ट्रियों पर कोई कार्रवाई नहीं की। राजधानी में पॉलीथिन को बंद कराने के नाम पर जिम्मेदार विभाग और उनके अफसर सिर्फ खानापूर्ति कर रहे हैं। लखनऊ में फैक्ट्रियां बंद कराने के लिए कागजी छापेमारी चल रही है। कार्रवाई से बचने के लिए निगम के अफसरों ने एक नया बहाना तैयार कर लिया है। अफसरों का कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नगर निगम को 13 पॉलीथिन फैक्ट्रियों की जो सूची सौंपी थी, वे ढूंढने से भी नहीं मिल रही हैं। यूपीपीसीबी द्वारा जारी लिस्ट से कुछ पॉलीथिन फैक्ट्रियां की जानकारी मिली है, लेकिन नगर निगम के अफसरों ने इन पर कार्रवाई करना मुनासिब नहीं समझा। कार्रवाई के नाम पर विभाग के अफसर छोटे दुकानदारों और ठेलेवालों से पॉलीथिन बरामद कर रहे हैं। विभाग के कर्मचारियों में इस बात की चर्चा है कि विभाग के शीर्ष अफसरों ने सभी अफसरों को बड़ी कार्रवाई से बचने के निर्देश दे रखे हैं। इसके पीछे कारण यह है कि बीते दो माह पूर्व निगम के अफसरों ने पॉलीथिन के थोक विक्रेता की दुकान पर सीलिंग की कार्रवाई की थी लेकिन व्यापारियों ने रोड जाम कर प्रदर्शन किया तो अफसरों ने कार्रवाई से पीछे हटते हुए दुकान की सील खोल दी।

पॉलिथीन प्रतिबंधित है। इसको बंद करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। जल्द ही पूरे शहर में पॉलीथिन के प्रयोग पर रोक लगा दी जाएगी।
उदयराज सिंह
नगर आयुक्त

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