क्या नरेंद्र मोदी से ज्यादा भीड़ खींच रहे हैं हार्दिक पटेल

हार्दिक किसानों की परेशानी और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर बात कर रहे हैं, जिनसे गांव के युवाओं का सीधा जुड़ाव है क्योंकि उन्हें लगता है कि खेती में ज्यादा मुनाफा नहीं है और नौकरियां उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए ये लोग हार्दिक पटेल का समर्थन कर रहे हैं। वहीं प्रधानमंत्री मोदी में लोगों की दिलचस्पी खत्म हो रही है। एक मौके पर तो मोदी को दक्षिण गुजरात में अपनी रैली की जगह भी बदलनी पड़ी।

गुजरात में 9 दिसंबर को पहले चरण का मतदान होना है। चुनावी प्रचार जोरों पर है। रैलियों पर रैलियां हो रही हैं। लेकिन एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों में कम लोग पहुंच रहे हैं, वहीं हार्दिक पटेल को सुनने के लिए काफी भीड़ उमड़ रही है। राजकोट के पत्रकार कीर्तिसिंह जाला ने बताया कि तीन दिसंबर को प्रधानमंत्री मोदी की राजकोट में रैली हुई थी, जो मुख्यमंत्री विजय रूपानी का गृह जिला है। लेकिन रैली में उतने लोग नहीं आए जितने पिछले हफ्ते हार्दिक पटेल की रैली में पहुंचे थे। उनके मुताबिक, हार्दिक की रैली में आने वाले अपना पैसा खर्च करके उन्हें सुनने आ रहे हैं जबकि भारतीय जनता पार्टी को लोगों को आने-जाने की सुविधा देनी पड़ रही है ताकि लोग प्रधानमंत्री मोदी की रैली में आ सकें। जानकार बताते हैं कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि हार्दिक उन मुद्दों पर बात करते हैं जिनसे लोगों का सीधा सरोकार है। हार्दिक और प्रधानमंत्री मोदी की रैली में मौजूद रहे एक और वरिष्ठ पत्रकार दर्शन देसाई का कहना है, हार्दिक किसानों की परेशानी और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर बात कर रहे हैं, जिनसे गांव के युवाओं का सीधा जुड़ाव है क्योंकि उन्हें लगता है कि खेती में ज्यादा मुनाफा नहीं है और नौकरियां उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए ये लोग हार्दिक पटेल का समर्थन कर रहे हैं। वहीं प्रधानमंत्री मोदी में लोगों की दिलचस्पी खत्म हो रही है। एक मौके पर तो मोदी को दक्षिण गुजरात में अपनी रैली की जगह भी बदलनी पड़ी। मैंने पहले जमाने में पीएम मोदी की वो रैलियां भी देखी हैं जिनमें जबरदस्त भीड़ उमड़ती थी और अब ये रैलियां भी देख रहा हूं जिनमें लोग नहीं पहुंच रहे। पिछले दिनों हार्दिक पटेल ने सूरत में एक बड़ा रोड शो किया जिसमें छह विधानसभा चुनाव क्षेत्र का दौरा किया और उसके बाद सूरत के किरण चौक में एक रैली की। सूरत के वरिष्ठ पत्रकार फैसल बकीली ने बताया कि, हार्दिक का यह रोड शो 25 किलोमीटर लंबा था, जिसके बाद उन्होंने सूरत में एक रैली की। ऐसा पहले किसी ने नहीं किया था। सडक़ पर खड़े होने की जगह भी नहीं थी। और उसी दिन यानी रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने भी भरूच में एक रैली की जिसमें कुर्सियां खाली पड़ी थीं। इसी से सब पता चल जाता है। हार्दिक की रैली में आने वाली भारी भीड़ से पता चलता है कि पाटीदार भाजपा से कितने नाराज हैं। लेकिन भारतीय जनता पार्टी को ऐसा नहीं लगता कि उनकी रैलियों में कम लोग पहुंच रहे है। पार्टी प्रवक्ता यमल व्यास ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और हार्दिक पटेल के बीच कोई मुकाबला नहीं है। नरेंद्र मोदी इस देश के सबसे बड़े नेता हैं और हम उनकी रैली में पहुंच रहे लोगों की संख्या से संतुष्ट हैं। इससे पार्टी का माहौल भी काफी सकारात्मक हुआ है। यमल व्यास के मुताबिक दक्षिण गुजरात में पीएम मोदी की रैली की जगह सुरक्षा कारणों से बदली गई थी।

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