क्या मणिशंकर अय्यर एपिसोड से बाकी नेता सबक सीखेंगे?

राजनीति में स्वस्थ माहौल में एक-दूसरे पर टीका-टिप्पणी करने की पुरानी परंपरा रही है। लेकिन अपने देश में नेताओं की भाषा कभी इस कदर गंदी हो जाएगी ये हमने सोचा नहीं था। कांग्रेस में अपने तुनकमिजाजी स्वभाव के लिए मशहूर मणिशंकर अय्यर व्यक्तिगत तौर पर मोदी को पसंद नहीं करते ये उनके चाय वाले बयान से ही साबित हो गया था। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार के पीछे पार्टी के कई नेता मणिशंकर अय्यर के उस बयान को भी बड़ा कारण मानते हैं।
लेकिन असली धमाका तो अभी होना बाकी था…मोदी के खिलाफ सार्वजनिक मंच पर नाराजगी जाहिर करने वाले मणिशंकर अय्यर ने उन्हें नीच बता डाला। मणिशंकर के बयान पर बीजेपी जहां आग-बबूला हो उठी वहीं मोदी ने सूरत में प्रचार के दौरान इसे गुजरात के बेटे का अपमान बता डाला। मोदी ने कहा- मुझे नीच बताने वाली कांग्रेस को गुजरात की जनता बैलेट से जवाब देगी। मणिशंकर के चाय वाले बयान से सबक सीख चुकी कांग्रेस ने बिना देर किए उन्हें पार्टी से निकाल बाहर किया। राहुल के दफ्तर ने बयान जारी कर कहा कि हम मणिशंकर के बयान की निंदा करते हैं और उनसे माफी मांगने को कहते हैं। अपने बयान पर मचे सियासी भूचाल के बाद मणिशंकर ने माफी मांगने की बात तो की लेकिन अपनी सफाई में कह डाला कि उनकी हिंदी तंग है और अंग्रेजी के शब्द का अनुवाद करते समय उनके मुंह से नीच निकल गया।
लेकिन क्या मणिशंकर ऐसे अकेले नेता हैं जो इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं। अगर मैं गलत नहीं हूं तो भारतीय राजनीति में जितना मजाक राहुल का उड़ाया गया उतना शायद ही किसी नेता के साथ हुआ हो। अभी पिछले हफ्ते पार्टी के लिए प्रचार करने गुजरात पहुंचे गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मुझे राहुल के दिमाग पर तरस आता है। क्या ये मर्यादित भाषा है? राहुल ने जब कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरा तो खुद प्रधानमंत्री मोदी ने मणिशंकर अय्यर के बयान का हवाला देकर उनकी तुलना औरंगजेब से कर डाली। मोदी ने गुजरात में चुनावी सभा में कहा- कांग्रेस को औरंगजेब राज मुबारक हो।
कांग्रेस को मर्यादा का पाठ सिखाने वाली बीजेपी के नेता खुद कितने मर्यादित हैं ये जगजाहिर है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह तो सोनिया पर नस्लभेद टिप्पणी कर चुके हैं। गिरिराज ने अपने बयान में कहा था, अगर राजीव गांधी कोई नाइजीरियन लेडी से ब्याह किए होते, गोरी चमड़ी न होती तो कांग्रेस पार्टी उसका नेतृत्व स्वीकारती क्या? क्या ये अभद्र भाषा नहीं है? मोदी सरकार में मंत्री बनने से पहले बिहार बीजेपी नेता अश्विनी चौबे भी मर्यादा लांघ चुके हैं। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया को राक्षसी पूतना और राहुल गांधी को विदेशी तोता कह डाला था। बीजेपी के एक नेता ने अपने फेसबुक अकाउंट पर अप्रत्यक्ष रुप से सोनिया को डायन बता दिया था। यूपी में चुनाव के दौरान प्रियंका को स्टार प्रचारक बनाने पर विनय कटियार ने कहा था कि प्रियंका को अगर चुनाव में सुंदरता के कारण आगे किया जा रहा है तो वैसे चेहरे हमारे पास भी हैं।
सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर कांग्रेस का मोदी सरकार पर सवाल उठाना फतेहपुर सीकरी से बीजेपी सांसद चौधरी बाबू लाल को इस कदर नागवार गुजरा कि उन्होंने राहुल के खिलाफ गंदी भाषा का इस्तेमाल कर डाला। बाबू लाल ने कहा, इन लोगों को किस चीज का सबूत चाहिए, सबूत तो राहुल गांधी के पास खुद नहीं है कि वो किसकी पैदाइश हैं। क्या बीजेपी ने अपने इस सांसद पर कोई कार्रवाई की?
यूपी में योगी सरकार में मंत्री बनने से पहले बीजेपी प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने एक बार राहुल को डायपर बेबी बता डाला था। राहुल पर हमला बोलते-बोलते सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा था राहुल की टिप्पणियां और उनका व्यवहार हमें याद दिलाता है कि वो अभी भी डायपर पहनने वाले ‘बेबी’ हैं। गलत बयानबाजी के लिए चर्चा में रहने वाले बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय राहुल को मनहूस बता चुके हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को आतंकियों की मौसी भी बता डाला। वहीं बिहार में मोदी के डीएनए वाले बयान को लेकर कितना बवाल मचा था ये भी सभी को मालूम है। 2015 में विधानसभा चुनाव के दौरन मुजफ्फरपुर की रैली में मोदी ने मांझी के बहाने नीतीश पर हमला बोलते हुए कहा था कि उनका डीएनए खराब है। तब नीतीश ने इसे बिहार की अस्मिता से जोडक़र बड़ा चुनावी मुद्दा बना डाला था।
सवाल उठता है अगर अभद्र टिप्पणी पर मणिशंकर पार्टी से बाहर निकाले जा सकते हैं तो फिर बीजेपी अपने उन नेताओं का क्या करेगी जो आए दिन राहुल के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करते हैं। बात किसी एक पार्टी की नहीं…कांग्रेस हो या बीजेपी या फिर दूसरी पार्टियां….हर जगह ऐसे नेताओं की भरमार है। उम्मीद की जानी चाहिए कि मणिशंकर अय्यर एपिसोड से बाकी के नेता सबक सीखेंगे?

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