संविदा पर तैनात डॉक्टरों की मनमानी पर लगाम लगाने में नाकाम स्वास्थ्य विभाग, मरीज हलकान

स्थायी चिकित्सकों के मुकाबले दोगुना वेतन लेने के बाद भी लापरवाही कर रहे संविदा डॉॅक्टर
सीएमओ के आदेश भी हुए बेअसर, औचक निरीक्षण के बाद भी नहीं बदल रहे स्वास्थ्य केंद्रों के हालात
सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में अक्सर गायब मिलते हैं चिकित्सक, मरीज काट रहे चक्कर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। योगी सरकार के तमाम आदेशों के बावजूद राजधानी की चिकित्सा सेवा सुधरने का नाम नहीं ले रही है। हालत लगातार बद से बदतर होते जा रहे हैं। सबसे खराब हालत प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की है। यहां संविदा पर तैनात चिकित्सकों की मनमानी जारी है। वे न केवल समय से स्वास्थ्य केंद्रों पर नहीं पहुंचते है बल्कि मरीजों के इलाज में भी लापरवाही बरत रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम निरीक्षण कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रही है। सीएमओ के तमाम आदेश भी संविदा पर तैनात चिकित्सकों पर बेअसर हो चुके हैं। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। मरीज इन चिकित्सा केंद्रों पर इलाज के लिए चक्कर काटते और डॉक्टर का इंतजार करते नजर आते हैं। यह स्थिति तब है जब संविदा पर तैनात डॉक्टरों को स्थायी चिकित्सकों से अधिक वेतन मिलता है।
राजधानी के तमाम सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी है। तमाम पद खाली पड़े हैं। रिक्त पदों के प्रकाशन के बावजूद अभी तक पर्याप्त संख्या में आवेदन नहीं आ रहे हैं। इस कमी को पूरा करने और लोगों को चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के लिए सरकार ने संविदा पर चिकित्सकों की तैनाती की योजना चला रखी है। राजधानी के स्वास्थ्य केंद्रों पर कुल 196 संविदा चिकित्सकों की तैनाती है। अस्पतालों में तैनात संविदा चिकित्सकों का वेतन स्थायी चिकित्सकों के मुकाबले दो गुना है। स्थायी रूप से तैनात गायनकोलॉजिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ, एनेस्थेटिस्ट समेत विशेषज्ञों का वेतन जहां 60000 है वहीं संविदा पर तैनात चिकित्सकों का वेतन एक लाख के करीब है। अधिकारियों के मुताबिक सरकारी अस्पताल में सेवा देने के लिए डॉक्टर मिल ही नहीं रहे। इसलिए संविदा पर चिकित्सकों की तैनाती की गई है। यही नहीं एक लाख तक का वेतन के बावजूद डॉक्टर सरकारी अस्पतालों को छोड़ रहे है। ये संविदा चिकित्सक अपने तैनाती स्थल पर मनमानी कर रहे हैं। अधिकांश स्वास्थ्य केंद्रों पर यह समय से नहीं पहुंचते हैं। यही नहीं कई बार मरीज के इलाज में लापरवाही की घटनाएं भी प्रकाश में आ चुकी हैं। पिछले माह चंदरनगर सीएचसी की एक डॉक्टर पर इलाज के दौरान लापरवाही का आरोप लगा था। इसके कारण जच्चा-बच्चा की मौत हो गई थी। वहीं सरोजिनीनगर सीएचसी में ड्यूटी से डॉक्टर गायब मिले थे। यहां इलाज में देरी के कारण एक नवजात की मौत हो गई थी। हालांकि स्वास्थ्य विभाग चिकित्सा सेवाओं को दुरुस्त करने के लिए समय-समय पर स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण करता रहता है, लेकिन इसका भी इन संविदा डॉक्टरों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने निरीक्षण के दौरान कई सीएचसी और पीएचसी से चिकित्सकों को ड्यूटी से नदारद पाया था। इस मामले में सीएमओ कार्यालय से कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया। यही नहीं कई अनुपस्थित चिकित्सकों का एक दिन का वेतन भी काटा गया। बावजूद डॉक्टरों की मनमानी में अंकुश नहीं लग सका है। इन पर सीएमओ के आदेश भी बेअसर हो चुके हैं। यह स्थिति तब है जब योगी सरकार ने मरीजों को गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्य सेवाओं को उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश दे रखे हैं। चिकित्सक इलाज में लापरवाही बरतने से बाज नहीं आ रहे हैं। इससे सबसे ज्यादा परेशानी गरीब मरीजों को हो रही है। वे निजी अस्पतालों में महंगे इलाज नहीं करा सकते, लिहाजा चिकित्सकों की मनमानी का शिकार हो रहे हैं। चिकित्सकों की उपस्थिति नहीं होने के कारण वे रोजना इन केंद्रों पर चक्कर काटते नजर आते हैं।

चिकित्सा व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए समय-समय पर अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण किया जाता है। शिकायत मिलने पर संबंधित चिकित्सकों के खिलाफ जरूरी कार्रवाई की जाती है।
-डॉ. जीएस बाजपेई, सीएमओ

ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात संविदा डॉक्टर
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ – 10
लेडी मेडिकल ऑफिसर – 8
बाल रोग विशेषज्ञ – 8
आयुष डॉक्टर – 52
योग – 4
ब्लड बैंक के लिए – 3 मेडिकल ऑफिसर
राष्टï्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत – 32 मेडिकल ऑफिसर

नगरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात संविदा डॉक्टर
एनेस्थेटिस्ट – 4
बाल रोग विशेषज्ञ – 5
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ – 7

52 नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनाती
पार्ट टाइम मेडिकल ऑफिसर – 24
फुल टाइम मेडिकल ऑफिसर – 39

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