लचर चिकित्सा सेवाएं, आम आदमी और सरकार

सवाल यह है कि लचर स्वास्थ्य सेवाओं की वजहें क्या हैं? चिकित्सक और कर्मचारी अपने कर्तव्यों का पालन करने में लापरवाही क्यों बरत रहे हैं? सरकार के तमाम निर्देशों का चिकित्सकों पर असर क्यों नहीं पड़ रहा है? क्या स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नई स्वास्थ्य नीति बनाने की जरूरत है?

तमाम कवायदों के बावजूद प्रदेश की चिकित्सा सेवा में सुधार आता नहीं दिख है। राजधानी समेत विभिन्न जिलों के सरकारी अस्पतालों की हालत खराब है। यहां इलाज के लिए मरीजों को घंटों लाइन में लगना पड़ता है। अधिकांश चिकित्सक और कर्मचारी समय से अस्पताल नहीं पहुंचते हैं। इसके अलावा दवाओं और जांच की सुविधा तक मरीजों को उपलब्ध नहीं हो पा रही है। लापरवाही के कारण तमाम चिकित्सा योजनाओं का लाभ मरीजों को नहीं मिल रहा है। यह हाल तब है जब प्रदेश के मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने के कड़े निर्देश दिए हैं। सवाल यह है कि लचर स्वास्थ्य सेवाओं की वजहें क्या हैं? चिकित्सक और कर्मचारी अपने कर्तव्यों का पालन करने में लापरवाही क्यों बरत रहे हैं? सरकार के तमाम निर्देशों का चिकित्सकों पर असर क्यों नहीं पड़ रहा है? क्या स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नई स्वास्थ्य नीति बनाने की जरूरत है? गरीब आदमी को गुणवत्तायुक्त इलाज उपलब्ध कराने का सरकार का लक्ष्य कब पूरा होगा? दरअसल, पूरे देश में सरकारी चिकित्सा सेवाओं में लगातार गिरावट आ रही है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत यहां के तमाम जिलों के सरकारी अस्पतालों में अव्यवस्था का आलम है। अधिकांश अस्पतालों में मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। अस्पतालों में दवाओं की हमेशा कमी रहती है। कई अस्पतालों में टीकाकरण के लिए वैक्सीन तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। सबसे खराब हालत प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की है। यहां न तो समय पर चिकित्सक और न ही पैरामेडिकल कर्मचारी पहुंचते हैं। इसके कारण मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। चिकित्सक अगर किसी तरह मिल भी जाएं तो जांच और दवाओं के लिए मरीजों को अस्पताल के कई-कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। प्रतिबंध के बावजूद कई चिकित्सक निजी प्रैक्टिस में लिप्त है। इसके कारण वे अस्पतालों में मरीजों को समय नहीं दे रहे हैं। यही नहीं अस्पतालों में चिकित्सकों की भारी कमी है। कई अस्पतालों से चिकित्सक छोडक़र जा रहे हैं। इसके अलावा अस्पतालों में पैरामेडिकल स्टाफ की भी कमी हैं। इसका खामियाजा गरीब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। सरकार यदि वाकई गरीबों को गुणवत्तायुक्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना चाहती है तो उसे पूरे चिकित्सा सिस्टम को बदलना होगा। स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त भ्रष्टïाचार को खत्म करना होगा। साथ ही चिकित्सकों की कमी को जल्द से जल्द समाप्त करना होगा।

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