भारतीय कूटनीति, चाबहार पोर्ट और पाकिस्तान

सवाल यह है कि चाबहार पोर्ट के निर्माण से भारत को क्या फायदे होंगे? क्या पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान पर इसका असर पड़ेगा? क्या पोर्ट के संचालित होने पर भारतीय अर्थव्यवस्था को पंख लग सकेंगे? क्या देश की सैन्य ताकत पर भी इसका कोई खास असर पड़ेगा?

भारत की आर्थिक मदद से तैयार चाबहार पोर्ट के पहले चरण का ईरान के राष्टï्रपति डॉक्टर हसन रोहानी ने उद्घाटन कर दिया है। इस मौके पर भारत के जहाजरानी राज्य मंत्री पी राधाकृष्णन और अन्य मंत्रालयों के अधिकारी भी मौजूद थे। पोर्ट के तैयार हो जाने के बाद भारत की सीधी पहुंच अफगानिस्तान समेत पश्चिमी व मध्य एशिया तक हो जाएगी। पहले चरण के लिए भारत ने 50 करोड़ डॉलर की मदद की है। सवाल यह है कि चाबहार पोर्ट के निर्माण से भारत को क्या फायदे होंगे? क्या पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान पर इसका असर पड़ेगा? क्या पोर्ट के संचालित होने पर भारतीय अर्थव्यवस्था को पंख लग सकेंगे? क्या देश की सैन्य ताकत पर भी इसका कोई खास असर पड़ेगा? दरअसल, पूरे मध्य एशिया में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए भारत ने पिछले वर्ष अफगानिस्तान और ईरान के साथ चाबहार पोर्ट को विकसित करने के लिए समझौता किया था। भारत के प्रयत्नों के कारण चाबहार पोर्ट का एक चरण का काम पूरा हो चुका है। तीनों देशों की सरकारों ने पोर्ट को संचालित करने के लिए इससे संबंधित कानूनों को पारित करने पर भी सहमति दे दी है। दूसरे चरण में पोर्ट से जुड़े सडक़ व रेल नेटवर्क का काम तेजी से शुरू होने जा रहा है। इसके लिए जल्द भारत आर्थिक मदद का ऐलान करेगा। इस पोर्ट के बन जाने से अफगानिस्तान, मध्य एशियायी देशों और रूस तक भारत की पहुंच आसान हो जाएगी। इसका सीधा फायदा आर्थिक क्षेत्र पर पड़ेगा। तीनों देशों का एक व्यापारिक त्रिकोण तैयार होगा, जो एक-दूसरे के यहां आयात-निर्यात के नियमों में ढील देकर आपसी व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा देंगे। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था का तेजी से विकास हो सकेगा। इसके अलावा पोर्ट के जरिए कम खर्च पर भारत कच्चे तेल का आयात कर सकेगा। इसका देश में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों पर असर पड़ेगा। डीजल-पेट्रोल की कमी का असर मालभाड़े पर पड़ेगा, जिससे कारण खाद्य और सब्जियों के दामों में भी गिरावट आने की संभावना बढ़ जाएगी। भारत इस पोर्ट के साथ एक विशेष आर्थिक क्षेत्र भी विकसित करना चाहता है। भारत की योजना चाबहार पोर्ट में कुल दो लाख करोड़ निवेश करने की है। वहीं, इस पोर्ट से भारत, चीन और पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से घेरने में भी सफल रहेगा। चाबहार पोर्ट से महज 72 किमी की दूरी पर ग्वादर पोर्ट है। इसका निर्माण चीन ने पाकिस्तान की सहायता से की है। जाहिर है चीन और पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ा कूटनीतिक झटका है। कुल मिलाकर चाबहार पोर्ट से न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी बल्कि वह अपने दुश्मनों पर उनके घर में घुस निगरानी करने में सफल रहेगा।

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