सौर ऊर्जा नीति विकास और भविष्य

सवाल यह है कि नई सौर ऊर्जा नीति का प्रदेश के विकास और बिजली की खपत पर कितना असर पड़ेगा? क्या इस नीति से निकट भविष्य में रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे? क्या सौर ऊर्जा के प्रयोग से राजधानी समेत प्रदेश के विभिन्न शहरों में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण स्तर पर नियंत्रण लग सकेगा?

प्रदेश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार ने नयी नीति को मंजूरी दी है। योजना को अमली जामा पहनाने के लिए प्रदेश में दस हजार प्रशिक्षित सूर्य मित्रों की तैनाती की जाएगी। सोलर पैनल पर 30 हजार तक के अनुदान का भी प्रावधान है। पहले चरण में 10700 मेगावाट सौर ऊर्जा के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा सरकार बुंदेलखंड में सोलर पार्क बनाने जा रही है। सवाल यह है कि नई सौर ऊर्जा नीति का प्रदेश के विकास और बिजली की खपत पर कितना असर पड़ेगा? क्या इस नीति से निकट भविष्य में रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे? क्या सौर ऊर्जा के प्रयोग से राजधानी समेत प्रदेश के विभिन्न शहरों में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण स्तर पर नियंत्रण लग सकेगा? क्या आम आदमी की ऊर्जा जरूरतों को यह योजना पूरी कर पाएगी? दरअसल, पूरे विश्व मेंं पेट्रोलियम पदार्थों के भंडार लगातार कम होते जा हैं। लिहाजा वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत तलाशे जाने लगे हैं। इसमें सौर ऊर्जा को कभी खत्म न होने वाला माना जाता है। इस ऊर्जा स्रोत पर जोर देने की एक बड़ी वजह इसका प्रदूषण रहित होना भी है। पेट्रोलियम पदार्थों के प्रयोग से वातावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है। कोयले से उत्पादित बिजली से भी प्रदूषण बढ़ रहा है। वहीं कोयले के भंडार भी कम होते जा रहे हैं। लिहाजा वैकल्पिक ऊर्जा ही भविष्य की जरूरतों को पूरा कर सकेगी। जहां तक प्रदेश में सौर ऊर्जा के उत्पादन का सवाल है, यहां का मौसम इसके अनुकूल है। यहां वर्ष में कम से 10 माह पर्याप्त मात्रा में धूप निकलती है। लिहाजा सोलर पैनल के जरिए सौर ऊर्जा आसानी से उत्पन्न की जा सकती है। इसका असर बिजली की मांग पर पड़ेगा। यह आम आदमी के लिए भी फायदे का सौदा है। सोलर पैनल के जरिए उत्पादित ऊर्जा के एवज में उसे किसी प्रकार के बिल का भुगतान सरकार को नहीं करना पड़ेगा। दूसरी ओर इन पैनलों को लगाने के लिए प्रशिक्षित लोगों की जरूरत पड़ेगी। जैसे-जैसे सौर ऊर्जा का प्रयोग बढ़ेगा, यह क्षेत्र रोजगार का एक नया साधन बन जाएगा। सौर ऊर्जा के प्रयोग का असर प्रदूषण पर भी पड़ेगा। परियोजना के लागू होने से करीब 1 करोड़ टन से अधिक कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन को रोका जा सकेगा। बावजूद इसके योजना को अमलीजामा पहनाने में सरकार को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी। महंगे सौर पैनलों को लगवाना आम आदमी के लिए मुश्किल साबित होगा। केवल सब्सिडी के भरोसे सरकार अपनी योजना को जमीन पर नहीं उतार सकती है। इसके लिए इसे सस्ते और टिकाऊ सोलर पैनलों के निर्माण पर भी ध्यान देना होगा।

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