साइबर अपराधियों पर शिकंजा कसने में नाकाम साइबर सेल

रोजाना एक दर्जन से अधिक दर्ज हो रहे हैं मामले
विशेषज्ञों की कमी ने बढ़ाई मुसीबत पुराने ढर्रे पर चल रहा सेल

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। विभोरखण्ड गोमतीनगर के रहने वाले सेवानिवृत्त अधिकारी प्रभात कुमार सिंह के स्टेट बैंक के खाते से 49 हजार रुपये साइबर जालसाजों ने निकाल लिए जबकि आशियाना के रश्मि खंड के रहने वाले सलिल मोहन श्रीवास्तव से अस्सी हजार ठग लिए गए। वहीं निरालानगर की रहने वाली छात्रा से पेटीएम के माध्यम से ढाई हजार रुपये की ठगी कर ली गई। ये कुछ बानगियां साबित कर रही है कि राजधानी में साइबर अपराधों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। राजधानी में बने साइबर सेल में प्रतिदिन दस से बारह साइबर अपराध के मामले दर्ज किए जा रहे हैं। बावजूद इसके अपराधियों पर शिकंजा कसने में साइबर सेल नाकाम साबित हो रहा है।
जी हां, अगर आप किसी भी प्रकार का लेन-देन कर रहे हैं तो सावधानी से करिये क्योंकि यहां साइबर अपराध तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। इन साइबर अपराधियों की ठगी का तरीका इतना शातिराना होता है कि जब तक सामने वाला कुछ समझ पाता है उसकी गाढ़ी कमाई लुट जाती है। ऐसी ही घटना विभोरखण्ड के रहने वाले प्रभात कुमार सिंह से साथ घटी। ठगों ने इनको झांसे में लेकर इनके खाते से 49 हजार रुपये निकाल लिए। अपने साथ हुई ठगी की जानकारी इन्हें तब हुई जब इनके मोबाइल पर बैंक से पैसे निकलने का मैसेज आया। उन्होंने बैंक पहुंचकर अपना एटीएम बन्द कराया और इसकी सूचना साइबर सेल को दी। मामला दर्ज करने के बाद उन्हें हजरतगंज कोतवाली में मामला दर्ज कराने भेजा गया।
वहीं आशियाना के रश्मिीखंड निवासी सलिल मोहन श्रीवास्तव को ठगों ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे करीब अस्सी हजार ठग लिए। श्रीवास्तव ने पुलिस को बताया कि खाते में पैसा जमा कराने के बाद भी जब काम नहीं हुआ तो उन्होंने ठगों द्वारा बताए गए गुडग़ांव के पते पर संपर्क करने पहुंचे। उनके पैरों तले से जमीन तब खिसक गई जब वह गुडग़ांव के पते पर पहुंचे। वहां पता फर्जी निकला। इसकी सूचना उन्होंने साइबर क्राइम सेल को दी। सेल ने उनके साथ हुई ठगी की घटना को नोट कर पीजीआई थाने में उनका मामला दर्ज करवा दिया। साइबर ठग कितने हावी हो गए हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब वह पढऩे लिखने वाले बच्चों को भी अपना निशाना बनाने में नहीं चूक रहे हैं। राजधानी स्थित साइबर सेल में प्रतिदिन 10 से बारह शिकायतें दर्ज हो रही हैं। ऐसा नहीं है कि साइबर सेल इन घटनाओं के खुलासे के लिए गंभीर नहीं है मगर पुलिस पुराने तरीकों से हाईटेक और संसाधन से लैस अपराधियों से निपटने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। हाल यह है कि नेट बैंकिंग के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी का खुलासा करने के लिए गठित साइबर सेल भारी अव्यवस्थाओं से गुजर रहा है।
एक तरफ इस तरह से धोखधड़ी करने वाले आये दिन नए-नए हथकंडे अपना कर लोगों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल रहे हैं। वहीं राजधानी में स्थित साइबर सेल आज भी 2012 के सॉफ्टवेयर पर चल रहा है। सूत्रों का कहना है कि यहां पर तैनात अधिकारियों ने कई बार इस मामले की जानकारी उच्चस्तर पर दी लेकिन इसमें आज तक कोई सुधार नहीं हो सका है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि साइबर सेल में जो घटनाएं नोट की जाती है इनको वहां पर सिर्फ नोट कर लिया जाता है। इसके बाद जिस थाना क्षेत्र में घटना घटित होती है वहां पर एफआईआर दर्ज करा दी जाती है। इन घटनाओं की कायदे से विवेचना तक नहीं हो पा रही है, लिहाजा साइबर अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।

ऑनलाइन शॉपिग का चलन बढ़ते से ऐसी घटनाओं में इजाफा हुआ है। ऐसी घटनाओं पर नियंत्रण लगाने के लिए एक्सपर्ट पुलिसिंग की जरूरत है। साइबर सेल में एक इंस्पेक्टर स्तर का अधिकारी नियुक्त किया गया है। यह अधिकारी ऐसे केस की विवेचना कर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं।
जय नारायण सिंह, आईजी रेंज लखनऊ

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