राष्ट्रीय एकता सम्मेलन में जुटे हजारों लोग, सभी ने भाईचारे को मजबूत करने का लिया संकल्प

पत्रकार संजय शर्मा ने कहा गाय जितनी प्यारी हिन्दुओं को उतनी प्यारी मुसलमानों को
कार्यक्रम में उमड़ी भारी भीड़, जिधर देखो उधर सिर ही सिर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी के रिफाह-ए-आम क्लब में मंगलवार को राष्ट्रीय एकता सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में मौजूद सभी धर्मों से ताल्लुक रखने वाले वक्ताओं ने शिक्षा के भगवाकरण, मंदिर-मस्जिद और गाय की राजनीति को सामाजिक माहौल बिगाडऩे का कारण बताया। सबने एक स्वर में कहा कि देश का हर नागरिक चाहता है कि समाज में अमन और शांति रहे। हर व्यक्ति पढ़े और हर परिवार का विकास हो लेकिन कुछ लोग अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए विवादित मुद्दों को हवा देने का काम करते हैं। ऐसे में सर्वसमाज को मिलकर एकजुटता की अलख जगानी होगी। सबको इकट्ठा होकर देश के विकास में योगदान करना होगा और समाज को बांटने की कोशिश में लगे लोगों को करारा जवाब देना होगा।
राष्ट्रीय एकता सम्मेलन में वरिष्ठ पत्रकार संजय शर्मा ने कहा कि मैंने पत्रकार होने के नाते बहुत से जलसे कवर किए हैं, लेकिन ऐसा अनुशासित जलसा पहली बार देखा है। आज नौजवान एकता की अलख जगाने को एकजुट हुए हैं। आजादी के दौर में एक नौजवान राम प्रसाद विस्मिल ने अलख जगाई तो अशफाक उल्ला खां उनके साथ खड़े हुए। देश ने देखा है कि जब पाकिस्तान ने हमला किया तो अब्दुल हमीद ने अपनी जान की परवाह न करते हुए सीमा की रक्षा की। देश की रग-रग में बसा है कि हम सब एक परिवार हैं। सूरज की पहली किरण जितनी तपिश हिन्दू के घर में देती है उतनी ही मुसलमान के घर में देती है। यह मुल्क हम सबका है, इसलिए कोई भी हमें अलग नहीं कर सकता। श्री शर्मा ने कहा कि यह वही लोग हैं, जो नफरत फैलाकर अपनी राजनीति चमकाना चाहते हैं, उन्हें मुसलमानों की शिक्षा से कोई मतलब नहीं है। यदि लोग शिक्षित होंगे, उन्हें डॉक्टर, इंजीनियर और आईएएस बनने का मौका मिलेगा तो स्वत: ही सारे विवादित मुद्दे खत्म हो जायेंगे। याद रहे हमारा देश बचेगा तो हम बचेंगे।
इस सम्मेलन में जमीयत उलमा ए हिंद के अध्यक्ष मौलाना मदनी ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि दुनिया की कोई भी शक्ति मुसलमानों के पर्सनल लॉ मे हस्तक्षेप नहीं कर सकती। इस देश में साम्प्रदायिक लोग कम हैं, इसलिए भावनाओं में बहकर नहीं होशमंदी से काम लें। यदि देश का भाग्य बदलना है तो प्यार और मोहब्बत को अपना दायित्व बनाना होगा। अशहद रसीदी ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को भगवा रंग में रंगना देश के हक में नहीं है, हमारा मुल्क सेक्युलर है। लेकिन कुछ चुनाव आते ही कुछ सियासी दल मंदिर-मस्जिद के मामले उठाकर अपनी फिजा बनाने का काम करते हैं। इस मौके पर नफरत का माहौल खत्म करने, वोटर लिस्ट सुधारने व शैक्षिक जागरूकता को लेकर 6 प्रस्ताव पारित किए गए।

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