एनसीआरबी ने खोली पोल, प्रदेश से लापता सैकड़ों बच्चों का पता लगाने में पुलिस हो रही है नाकाम

प्रदेश के 2903 बच्चों का अभी तक नहीं मिला सुराग, कई अपराधी गैंग के सक्रिय होने की आशंका
सैकड़ों लड़कियां भी हैं गायब, मानव तस्करी की ओर भी घूम रही शक की सुई
अभिभावकों को बच्चों की तलाश करने का भरोसा दे रही पुलिस

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। प्रदेश में हर साल सैकड़ों बच्चे लापता हो रहे हैं। इसमें काफी संख्या में बच्चे अपने घर वापस आ गए लेकिन अभी भी सैकड़ों बच्चों का सुराग लगाने में प्रदेश की पुलिस सफल नहीं हो पा रही है। पिछले वर्ष लापता हुए बच्चों में अभी भी 2903 बच्चों का पता नहीं चल सका है। ये कहां और किस हालत में है, इसकी कोई सूचना पुलिस के पास नहीं है। इन बच्चों में लड़कियों भी शामिल हैं। आशंका जताई जा रही है कि इतनी बड़ी तादाद में बच्चों के लापता होने के पीछे बच्चा चोर गैंग या फिर मानव तस्करी गैंग का हाथ हो सकता है। हालांकि पुलिस बच्चों की तलाश का भरोसा दे रही है। बावजूद लापता बच्चों के मां-बाप अपने लालों का इंतजार कर रहे हैं।
पूरे प्रदेश में पिछले वर्ष लगभग तीन हजार बच्चे ऐसे हैं जो अपनों से बिछडक़र दूर चले गये हैं और उनकी वापस आने की आस लेकर परिवार वाले आज भी उनका इंतजार कर रहे हैं। तमाम प्रयास के बाद भी उनके बच्चे वापस नहीं मिल रहे हैं। इनमें कई लड़कियां भी शामिल है जो अपने परिजनों से बिछड़ चुकी है। परिवार वालों ने उन्हें तलाशने की कोशिश की लेकिन कोई सफलता हासिल नहीं हुयी। इसका खुलासा हाल में आई एनसीआरबी की रिपोर्ट से हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक पूरे प्रदेश से लगभग तीन हजार बच्चे लापता हुये है और उनमें से कई वापस आ गये है मगर कई बच्चे आज तक अपने घर वापस नहीं आये। इस संबंध में प्रदेश पुलिस का कहना है कि जो बच्चे लापता हुये थे उनमें से अधिकांश वापस आ गये है और जो नहीं आये है उनकी भी तलाश की जा रही है। वे भी जल्द वापस आ जायेंगे। अपराधों का रिकार्ड रखने वाले एनसीआरबी की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2016 में पूरे देश से लगभग 63 हजार 407 बच्चे लापता हुये थे। इनमें 41 हजार 67 लड़कियां और 22 हजार 340 लडक़े शामिल थे। जहां तक उत्तर प्रदेश का सवाल है, यहां से भी गत वर्ष सैकड़ों बच्चे गायब हो चुके हैं। तमाम प्रयासों के बाद भी पुलिस को इनका सुराग नहीं लगा सकी है। रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में वर्ष 2016 में 29 सौ तीन बच्चे लापता हुये थे इनमें से चौदह सौ पांच लड़कियां और बाकी लडक़े हैं। इतने बच्चों के लापता होने के पीछे गैंग के सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है। कई बार बच्चों को बहला फुसला कर ले जाने के मामले भी सामने आ चुके हैं। ऐसी आशंका भी जताई जाती रही है कि प्रदेश में ऐसे अपराधी गैंग भी सक्रिय हैं जो छोटे बच्चों को उठाकर ले जाते हैं और उनसे बड़े शहरों में भीख मंगवाने का धंधा करवाते हैं। लापता बच्चों में सैकड़ों लड़कियां भी शामिल हैं। इससे मानव तस्करी की आशंका भी बढ़ गई है। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जब बच्चियों को अपराधी बहला फुसलाकर अपने साथ ले गए और उनको बड़े शहरों में बेच दिया। कई लड़कियों को जबरन देह व्यापार में ढकेलने की कोशिश भी की गई। ऐसा ही एक मामला हाल में सामने आया है। बाराबंकी निवासी एक शख्स ने वहीं की रहने वाली एक नाबालिक बालिका को पहले अपने प्रेम जाल मेंं फंसाया और फिर उसे अपने साथ ले गया। बाद में आरोपी अपनी पत्नी के साथ उसे दिल्ली लेजाकर बेच दिया। हालांकि बालिका अपनी सूझबूझ से बच गई और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने आरोपी पति पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है। इन घटनाओं ने बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं पुलिस तमाम बच्चों का पता लगाने में आज तक सफल नहीं हो पाई है।

एनसीआरबी की रिपोर्ट राज्यों की जनसंख्या के आधार पर बनाई जाती है। प्रदेश से बहुत से बच्चे लापता हुये थे जिनमें से अधिकांश को खोजकर उनके अभिभावकों के हवाले कर दिया गया है। शेष की खोजबीन जारी है। कई बार लोग गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में लिखवा देते हैं लेकिन जब बच्चा घर पहुंच जाता है तो इसकी सूचना नहीं देते हैं।

-सुलखान सिंह, डीजीपी
पिछले वर्ष लगभग तीन हजार बच्चे ऐसे हैं जो अपनों से बिछडक़र दूर चले गये हैं और उनकी वापस आने की आस लेकर परिवार वाले आज भी उनका इंतजार कर रहे हैं। तमाम प्रयास के बाद भी उनके बच्चे वापस नहीं मिल रहे हैं। इनमें कई लड़कियां भी शामिल हैं जो अपने परिजनों से बिछड़ चुकी हैं। परिवार वालों ने उन्हें तलाशने की कोशिश की लेकिन कोई सफलता हासिल नहीं हुयी। इसका खुलासा हाल में आई एनसीआरबी की रिपोर्ट से हुआ है।

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