साइबर क्राइम, जनता और पुलिस तंत्र

सवाल यह है कि साइबर अपराधों की संख्या में इजाफे की क्या वजहें हैं? हाईटेक अपराधियों पर शिकंजा कसने में पुलिस नाकाम क्यों हो रही है? अधिकांश मामले दर्ज होने के बाद ठंडे बस्ते में क्यों डाल दिए जाते हैं? क्या डिजिटल साधनों के बारे में जानकारी का अभाव साइबर क्राइम को बढ़ाने में मददगार साबित हो रहा है? साइबर क्राइम पर नियंत्रण लगाने के लिए बनाए गए साइबर सेल क्या कर रहे है?

प्रदेश में साइबर क्राइम का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक विभिन्न राज्यों की तुलना में यूपी में सबसे अधिक साइबर क्राइम की घटनाएं घटी हैं। गत वर्ष यहां ऐसे करीब 2639 मामले दर्ज किए गए हैं। सवाल यह है कि साइबर अपराधों की संख्या में इजाफे की क्या वजहें हैं? हाईटेक अपराधियों पर शिकंजा कसने में पुलिस नाकाम क्यों हो रही है? अधिकांश मामले दर्ज होने के बाद ठंडे बस्ते में क्यों डाल दिए जाते हैं? क्या डिजिटल साधनों के बारे में जानकारी का अभाव साइबर क्राइम को बढ़ाने में मददगार साबित हो रहा है? साइबर क्राइम पर नियंत्रण लगाने के लिए बनाए गए साइबर सेल क्या कर रहे है? दरअसल, डिजिटलाइजेशन ने पूरी दुनिया को साइबर वल्र्ड में तब्दील कर दिया है। यह वर्चुअल हो चुकी है। इसने नए तरह के अपराध का रास्ता भी खोल दिया है। पूरी दुनिया साइबर अपराधियों की जद में है। जहां तक यूपी का सवाल है, यहां साइबर क्राइम का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। साइबर सेल में अधिकांश शिकायतें ठगी, यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग की आ रही हैं। सच यह है कि साइबर अपराध की असली वजह डिजिटल साधनों के प्रयोग की सही जानकारी न होना है। इसके अलावा ऐसे मामलों में अपराधी का पता लगाना बेहद मुश्किल होता है। लिहाजा साइबर अपराधी लोगों को अपना शिकार आसानी से बना लेते हैं। वे फर्जी आईडी के जरिए लोगों के साथ ठगी करते हैं। ऐसे में यदि पुलिस मामले की तह तक जाने की कोशिश करती है तो उसके हाथ नाकामी ही लगती है। इसके अलावा साइबर अपराधी अपनी पहचान आसानी से छुपा लेते हैं। यही नहीं कोई व्यक्ति विदेश से दूसरे देश के लोगों को अपना शिकार बना सकता है। स्थानीय स्तर पर ऐसे अपराधों पर नियंत्रण लगाने के लिए साइबर सेल का गठन किया गया है। लेकिन अधिकांश साइबर सेल में शिकायत दर्ज कर लीगल बोर्ड को भेज दिया जाता है। यहां पहुंचते ही मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। खुद साइबर सेल की हालत खराब है। यहां साइबर विशेषज्ञों की बेहद कमी है। इसके कारण अपराधी को तत्काल पहचानना मुश्किल हो रहा है। यही नहीं यहां तैनात कर्मचारियों को कायदे से डिजिटल साधनों को हैंडल तक नहीं करने आता है। ऐसे में ये महज शो पीस बनकर रह गए है। जाहिर है यदि सरकार प्रदेश में हो रहे साइबर क्राइम को कम करना चाहती है तो उसे साइबर सेल को पूरी तरह हाईटेक करना होगा। इसके अलावा इसके लिए कड़े कानूनों का प्रावधान करना होगा। साथ ही जनता को जागरूक भी करना होगा।

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