भारत के खिलाफ चीन की चालबाजियों के संकेत

सवाल यह है कि चीन की दोहरी नीति की मंशा क्या है? क्या वार्ता के जरिए भ्रम उत्पन्न कर चीन भारत की पीठ में चाकू घोंपने की तैयारी कर रहा है? क्या रूस, भारत और चीन के बीच त्रिपक्षीय विदेश मंत्रियों की बैठक केवल दिखावा है? क्या चीन की इन चालबाजियों से निपटने को भारत तैयार है?

भारत के खिलाफ चीन अपनी चालबाजियों से बाज नहीं आ रहा है। एक ओर वह वार्ता की मेज पर भारत को साधने की कोशिश कर रहा है तो दूसरी ओर डोकलाम में सैनिकों का जमावड़ा बढ़ाता जा रहा है। सिक्किम-भूटान-तिब्बत सीमा पर स्थित डोकलाम में 1800 चीनी सैनिक जमे हैं। ये सैनिक यहां हेलीपैड, सडक़ और शिविरों का निर्माण कर रहे हैं। सवाल यह है कि चीन की दोहरी नीति की मंशा क्या है? क्या वार्ता के जरिए भ्रम उत्पन्न कर चीन भारत की पीठ में चाकू घोंपने की तैयारी कर रहा है? क्या रूस, भारत और चीन के बीच त्रिपक्षीय विदेश मंत्रियों की बैठक केवल दिखावा है? क्या चीन की इन चालबाजियों से निपटने को भारत तैयार है? दरअसल, डोकलाम पर चीन की नजरें गड़ी हुई हैं। वह भूटान को दबाव में लेकर यहां कब्जा करना चाहता है। पहले यहां हर वर्ष अप्रैल-मई और अक्टूबर-नवंबर में चीनी सैनिक आते थे लेकिन डोकलाम में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच टकराव खत्म होने के बाद पहली बार चीनी सैनिकों ने यहां अड्डा जमा लिया है। चीन के इस रवैए को ध्यान में रखते हुए भारत ने चुंबी वैली में अपने सैनिक तैनात कर दिए हैं। यह वैली सिक्किम और भूटान के बीच स्थित है। साथ ही चीनी सीमा तक अपने सैनिकों को आसानी से पहुंचाने के लिए भारत ने यहां सडक़ निर्माण का काम भी तेज कर दिया है। वहीं इन सबके बीच चीन भारत के साथ वार्ता भी कर रहा है। चीन, रूस और भारत के विदेश मंत्रियों ने बैठक में क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। हकीकत यह है कि डोकलाम को हासिल करने के लिए चीन भूटान को दबाव में लेना चाहता है। चूंकि विदेश नीति के मामले में भूटान भारत द्वारा संरक्षित है, इसलिए चीन की चाल सफल नहीं हो पा रही है। लिहाजा वह घुसपैठ की नीति पर चल रहा है। जहां तक चीन का भारत से वार्ता का सवाल है तो यह सार्थक साबित नहीं होने वाला है। आतंकवाद पर चीन की दोहरी नीति जारी है। चीन एशिया में शांति की बात करता है लेकिन पूरा विश्व जानता है कि उत्तर कोरिया उसके शह पर परमाणु परीक्षण जारी रखे हुए है और अमेरिका को तबाह करने की धमकी दे रहा है। आतंकवाद को खत्म करने की बात करने वाला चीन भारत में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ कुछ भी बोलने और करने को तैयार नहीं है। कुल मिलाकर वह भारत को वार्ता के भ्रम में रखकर अपने नापाक इरादों को पूरा करना चाहता है। हालांकि चीन को यह समझना चाहिए कि भारत उसकी किसी चालबाजी में नहीं आने वाला है। बावजूद इसके भारत को चीन से सावधान रहने की जरूरत है।

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