स्वास्थ्य विभाग के दावों की खुली पोल, प्रसूताओं को नहीं मिल रहा जननी सुरक्षा योजना का लाभ

संस्थागत प्रसव को लगा झटका, राजधानी में तीस प्रतिशत महिलाएं लाभ से वंचित
मलिन बस्तियों की प्रसूताओं भी नहीं मिल रहा लाभ, बैंक खाता भी बना राह का रोड़ा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। एक ओर सरकार गर्भवतियों को बेहतर सुविधाएं देने के दावे कर रही है वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण जननी सुरक्षा योजनाओं का लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि संस्थागत प्रसव कराने वाली गर्भवती को सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ मिल रहा है जबकि आंकड़े इसके दावों की पोल खोल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के 2016-17 व 2017-18 के आंकड़ों के मुताबिक राजधानी के सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने वाली 30 प्रतिशत प्रसूताओं को जननी सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाली धनराशि नहीं मिली है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और बैंक खाता नहीं होने के कारण प्रसूताओं को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं सबकुछ जानते-बूझते स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने प्रसूताओं को प्रोत्साहन राशि देने की योजना चला रखी है। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 1400 और शहरी क्षेत्र की महिलाओं को 1000 की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। इस योजना में स्वास्थ्य विभाग ही पलीता लगाने में जुटा है। राष्टï्रीय स्वास्थ्य मिशन के हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉमेशन सिस्टम के मुताबिक 2016-17 में जनपद के सरकारी अस्पतालों में 53572 संस्थागत प्रसव कराए गए हैं जिसमें से केवल 38910 प्रसूताओं को ही जननी सुरक्षा योजना का लाभ मिला है। वहीं 2017-18 में जनपद में कुल 30773 प्रसव हुए हैं। इनमें से कुल 22433 प्रसूताओं को ही जननी सुरक्षा योजना की राशि मिल सकी है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही भी प्रसूताओं को सरकारी योजनाओं से मिलने वाले लाभ में रोड़ा बन रही है। वहीं चंदरनगर बाल महिला अस्पताल में बीते कई माह से डाटा एंट्री ऑपरेटर न होने से प्रसूताओं के जननी सुरक्षा योजना के फार्म ही नहीं भरे गए, जिसके कारण 2016-17 में यहां हुए 286 प्रसव में से केवल 99 (35 प्रतिशत) प्रसूताओं को ही योजना का लाभ मिल सका। वहीं 65 प्रतिशत प्रसूताओं को स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से जेएसवाई का लाभ नहीं मिल सका। इसके अलावा प्रसूताओं के आधार कार्ड और बैंक खाता नहीं होने से भी जननी सुरक्षा योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। शांतिनगर के नफीस की पत्नी सितारा को 22 नवंबर को क्वीनमेरी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्होंने सामान्य प्रसव से नवजात को जन्म दिया। लेकिन उन्हें जननी सुरक्षा योजना का लाभ इसलिए नहीं मिल पाया कि उनके पास न तो आधार कार्ड है न ही किसी बैंक में खाता है। वहीं महमूदाबाद के राजेश की पत्नी सीमा को 21 नवंबर को क्वीनमेरी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने सिजेरियन द्वारा नवजात को जन्म दिया। सीमा के पास भी न तो आधार कार्ड है न बैंक खाता है। जेएसवाई का फॉर्म मिलने के बाद भी खाता न होने के कारण वे फॉर्म नहीं भर सकीं।

खाते के अभाव में नहीं मिल पा रहा लाभ: डॉ. अजय राजा

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय राजा के मुताबिक अधिकतर ऐसी प्रसूताएं ही जेएसवाई के लाभ से वंचित रह जाती हैं जिनका बैंक खाता या आधार कार्ड नहीं होता। जिला अस्पतालों में अधिकतर जिले के बाहर के मामले आते हैं। इनमें अधिकतर ऐसी ग्रामीण महिलाएं या शहरी क्षेत्र के मलिन बस्तियों की महिलाएं होती हैं जिनके पास बैंक खाता होता ही नहीं है, जिसके कारण यह प्रसूताएं जेएसवाई का लाभ नहीं उठा पातीं। वहीं कुछ ऐसी भी महिलाएं होती हैं जो दूर-दराज से आती हैं और उनके पास समय पर कागज नहीं होते। एक बार वापस जाने के बाद वे जेएसवाई के लिए क्लेम नहीं करतीं। प्रसव के एक साल के भीतर कोई भी प्रसूता अस्पताल आकर योजना के पैसों के लिए क्लेम कर सकती है।

जिला अस्पतालों का हाल सबसे खराब
जननी सुरक्षा योजना का लाभ देने में सबसे खराब स्थिति राजधानी के जिला अस्पतालों का है। डफरिन, क्वीनमेरी, लोकबंधु और साढ़ामऊ समेत सभी जिला अस्पतालों में केवल 40 से 60 प्रतिशत प्रसूताओं को ही जननी सुरक्षा योजना का लाभ मिल सका है। जनपद के 10 जिला अस्पतालों में 2016-17 में 16298 प्रसव कराए गए हैं, जिनमें से केवल 10736 प्रसूताओं को ही जननी सुरक्षा योजना का लाभ मिल सका है। यहां 34 प्रतिशत प्रसूताओं को जननी सुरक्षा योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

Pin It