सात जिलों में ग्राम पंचायतों की चारागाह भूमि को विकसित करने के निर्देश

मनरेगा योजना के प्राविधानों के तहत किया जायेगा विकास

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राज्य सरकार ग्राम पंचायतों की चारागाह के लिए निर्धारित भूमि को गोचर क्षेत्र के रुप में विकसित करेगी। इसके लिए प्रदेश के साथ जिलों के डीएम को आवश्यक कार्यवाही करने के लिए निर्देशित किया गया है। निर्देशों में कहा गया है कि मनरेगा योजना के निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप होने की स्थिति तक ग्राम पंचायतों में बनी चारागाहों में बाड़ लगवाकर गोचर भूमि विकसित करने अथवा पशु आश्रय बनवाने का काम किया जा सकता है।
प्र्रमुख सचिव, ग्राम्य विकास अनुराग श्रीवास्तव की ओर से महोबा, बांदा, चित्रकूट, ललितपुर, जालौन, झांसी एवं हमीरपुर के जिलाधिकारियों को भेजे शासनादेश में कहा गया है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के अनुसार मनरेगा एवं डेयरी तथा पशुपालन विभाग के मध्य कनवर्जेन्स के अंतर्गत भूमि विकास, चारागाह एवं घेराबंदी को मनरेगा के तहत अनुमन्य कार्यों की श्रेणी में रखा गया है। पशुधन संवर्धन के लिए अवसंरचना का निर्माण जैसे-पशु आश्रय चारा खिलाने का स्थान आदि को अनुमन्य कार्य श्रेणी में सम्मिलित किया गया है। शासनादेश में यह भी कहा गया है कि चूंकि मनरेगा योजना अधिनियम आधारित है, इसलिए कार्य की मांग के आधार पर स्वीकृत श्रम बजट के सापेक्ष उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का उपयोग योजना के तहत निर्धारित मानकों के अनुरूप किए जाने का प्रावधान है। अत: मनरेगा योजना के निर्धारित प्रावधानों के अनुरुप होने की स्थिति तक ग्राम पंचायतों में स्थित चारागाहों में बाड़ लगवाकर गोचर भूमि विकसित अथवा पशु आश्रय बनाए जा सकते हैं।

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