आग, अस्पताल और मरीजों की सुरक्षा

सवाल यह है कि क्या राजधानी के तमाम अस्पतालों में आग से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं? क्या सरकारी व निजी अस्पताल आग से सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों को ताक पर रखकर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं? वे कौन सी वजहें हैं जिसके कारण एक छोटी सी चिंगारी अग्निकांड में तब्दील हो जाती है?

राजधानी लखनऊ का एक और अस्पताल आग की चपेट में आ गया। आनन-फानन में मरीजों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया गया। सूचना पर पहुंची फायर ब्रिगेड की गाडिय़ों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। यहां भर्ती मरीज और तीमारदार अभी भी दहशत में हैं। इस अग्निकांड ने मरीजों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। सवाल यह है कि क्या राजधानी के तमाम अस्पतालों में आग से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं? क्या सरकारी व निजी अस्पताल आग से सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों को ताक पर रखकर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं? वे कौन सी वजहें हैं जिसके कारण एक छोटी सी चिंगारी अग्निकांड में तब्दील हो जाती है? क्या आग से सुरक्षा के नाम पर अस्पतालों में लापरवाही बरती जा रही है? क्या अस्पतालों में हो रही आग की घटनाओं पर स्वास्थ्य विभाग को ध्यान देने की जरूरत नहीं है? राजधानी ही नहीं बल्कि प्रदेश के तमाम अस्पताल आग जैसी घटना से असुरक्षित है। अधिकांश अस्पतालों में न तो अलार्म की व्यवस्था है और न ही फायर फाइटिंग सिस्टम लगाए गए हैं। जहां सिस्टम लगे हैं, वे शोपीस बनकर रह गए हैं। अलार्म सिस्टम नहीं होने से छोटी सी चिंगारी भीषण अग्निकांड में तब्दील हो जाती है। यहां तैनात कर्मचारियों को फायर फाइटिंग सिस्टम को संचालित करने की जानकारी तक नहीं है। ऐसे में यदि अस्पताल में आग लग जाए तो इसको तुरंत नियंत्रित नहीं किया जा सकता है। यह हाल तब है जब अस्पताल को मान्यता देने के पहले संचालक से अग्नि सुरक्षा से संबंधित उपकरणों को लगाने की लिखित जानकारी ली जाती है। अस्पतालों का समय-समय पर निरीक्षण करने का प्रावधान है। सरकारी अस्पतालों की हालत और भी बदतर है। यहां सीज फायर उपकरण लगाए गए हैं। अधिकांश की तिथि एक्सपायर हो चुकी है। तमाम सीएचसी और पीएचसी में ये उपकरण भी नहीं हैं। अग्निकांड के दौरान सुरक्षा के अन्य उपायों पर भी ध्यान नहीं दिया गया है। अग्निकांड के दौरान मरीज को आसानी से अस्पताल से बाहर निकालने के लिए रैंप तक नहीं बनवाए गए हैं। कई अस्पतालों में निकास और प्रवेश का एक ही रास्ता है। साफ है अस्पतालों में अग्निकांड से मरीजों की सुरक्षा तभी सुनिश्चित हो सकती है जब स्वास्थ्य विभाग नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करे। साथ ही समय-समय पर उपकरणों और व्यवस्था का मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करे। यदि ऐसा नहीं किया गया तो ऐसी घटनाओं को रोकना मुश्किल होगा।

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